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Sunday, July 19, 2020

शब्द-सृजन-30 'प्रार्थना/आराधना' (चर्चा अंक-3767)

 सादर अभिवादन।
रविवासरीय प्रस्तुति में आपका हार्दिक स्वागत है।
--
शब्द-सृजन-30 के लिए विषय  दिया गया था-
'प्रार्थना /आराधना'
            प्रार्थना इंसान को मूल्याधारित जीवन जीने की ओर प्रेरित करती और सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति स्वयं को समर्पित करते हुए सकारात्मक भाव लिए आस्थावान बनाती है। 
प्रार्थना एक विश्वास है अपने आराध्य के प्रति जो फलित रूप में याचक/आराधक को संभावनाओं के व्योम में विचरण कराता है जहाँ जीवन मूल्य पोषित और पल्लवित होते हैं। 
-अनीता सैनी 
आइए प्रस्तुति के आंरभ में सुनते हैं एक प्रार्थना-
 --
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महान कवयित्री श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान जी की एक प्रार्थना-
सुभद्रा कुमारी चौहान  SUBHADRA KUMARI CHAUHAN
जब मैं आँगन में पहुँची,
पूजा का थाल सजाए।
शिवजी की तरह दिखे वे,
बैठे थे ध्यान लगाए।।
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अब पढ़ते हैं 'शब्द सृजन' के विषय 'प्रार्थना' / 'आराधना' पर सृजित आपकी ही कुछ रचनाएँ- 
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गीत 
आराधना प्रभू की जीवन में
बहुत महत्व रखती है
कठिन से कठिन कार्य
मिनटों में दूर कर देती है  |
--
प्रार्थना 

प्रार्थना की खुशबू पहुँचे तुझ तक
ऐसा एक दृढ़ विश्वास कर लूँ ।
आज मैं अपने आँसू को गंगा 
और भक्ति को पुराण कर दूँ ।
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प्रार्थना ।।दुर्मिल सवैया।। 
रथ हांक चले मथुरा नगरी ,
बरसें दृग ज्यों बरसी बदरी । 
वृषभानु सुता चुपचाप रही,
मग द्वार खड़ी सखियांसगरी ।।
--
अंतर्मन की सच्ची पुकार है प्रार्थना.... 

    "प्रार्थना" निश्छल हृदय से निकली अंतर्मन की सच्ची पुकार है। जब भी कोई मनुष्य किसी संकट में होता है,परेशानी में होता है,जब बाहरी दुनिया के लोग उसकी सहायता नहीं कर पाते तब, असहाय होकर उस परम सत्ता से वो मदद की गुहार लगता है।उसका दर्द, उसकी पीड़ा प्रार्थना के रूप में उस परमपिता तक पहुँचती है
--
प्रार्थना 
किसी भी देव-स्थल पर जाकर एक  सकारात्मकता भरा सुकून और
असीम शान्ति का अहसास हमारे मन को  होता है।  मेरी नजर में
इसका कारण वो असीम शक्ति है जिसे हम अपना आराध्य इष्ट 
मानते हैं। 
--
हम चलें एक कदम
फिर कदम दर कदम
यूँ कदम से कदम हम
फिर बढाते चले.......
जिन्दगी राह सी,और
चलना गर मंजिल.....
नयी उम्मीद मन में जगाते रहें.......
खुशियाँ मिले या गम
हम चले,हर कदम
शुकराने तेरे (प्रभु के) मन में गाते रहें......
--
  हाँ ! सही कहा ; पतिदेव !
कर्तव्य और फर्ज भी है यही मेरा
और यही कामना भी रही सदैव कि-
सफलता मिले तुम्हें हर मुकाम पर
लेकिन मैं प्रभु से प्रार्थना ये करूँ कैसे ??
कपटी, स्वार्थी, अहंकारी और भ्रष्टाचारी
बन जाते हो तुम सफलता पाते ही ...!!!!
फिर मैं मन्दोदरी बनूँ  कैसे  ???......
--
प्रार्थना 

अनासक्त भाव से भर जाऊँ 
हे ! प्रभु ऐसी  भक्ति दो। 
कर्म-कष्ट सहूँ आजीवन बस 
मुझ में इतनी शक्ति दो। 
--
आज का सफ़र यहीं तक 
फिर मिलेंगे 
आगामी अंक में🙏
--
-अनीता सैनी 

10 comments:

  1. आस्था के भाव पोषित करती सुन्दर भूमिका के साथ
    आध्यात्मिकता के रंगों से सजी आज की शब्र्द-सृजन की प्रस्तुति। आभार अनीता प्रस्तुति में सृजन को सम्मिलित करने हेतु ।

    ReplyDelete
  2. शब्द सृजन विशेषांक पर चयनित रचनाओं का सुन्दर संकलन।
    आपका आभार अनीता सैनी जी।

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  3. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  5. बहुत ही सुंदर भूमिका के साथ भक्ति रस में डूबी प्रस्तुति,मेरी रचना को स्थान देने के लिए दिल से आभार प्रिय अनीता जी,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  6. प्रार्थना एक विश्वास है अपने आराध्य के प्रति जो फलित रूप में याचक/आराधक को संभावनाओं के व्योम में विचरण कराता है ।
    बहुत ही सुन्दर भूमिका के साथ लाजवाब प्रस्तुति
    सभी रचनाएं बेहद उम्दा....
    शब्दसृजन विशेषांक में मेरी रचना को स्थान देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद अनीता जी!

    ReplyDelete
  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete
  8. फल गई साधना मेरी,
    तुम आईं आज यहाँ पर।
    उनकी मंजुल-छाया में
    भ्रम रहता भला कहाँ पर।।

    अपनी भूलों पर मन यह
    जाने कितना पछताया।
    संकोच सहित चरणों पर,
    जो कुछ था वही चढ़ाया।।
    सुभद्राकुमारी चौहान की ये अमर पंक्तियाँ और दुसरी भक्ति भाव भरी रचनाओं के साथ सुंदर अंक प्रिय अनीता | सभी को सस्नेह शुभकामनाएं|

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  9. वाह अनुपम लिंक्स के साथ शानदार प्रस्तुति

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  10. देर से आ पाई ,
    बहुत सुंदर रचनाओं का सुंदर संकलन।
    सभी का प्रार्थना पर सृजित सुंदर सृजन।
    सभी रचनाकारों को सुंदर लेखन की बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए तहेदिल से धन्यवाद।

    ReplyDelete

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