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Friday, May 22, 2020

"धीरे-धीरे हो रहा, जन-जीवन सामान्य।" (चर्चा अंक-3709)

शुक्रवार की चर्चा में आप सबका
हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन ।
आज की चर्चा का शुभारंभ
स्मृतिशेष केदारनाथ जी कविता से करते हैं -
--
"आज नदी बिलकुल उदास थी। 
सोई थी अपने पानी में, 
उसके दर्पण पर- 
बादल का वस्त्र पडा था। 
मैंने उसको नहीं जगाया, 
दबे पांव घर वापस आया।"
---
अब बढ़ते हैं आज के चयनित सूत्रों की ओर
--
अब अपनी सरकार ने, खड़े कर दिये हाथ।
जीना होगा खुद हमें, कोरोना के साथ।।
-- 
नहीं अभी कम है हुई, कोरोना की मार।
सामाजिक अलगाव से, होगा बेड़ा पार।।
--
धीरे-धीरे हो रहा, जन-जीवन सामान्य।
लोगों के घर में पुनः, आयेगा धन-धान्य।।
***
सुदूर दिश में दौड़ता अबोध छौना
बादल-सी भरता भोली कुलाँच। 
तपती धूप ने किया है कोई फ़रेब या 
उमसाए सन्नाटे ने लगाई है आँच।
***
जानते हैं हम
लंगड़ी – बौनी ज़िन्दगी का
बैसाखियों वाला जुलूस
कुछ पन्नों तक जायेगा ,
और
उपलब्धियाँ उसकी
आम नहीं , कुछ ख़ास के ही दाय में आयेंगी |
***
चीरती है बादलों को
दामिनी करती है शोर।
मेघ काले गर्जना सुन
झूमते उपवन में मोर।
प्रीत के अनमोल धागे
विरह गाथा कह रही है।
प्रीत की फुलवारियाँ भी
वेदना सहती रही हैं।
***
सड़कें सुनसान हो गयी,
जिंदगियां परेशान हो गयी,
जिन गलियों में जीवन बीता,
आज कितनी वीरान हो गयी।
***
जाते-जाते 
समय की हवा 
अपने साथ 
कितना कुछ ले गयी 
कुछ यादें कुछ ज़ख्म 
दे गयी मुझे 
रिश्तों के मरहम 
अपने साथ ले गयी। 
***
पल-पल समय के साथ, कहा-सुनी जारी है   
वो कहता रहता है, मैं सुनती रहती हूँ,   
अरेब-फरेब, जो उसका मन, बोलता रहता है   
कान में पिघलता सीसा, उड़ेलता रहता है   
मैं हूंकार भरती रहती हूँ, मुस्कुराती रहती हूँ  
***
कलम का जादू है या जलधारा का, लेखक के ललित गद्य और कविता में अंतर नहीं रह जाता, लेकिन वे स्वयं अपने लेखन और कविताई की मौज लेते हैं। अपने तईं कविता करते हुए लिखते हैं- ‘‘बादल उड़ती नदी है, नदी बहता बादल है।‘‘ और बताते हैं कि नोटबुक में लिखी पंक्तियाँ, उनके कवि मित्र द्वारा इसे कविता न मानते हुए रद्द कर दी गई।
***
मैं सुनती हूँ
अपने अंदर 
बेचैन कर देने वाली चुनौतियां
जो जीवन की उत्कृष्ट राह की ओर
धकेलती है मुझे
परिचय कराती है
अपने ही एक भिन्न अक्स से
***
मयकशी की बात रहने दीजिए
हमें तो अरसा हुआ तौबा किए।

होश में वो आएं जो मदहोश हों
तोहमतें मत अब लगाया कीजिए।

चांद की तन्हाई उसको ही पता
साथ उसके रतजगे जिसने किए।
***
उस अनन्त पथ के हो राही
बाधाओं से क्या घबराना, 
जन्मों की जो चाह रही है 
उसे थाम कर बढ़ते जाना !
***
पूरे लखनऊ शहर में , क्या गली और क्या मुख्य मार्ग , सभी जगह कदम कदम पे इन भंडारों के दृश्य नजर आ जाते। पूड़ी , कद्दू की सब्जी और नुक्ती यह मुख्य और न्यूनतम व्यंजन है जो खिलाया जाता , इसके अतिरिक्त अब मीठा शर्बत, कोल्ड ड्रिंक और आइस क्रीम भी प्रचलन में आ गया है।
***
लाशों के अंबार लगे हैं
बिछड़ रहे अपनों से अपने
साँसों की टूटी डोरी में
टूट रहें हैं सपने कितने
बंदी जीवन भय का घेरा
लेकिन सुख का सूर्य उगेगा
मन में आशा आस जगाए
जीवन का ये पुष्प खिलेगा।।
***
भूख से बेहाल तन ,भय से है गमगीन मन 
ख़ामोशी का समंदर ,विषयुक्त हुवा पवन 
सूनी राहें सन्नाटा पसरा ,ठिठका नज़र आता चाँद भी
आती जाती सांसे ,गिन रही हैं अपने दिन।
***
"बाल बाँधतीं क्यों नहीं ये मैडम?
मुझे एक शरारत सूझ रही है, 
टीवी में घुसकर इनके बाल बाँध दूँ!"
मैंने उसे समझाते हुए कहा-
"ये अदाएँ हैं। 
शब्दों पर ध्यान दो।"
***
शब्द-सृजन-22  का विषय है-
मज़दूर/ मजूर /श्रमिक/श्रमजीवी  
आप इस विषय पर अपनी रचना (किसी भी विधा में) 
आगामी शनिवार (सायं 5 बजे) तक 
चर्चा-मंच के ब्लॉगर संपर्क फ़ॉर्म (Contact Form ) के ज़रिये हमें भेज सकते हैं। 
चयनित रचनाएँ आगामी रविवासरीय चर्चा-अंक में 
प्रकाशित की जाएँगीं।
--
फिर मिलेंगे… 
आप सबका दिन मंगलमय हो
"मीना भारद्वाज"
--

12 comments:

  1. बहुत सुंदर चर्चा मीना दी और भूमिका भी समय के अनुकूल ,प्रणाम।

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  2. सार्थक और सुन्दर भूमिका के साथ बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति।
    धन्यवाद मीना भारद्वाज जी।

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  3. भूमिका में सुंदर कविता के साथ बेहतरीन सूत्रों का चयन, आभार मुझे भी आज की चर्चा में स्थान देने के लिए !

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  4. Sabhi bishay bastu bahut lajwaab he. Bhut achha lg raha he padh kar. Aap sabhi ko dhanyavaad

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  5. सुंदर सुभग चर्चा प्रस्तुति

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  6. बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई मेरी रचना को स्थान देने के लिए सहृदय आभार सखी 🌹🌹🙏🙏

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  7. सुंदर लिंकों से सजी बेहतरीन प्रस्तुति मीना जी ,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं ,सादर नमस्कार

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  8. बेहतरीन प्रस्तुति आदरणीया मीना दीदी. मेरे सृजन को स्थान देने हेतु तहे दिल से आभार.
    सादर

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  9. मीना जी

    आकर्षक भूमिका के साथ। ... रोचक सूत्रों का चयन ...बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति....सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई

    मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार
    आपने बहुत अच्छे सूत्र संजोये हैं। .रोचक

    हार्दिक शुभकामनाएं ,सादर नमस्कार

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  10. बहुत सुंदर चर्चा अंक, मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार मीना जी।

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  11. बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण।सारगर्भित काव्यांश से भूमिका का आग़ाज़। बेहतरीन सूत्रों का चयन। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ। मेरी रचना सम्मिलित करने के लिए सादर आभार आदरणीया मीनाजी।

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