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Monday, March 11, 2019

"लोकसभा के चुनाव घोषि‍त हो गए " (चर्चा अंक-3270)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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अपरिचित या पूर्व-परिचित 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा 
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सुनहरी सी लड़कियाँ! 

यह कविता मेरी स्कूल और कॉलेज की दोस्तों के लिए है और शायद थोड़ी बहोत whatsapp को भी समर्पित है क्यूंकि मैं यहाँ अमेरिका में रहती हूँ मगर whatsapp के ज़रिये उनके साथ अक्सर जुड़ पाती हूँ! Thank you whatsapp for connecting me to my flavourful, gorgous, youthful, wise and compassionate friends!... 
Anjana Dayal de Prewitt  
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फद्गुदी 

दौड़ रहा है सरपट सूरज
समेटने अपनी बिखरी रश्मियों को.

घुला रही हैं अपने नयन-नीर से,
नदियाँ अपने ही तीर को... 
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6 comments:

  1. बहुत सुंदर चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  2. सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।

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  3. बहुत सुंदर। बधाई और आभार।

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  4. बहुत खूबसूरत चर्चा

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete

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