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Tuesday, September 23, 2014

बिला वजह लेता बुला, बला बिलावल पूत ; चर्चा मंच 1745

रविकर
 
बिला वजह लेता बुला, बला बिलावल पूत । 
दुस्साहस देगी सुला, यह भारत मजबूत । 

यह भारत मजबूत, दूध की खातिर रोना । 
भिजवा देंगे खीर, चार छ: लाख भगोना । 

चाहोगे कश्मीर, लुटेगा तिरा काफिला । 
देंगे तुझको चीर, नानियां मरें बिलबिला ॥ 

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

जब से छोटा हो गया, रुपये का आकार।
तब से बौना हो गया, रिश्तों का संसार।।
--
बिगड़ रही है व्यवस्था, बेबस है सरकार।
कीमत रुपये की घटी, मँहगाई की मार।।

गौतम राजरिशी 


 
Anusha Mishra 

HARSHVARDHAN TRIPATHI 

Virendra Kumar Sharma 


 
प्रमोद ताम्बट 


मनोज कुमार 



सुशील कुमार जोशी 


 
Prabodh Kumar Govil


डा0 हेमंत कुमार ♠ Dr Hemant Kumar 

6 comments:

  1. सुन्दर है दोस्त .बिला वजह लेता बुला, बला बिलावल पूत -
    रविकर
    "कुछ कहना है"

    बिला वजह लेता बुला, बला बिलावल पूत ।
    दुस्साहस देगी सुला, यह भारत मजबूत ।

    यह भारत मजबूत, दूध की खातिर रोना । भिजवा देंगे खीर, चार छ: लाख भगोना ।

    चाहोगे कश्मीर, लुटेगा तिरा काफिला । देंगे तुझको चीर, नानियां मरें बिलबिला ॥

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  2. मेहनत दिख रही है आज की सुंदर प्रस्तुति में । आभार है 'उलूक' का रविकर जी सूत्र 'बीमार सोच हो जाये तो एक मजबूत शब्द भी बीमार हो जाता है' को स्थान दिया ।

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  3. बहुत शानदार और व्यवस्थित चर्चा।
    आपका आभार आदरणीय रविकर जी।

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  4. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति !
    आभार!

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  5. adarniy ravi ji sundar charcha , abhaar hamaen bhi shamil kar aapne krutardh kiya

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  6. काफी मेहनत लगी होगी ऐसे लिंक्स एकत्रित करने में .....निहायती उम्दा लिंक्स से सजी चर्चा रही.
    काश कि आज की चर्चा बिलावल पढ़ लेता बेचारा शर्म से मर जाता. :D

    : पासबां-ए-जिन्दगी: हिन्दी

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