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Wednesday, May 06, 2020

"शराब पीयेगा तो ही जीयेगा इंडिया" (चर्चा अंक-3893)

मित्रों।
हम भारतवासी भी खूब हैं, जो किसी नियम कानून में नहीं बँधें है। शासन प्रशासन के लिए तो यह चिन्ता की बात है ही किन्तु लोग इस बात को नहीं समझ रहे हैं कि वायरस से खुद उनको ही संक्रमित होकर काल के ग्रास में समाना होगा। 
इतने दिनों से पुलिस ने जिस मेहनत से लॉकडाउन का पालन कराया वो एक ही दिन में मानो मुँह चिढ़ाने लगा हो। लॉकडाउन 3.0 के पहले ही दिन लॉकडाउन की धज्जियां उड़ती हुई दिखाई दीं। 
पूरे देश में कोरोना का कहर किसी से भी छुपा नहीं है। देश के साथ ही विभिन्न राज्यों के हालात भी सामान्य नहीं है। इस बीच सरकारों ने प्रदेशों में कुछ रियायतें देने का फैसला लिया और इसमें सबसे बड़ा फैसला रहा प्रदेश में शराब की बिक्री की शुरुआत करना। राज्य सरकारों ने ग्रीन और आरेंज जोन में सोमवार से 33 प्रतिशत उपस्थिति के साथ सरकारी कार्यालय खोल दिए जबकि निजी कार्यालय भी मास्क पहनने, एकदूसरे से दूरी बनाये रखने के नियम का पालन करने तथा एसी जैसे उपकरणों का उपयोग न करने की पाबंदी के साथ खुल गए। 
ज्यादा भीड़ के चलते कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने की आशंका के मद्देनजर दुकानों को बंद किए जाने की अफवाह फैलने से बाहर खडे लोग और बेचैन नजर आए। शराब की दुकानों के बाहर तैनात पुलिसकर्मियों को लोगों को नियंत्रित करने तथा उनसे एकदूसरे से दूरी बनाए रखने के नियम का पालन करवाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। 
जनता को जो रियायते मिलीं हैं वह इसलिए है कि आम लोगों की परेशानियाँ कम हों। 
अतः हमें नियमों का पालन कठोरता के साथ करना चाहिए।
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अब देखिए बुधवार की चर्चा में  
मेरी पसन्द के कुछ लिंक... 
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बेबसी

बेबसी लॉकडाउन बढ़ने के तीसरे चरण की घोषणा होते ही विपुल के माथे पर चिन्ता की लकीरें और गहरी हो चली थीं। खाली बटुए को देख वह स्वयं से प्रश्न करता है कि अब क्या करें ? यद्यपि शहर में हितैषी तो कई हैं ,पर वर्षों से उसने किसी के समक्ष हाथ नहीं फैलाया था। उसका यह स्वाभिमान भी खंडित होने को था ,किन्तु तभी उसकी चेतना ने सावधान करते हुये कहा- " जानते हो न कि ऐसे वक़्त में किसी से आर्थिक सहयोग की मांग, आपसी संबंधों को लॉक करने जैसा है।" ... 
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गुलाबी सोना ... 

यूँ तो Social Media पर " पेड़ बचाओ " की पैरवी करने वाले कई लोग एक-एक पौधे को 10-1015-15 लोगों द्वारा पकड़ कर वृक्षारोपण का स्वांग करने वाली Selfie चिपकाने/चमकाने में अकड़ महसूस करते दिखते हैं। जबकि उनके शयन-कक्ष, अतिथि-कक्ष और डाइनिंग-स्पेस में लकड़ी के बेशकीमती फ़र्नीचर उनकी दिखावटी विचारधारा को मुँह चिढ़ाती विराजमान दिख जाती है।
 फ़िलहाल हम तो Lockdown के लम्हों में इन प्रायः फ़र्नीचर बनने के दौरान बढ़ई द्वारा लकड़ी को चिकना बनाने के लिए रंदा से छिले गए छीलन से सुन्दर सा फूल वाला Wall Hanging बनाते हैं... 
Subodh Sinha 
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कोरोना का कहर 

सवैया छंद(आठ भगण) 
( १) 
देखत देखत बीत रहे दिन,चैन नहीं मिलता मन को अब। 
रोग फँसा जग जीवन सोचत,काल कराल पता जकड़े कब। 
हाथ मले सब देखत बाहर,छूट मिले कब काम करें तब। 
पेट भरें तब चैन पडें तन, दौलत भी कुछ पास रहे जब... 
Abhilasha 
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एक वाइरस ने  बदला  

धरा को विशाल कब्रिस्तान में 

मन करता है कि  
मैं बन जाऊँ आकाश,  
अपने बड़े से आलिंगन में समेट लूँ 
सम्पूर्ण पृथ्वी का दुख,... 
एक बूँद पर Pooja Anil 
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नोट की कीमत 

कौन कहता है
नोट की कीमत
करता है तय
उस पर लिखा नम्बर
उसकी कीमत करती है तय
जेब
दो अंकों का नोट
हो सकती है किसी की 
भूख... 
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प्रश्न 

मन की सतह पर
तैरते अनुत्तरित 
 प्रश्न
महसूस होते हैं
गहरे जुड़े हुये...
किसी 
रहस्यमयमयी
अनजान,
कभी न सूखने वाले
जलस्त्रोत की तरह..,
मन के पाखी पर Sweta sinha  
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मयूरा के भाग वंशी की तान! 

वेणु की सुन कर पुकार,
गोपिन सब सुध-बुध गयीं हार,
गड़ - गड़ मेघों की मिली ताल,
चित मयूरा पर हरि गये हार,
हाय! गोपिन के मन में डाह,
मयूरा के भाग वंशी की तान! 
आत्म रंजन पर Anchal Pandey 
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क्या लड़की होना हैं पाप?  

करिश्मा सिंह 

क्यों ऐसा होता हैं
बीज बनते ही साजिश रची जाती हैं,
बाबुल ने ऐसा क्या गुनाह किया जो
ममता की आंचल में पांव रखने से पहले
गर्भ में मार दि जाती हैं,
तुम ही बताओ दुनियां वालो क्या लड़की
होना हैं पाप... 
Sriram 
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सारी लड़ाई 

आदमी की बसाई
इस बेहतरीन दुनिया की
सारी लड़ाई,
थी, है और होती रहेगी ..
मानसिकता की । 
नूपुरं noopuram   
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कोरोना काल में किताबें और शायरी -  

डॉ. वर्षा सिंह 

इस कोरोना काल में टोटल लॉकडाउन की स्थिति में किताबों का बहुत बड़ा सहारा है।
किताब की अहमियत पर यह शेर देखें...
क़ब्रों में नहीं हम को किताबों में उतारो
हम लोग मोहब्बत की कहानी में मरे हैं
- एजाज तवक्कल
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यूं तो  स्कूलों- कॉलेजों में पाठ्यक्रम की किताबों से ख़ूब जी चुराते हैं सभी, लेकिन बाद में किताबों से मोहब्बत हो जाती है...
देखी नही किताब उठाकर,
खेल-कूद में समय गँवाया ।
अब सिर पर आ गई परीक्षा,
माथा मेरा चकराया ।।

नाहक अपना समय गँवाया,
मैं यह ख़ूब मानता हूँ ।
स्वाद शून्य का चखना होगा,
मैं यह ख़ूब जानता हूँ ।।
- डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’
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किताबों में पढ़े हुए सबक विपरीत परिस्थितियों में याद आते हैं....
कुछ और सबक़ हम को ज़माने ने सिखाए
कुछ और सबक़ हम ने किताबों में पढ़े थे
- हस्तीमल हस्ती
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किताबों की दुनिया में जा कर व्यक्ति स्वयं की चिन्ताओं को भूल जाता है....
ये इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
- जाँ निसार अख़्तर
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     तो मित्रों, इन दिनों किताबें ही सहारा हैं Stay Home Stay Safe with favorite books of Ghazals 😊 🙏  
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लॉकडाउन में गौरैया 


घर में अकेले हो,तो आने दो गौरैया को अन्दर,बना लेने दो घोंसला,चिंचियाने दो उसे,हो जाने दो ज़रा-सी गन्दगी.
बस थोड़ा सा सह लो,फिर देखना,अकेले नहीं रहोगे तुम,उदासी नहीं घेरेगी तुम्हें,लॉकडाउन तुम्हें अच्छा लगेगा. 

कविताएँ पर Onkar  
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हीरो किसके लिये गा रहा था ? 

मैं उस स्वप्नलोक से बाहर निकली ,जिसे लोग प्यार होना कहते हैं  .
लेकिन राजकपूर ( राज )आज भी मेरे प्रिय अभिनेता हैं . 'दीवाना' का तो अब ध्यान नहीं पर 'आवारा', 'अनाड़ी' , 'छलिया', 'श्री चार सौ बीस' , 'तीसरी कसम' ,'जागते रहो' , 'चोरी चोरी' ,'जिस देश में गंगा बहती है' मेरा नाम जोकर खानदोस्त आदि फिल्में जब भी देखने मिलतीं हैं मैं जरूर देखती हूँ . 
Yeh Mera Jahaan पर 
गिरिजा कुलश्रेष्ठ 
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क्या शराब पीयेगा तो ही जीयेगा इंडिया 

लॉकडाउन-3 लागु होने के साथ-साथ शराब की बिक्री को भी हरी झंडी मिल गई। शराब की दुकानों के सामने आधे से डेढ़ किलोमीटर तक लंबी लाइने लगी। लोगों की भीड़ देख कर, कोरोना के फैलने की आशंका देख कर एक ही बात मन में आ रही हैं कि क्या शराब पियेगा तो ही जियेगा इंडिया? 
क्यों खोली गई शराब की दुकानें? 
शराब की दुकाने खुलने का इंतजार सिर्फ़ शराब बेचने वाले या खरीदने वाले ही नहीं कर रहे थे। कई राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार से सिफारिश की थी कि शराब की दुकानों को खोल दिया जाएं। कुछ राज्य तो शराब की होम डिलीवरी तक कराने को राजी थे... 
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शैवतीर्थ उनाकोटी,  

जहां बिखरी पड़ी हैं  

असंख्य मूर्तियां और प्रतिमाएं 

कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
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संजीदगी 

जिससे बात करो यही उत्तर होता  

थोड़ी संजीदगी रखो

 मन को इतनी छूट न दो
 किसी कार्य में रखो व्यस्त मन को |
 स्वप्न आएँगे तो अवश्य पर दिल नहीं दुखेगा
 बुरे स्वप्नों से कोसों दूर
वे होंगे प्रसन्नता से भरे... 

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डायरी के पन्नें 

तुम्हारी बाहों के आगोश में  
यमुना के पानी में पैर डुबो महसूस करती रही तुम्हें 
प्यार यहीं है बस 
ताजमहल की यादें कड़ी नंबर एक... 
स्पर्श पर deepti sharma  
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वृंदा 

रात के अंतिम पहर में धुँधले पड़ते तारों में तलाशती है अपनों के चेहरे। ऐसा लगा जैसे एक-एक कर साथ छोड़ रहे हैं उसका और वह ख़ामोशी से खड़ी सब देख रही है। एक आवाज़ उसे विचलित कर रही है। हक नहीं तुम्हें कुछ भी बोलने का। ज्ञान के भंडारणकर्ता हैं न,समझ उड़ेलने को। तुम क्यों आपे से बाहर हो रही हो। 
"तुम्हें बोलने का हक नहीं है।"
बुद्धि ने वृंदा को समझाया और बड़े स्नेह से दुलारा... 
अवदत् अनीता पर Anita saini 
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बालकविता  

"गर्मी में खीरा वरदान"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

तन-मन की जो हरता पीरा
वो ही कहलाता है खीरा 
खीरा गर्मी में वरदान
इसके गुण को लो पहचान 
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आज के लिए बस इतना ही...।
फिर मिलेंगे।
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20 comments:

  1. चार मई का नाम " ड्रिंकिंग डे" रख देना चाहिए ताकि भविष्य में लोग यह जान सके कि निहित स्वार्थपूर्ति के लिए शासक कितना निष्ठुर हो जाता है कि देवालय पर ताले लटके हो और मदिरालय खोल दिये गये। अपने इस छोटे से मीरजापुर में भी प्रथम दिन एक करोड़ की शराब बिक गयी ।
    विचारणीय भूमिका एवं प्रस्तुति । मंच पर मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार गुरुजी।

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  2. सुन्दर चर्चा.मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार

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  3. बेहतरीन..अभी नहीं मरना है , पहले शराब पि लेना है। ......

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  4. सुंदर रचनाओं की खूबसूरत प्रस्तुति

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  5. मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार सहित धन्यवाद सर |

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  6. सार्थक भूमिका के साथ सुंदर प्रस्तुतीकरण। पठनीय एवं विविधतापूर्ण समकालीन विषयों पर चिंतन रचनाएँ। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

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  7. सर ! सुप्रभात संग नमन आपको ... और आज की आपकी अपनी इंद्रधनुषी प्रस्तुति के बीच मेरी रचना/विचार को साझा करने के लिए आभार आपका ...
    किसी भी नियम-क़ानून को तोड़ने वाली यह वही "जनता" है (भले ही अभी शराब लेने वालों की कतार में social distancing का मुद्दा गरमाया हो) जो -

    1) वर्षों से दहेज़ विरोधी अधिनियम के बावजूद इस की धज्जियाँ उड़ाती आ रही है, जिनमें बुद्धिजीवी वर्ग ही ज्यादा सक्रिय है, शायद ..
    2) यातायात को सुगम करने और ध्वनि-प्रदूषण को रोकने की नियमों को अँगूठा दिखाती सड़कों पर जाम लगाते हुए, गर्दन अकड़ाते हुए बारात लेकर निकलती है, वो भी अधिकांश रात के 10 बजे के बाद।
    (भरी दोपहरी में पूरी सड़क कुछ घण्टों के लिए सम्प्रदायविशेष की उपासना के लिए विशेष दिन को भी बंद कर दी जाती है।)
    3) देवालय, देव और देवी-जागरण के नाम पर ध्वनि प्रदूषण को रोकने वाले सारे समय और डिसिबल वाले नियमों को ताक पर रख कर वो भी रात-रात भर बड़े-बड़े लाउडस्पीकर से शहर भर की नींद हराम की जाती है।
    4) जिसे खुद की सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनाने के लिए जुर्माना लगाना पड़ता है। जिस जुर्माने को बढ़ाने पर एक वर्ग को तकलीफ होती है। भाई, नियम तोड़ोगे ही नहीं तो जुर्माना कम हो या ज्यादा क्या फ़र्क पड़ता है भला।
    ऐसे बहुत सारे नमूने हैं हमारे इर्द-गिर्द जो नियमों को मुँह चिढ़ाते हैं। अगर हम इन मौकों पर नहीं चौंकते और कलम नहीं चलाते हैं तो फिर उन पर कलम चला कर क्या लाभ जो पहले से ही मूढ़ हैं।
    हाँ ... मूढ़ ही तो हैं, तभी तो शराब के बोतल पर लिखी " संवैधानिक चेतावनी - मद्यपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। " का भी असर नहीं होता इन पर। .. शायद ...
    है कि नहीं ?

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  8. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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  9. चिंतनपरक भूमिका के साथ सुंदर लिंको का चयन ,सादर नमस्कार सर

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  10. विविध रचनाओं का रोचक संकलन. सभी लिखने वालों को बधाई.
    सारी लड़ाई ...को जगह देने के लिए हार्दिक आभार शास्त्रीजी.

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  11. बहुत ही सुंदर भूमिका के साथ सुंदर प्रस्तुति आदरणीय सर. मेरी लघुकथा को स्थान देने हेतु सादर आभार.

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  12. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  13. चिंतन परक भूमिका,विविध विषयों पर आधारित चयनित रचनाएं सार्थक ,उत्तम और उद्देश्य पूर्ण हैं,सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं,मेरी रचना को स्थान देने के लिए सहृदय आभार आदरणीय 🙏🙏
    चालीस दिनों तक घरों में बंद रहने वाले व्यसनियों का ये हाल तो होना ही था-

    हाला सबकी प्रिय बनी,भूले सब भगवान।
    इस हाला के सामने,ज्ञानी खोए ज्ञान।

    अभिलाषा चौहान'सुज्ञ'

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  14. समसामयिक चिंतनशील भूमिका और इंद्रधनुषी सूत्रों से सजी सुंदर प्रस्तुति में मेरी रचना शामिल करने के लिए आभारी हूँ आदरणीय सर।
    सादर।

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  15. सुंदर भूमिका के साथ उम्दा लिंक्स। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए और उसे चर्चा अंक का शीर्षक बनाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  16. बहुत अच्छे लेख के लिए आप के प्रति हृदय से आभार। बेहद दुखद और भयावह स्थिति उत्पन्न हो रही है। कोरोना वारियर्स के मन की व्यथा का आकलन करना मुश्किल है। इतने दिनों तक उन्होंने किस तरह इस देश को संभाला और आज स्थिति उलट ही नजर आ रही है। किसी सज्जन व्यक्ति को तो पुलिस वाले समझा-बुझाकर या डंडे के बल पर घर में रहने के लिए विवश कर सकते हैं लेकिन किसी मादक पदार्थ का सेवन किए हुए विक्षिप्त व्यक्ति को कैसे रोकेंगे यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है और कहीं ना कहीं उन्हें हतोत्साहित भी कर रहा होगा।

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  17. विचारणीय भूमिका संग लाजवाब प्रस्तुति और सभी चयनित रचनाएँ भी बेहद उम्दा। मेरी रचना को स्थान देने हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीय सर। सादर प्रणाम 🙏

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  18. बहुत अच्छा संकलन


    मेरी तो ये समझ में नहीं आता कि शराब की दूकान खोलने के बाद शराबियों से लोग होश में रह कर सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने जैसे काम करने की उम्मीद ही क्यों करते हैं ?????

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  19. बहुत सुंदर चिंतन परक भूमिका ।
    विविध विषयों पर शानदार लिंक संकलन कर सुंदर गुलदस्ते सी प्रस्तुति।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने केलिए हृदय तल से आभार।

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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