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Tuesday, March 05, 2019

"पथरीला पथ अपनाया है" (चर्चा अंक-3265)

मित्रों
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

कल रहे ना रहे हम..  

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अंग भभूत मली 

श्री शिव शंकर संसार सार,  
करते थे अपना श्रृंगार।  
सँभाल कर जटाओं में गंग,  
धारण कर नाग-चन्द्र।  
मलने लगे भभूत, महादेव अवधूत... 
मन के वातायन 

पड़ोसी 

जीजा और साले ने मिलकर शहर से दूर, एक सुनसान इलाके में, मकान बनाने की इच्छा से, तीन बिस्वे का एक प्लॉट खरीदा। मिलकर खरीदने के पीछे कई कारण थे। पहला कारण तो यह कि दोनो की हैसियत इतनी अच्छी नहीं थी कि अकेले पूरे प्लॉट का दाम चुका सकें। दूसरा कारण यह कि सुनसान इलाके में दो परिवार साथ होंगे तो दोनो को अच्छा पड़ोसी मिल जाएगा। प्लॉट खरीदते समय दोनो के मन में अच्छे पड़ोसी मिलने पर होने वाले फायदों के लड्डू फूट रहे थे... 
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 

अभिनंदन 

Akanksha पर Asha Saxena 
करती हूँ मैं विनय निरंतर
निराकार निर्मल निर्गुण की
शुभता भर दें वेदना हर लें
पवित्र-भूमि की हर कण-कण की.
शुभ्र दीप्त अलोक की लौ से... 

5 comments:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  2. सार्थक चर्चा गुरुदेव.

    चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार.

    ReplyDelete
  3. सुंदर चर्चा मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार।

    ReplyDelete
  4. सुप्रभात
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद |

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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