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Wednesday, July 22, 2020

"सावन का उपहार" (चर्चा अंक-3770)

 मित्रों ! 
आज की भूमिका में प्रस्तुत है।
श्रावण मास के पर्वों की जानकारी
सावन मास को पवित्र मास माना जाता है। यह मास महादेव को अतिप्रिय है और इस मास में शिव आराधना से शिवभक्तों के समस्त कष्टों का नाश होता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मास में भक्त शिवलिंग पर जल, बिल्वपत्र, भांग, धतूरा, सुगंधित फूल, ऋतुफल, मेवे, मिष्ठान्न समर्पित करता है। इस मास में कई प्रमुख तिथि और त्यौहार भी आते हैं। इनमें से प्रमुख इस प्रकार है।
सावन शिवरात्रि 
सावन मास शिव का प्रिय मास है और इस मास की शिवरात्रि के दिन भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस साल सावन शिवरात्रि 19 जुलाई रविवार को है। इस दिन महादेव के साथ देवी पार्वती की आराधना की जाती है।
सावन मास को पवित्र मास माना जाता है। यह मास महादेव को अतिप्रिय है और इस मास में शिव आराधना से शिवभक्तों के समस्त कष्टों का नाश होता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मास में भक्त शिवलिंग पर जल, बिल्वपत्र, भांग, धतूरा, सुगंधित फूल, ऋतुफल, मेवे, मिष्ठान्न समर्पित करता है। इस मास में कई प्रमुख तिथि और त्यौहार भी आते हैं। इनमें से प्रमुख इस प्रकार है।
कमिका एकादशी 
कमिका एकादशी का पर्व 16 जुलाई गुरुवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश हो जाता है। सावन मास में श्रीहरी की पूजा करने से समस्त देवी-देवताओं की पूजा का फल प्राप्त हो जाता है
सावन शिवरात्रि 
सावन मास शिव का प्रिय मास है और इस मास की शिवरात्रि के दिन भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस साल सावन शिवरात्रि 19 जुलाई रविवार को है। इस दिन महादेव के साथ देवी पार्वती की आराधना की जाती है।
सोमवती अमावस्या 
इस अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्रकृति पूजा का प्रावधान है। भक्त इस दिन पौधारोपण कर धरती को हरा-भरा करने की कवायद करते हैं। पितृकार्यों के लिए यह श्रेष्ठ फलदायी है। इस साल श्रावणी अमावस्या 20 जुलाई सोमवार को है।
हरियाली तीज 
मान्यता है कि इस दिन महादेव और देवी पार्वती कैलाश छोड़कर धरती पर निवास करते हैं। महिलाओं के लिए इस त्योहार का खास महत्व है।
नागपंचमी 
नागपंचमी का पर्व सावन मनाया जाएगा। इस दिन लोग सर्पों की पूजा और आराधना करेंगे। इस दिन लोग घरों में तवा, कड़ाई चूल्हे पर नहीं चढ़ाते हैं। सब्जियों को काटा नहीं जाता है और सूई धागे तक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। गांवों में लोग अपना पहली फसल को नाग देवता को चढ़ाकर उनका आभार व्यक्त करते हैं। नागों में वासुकी, तक्षक और शेषनाग काफी प्रसिद्ध हैं। इस साल नागपंचमी 25 जुलाई शनिवार को है।
श्रावण पूर्णिमा/रक्षा बंधन 
श्रावण पूर्णिमा का पर्व 3 अगस्त 2020 को है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से श्रावण पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन ही भाई-बहन का पावन उत्सव रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। बहन अपने भाई की दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए उन्हें राखी बांधती है।
गायत्री जयंती 
गायत्री जयंती उत्सव 3 अगस्त को मनाया जाएगा। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गायत्री जयंती मनाई जाती है। हालांकि कुछ स्थानों पर गंगा दशहरा के दिन भी गायत्री जंयती का उत्सव मनाया जाता है। यह पर्व वेदों की देवी मां गायत्री को समर्पित त्योहार है।
बुधवार की चर्चा में सभी पाठकों का स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक... 
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दोहे  

"श्रद्धा से अनुरक्त" 

सावन आने पर धराकरती है शृंगार।
हरा-भरा परिवेश हैसावन का उपहार।१।
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चोटी-बिन्दी-मेंहदीआपस में बतियाय।
हर्ष और अनुराग मेंसुहागिनें बौराय।२।
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तीजों के त्यौहार पर, कर सोलह सिंगार।
आज नारियाँ हर्ष सेगातीं मेघ-मल्हार।३।
--
  उठो चलो
 जी चुके बहुत
सहारों में,
 ढूँढ़ो  न आसरा
 धूर्तों-मक्कारों में ।
परिंदे भी
    चहकते ख़्वाब
    सजाते रहते हैं ,
    उड़ते हैं
    कभी तन्हा
    कभी  क़तारों  में।
Ravindra Singh Yadav
--
साँस नहीं लेता,
मैं तुझे अर्घ्य चढ़ाता हूँ 

गीत नहीं गाता,
मैं तुझे गुनगुनाता हूँ । 

     फूलों में तू है 
          बूंदों में तू है 
               तेरी है धरती 
                    तेरा है नभ भी 
ज़र्रे-ज़र्रे में तेरा वजूद पाता हूँ  
गीत नहीं गाता, 
मैं तुझे गुनगुनाता हूँ । 
--

इक चांद है इस खत में  

| ग़ज़ल |  

डॉ. वर्षा सिंह 

भूली हुई गजलों को  
जब सांझ कोई गाए।
मन दौड़ के बीते दिन  
मुट्ठी में उठा लाए।

खिड़की में हरे शीशे  
लगवा भी लिए तो क्या !
जंगल तो नहीं आकर  
बाहों में समा पाए।
Dr Varsha Singh   
--

मुंशी प्रेमचंद महोत्सव,  

कविता-नरेंद्र राणावत द्वारा 

आओ मरुधर की सैर करा दूँ,  
मेरे अपने गांव में,  
ठण्डी ठण्डी हवाएँ बहती  
खेजड़ी की छाँव में।  
बुजुर्गो की चौपाल सजी  
बरगद गहरी छाँव में,  
तीतर बटेर और पपीहे बोले  
नित दिन मेरे गाँव में,  
ऊंटो की कतार अनुशासित  रुनझुन सजे है पांव में... 
भेंड़ बकरियां ले आया गड़रिया धर कान्धे लाठी गांव में, 
घर की दीवारें करती थी बातें, 
हास हुआ लगाव में
--
--
नफरत से नफ़रत बढ़े, 
बढ़े प्रेम से प्रेम;
नफरत करनी छोड़ दो, 
करके पक्का नेम;
करके पक्का नेम, 
तभी विकसित हो पायें;
वरना इस घृणा से, 
खुद घृणित कहलायें ;
कर दहिया में वास, 
जगत को जाना कुदरत;
सब उसकी संतान, 
कहो किससे हो नफरत । 
चिंतन पर सरोज 
--

यात्रा 

कोरोना के डर से 
बेख़बर,
हिदायतों को 
दरकिनार कर 
लाठी,डंडे, 
गालियां खाकर, 
कभी खुलकर,
कभी छिपकर 
बढ़े चले जा रहे थे वे.
यक़ीन नहीं होता था 
उन्हें देखकर 
कि मौत से 
सब डरते हैं.
कविताएँ पर Onkar  
-- 
--
आज हमारे सत्तर के दशक वाले खेलों के आयाम बदल गए हैं 
Subodh Sinha 
--

आत्म-मंथन 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा 
--   
10 दिन का लॉक डाउन और शुरू। इस बार कोरोना हरदोई जिले से गायब। आशावाद बहुत बड़ी चीज है इसी आशावाद के सहारे भारत में आजतक हंसों से लेकर उल्लुओं तक की सरकारें देश की जनता ने बनवायीं हैं। इसी आशावाद के सहारे हमने ताली व थाली बजाई, दिए जलाये, जनता ने लॉक डाउन की महीनों की तकलीफ झेली। मगर कोरोना हनुमान जी की पूँछ हो रहा है। 
विमल कुमार शुक्ल 'विमल' 
--

दर्द हवेली का ! 

विरासतें थक जातीं हैं, 
पीढ़ियों तक चलते चलते,
और फिर ढह जाती हैं, 
अकेले में पलते पलते ।
हर कोना हवेली का 
अब भरता है  सिसकियाँ ,
चिराग भी बुझ चुके है , 
अंधेरों में जलते जलते ।
--
वो वारिस जिनकी किलकारियां , गूँजी थीं मेरे आँगन में ,
छोड़ कर चल दिए हमें , 
बेगाने  बनकर छलते छलते ।
hindigen 
पर 
रेखा श्रीवास्तव  
--
अक्सर पूछा   
खुद से ही सवाल   
जिसका हल   
नहीं किसी के पास,   
मैं ऐसी क्यों हूँ ?   
मैं चिड़िया क्यों नहीं   
या कोई फूल   
या तितली ही होती,   
यदि होती तो   
रंग-बिरंगे होते   
मेरे भी रूप ... 
-- 
डॉ. जेन्नी शबनम  
--
वो कभी शहर से गुज़रे तो पूछेंगे
अरे सुलू !
यहीं हुआ करता था न आशियाँ हमारा
आम के इस घने छायादार पेड़ के नीचे ?
कितने परिंदे चह्चहाते थे हरदम और
हमारी अनवरत बातों में
अपना भी मीठा सुर मिला कर
कोयल कितने मीठे सुर में गाती थी,
कच्ची अमिया का स्वाद चखने के लिए
कितने तोते झुण्ड बना कर आ जाते थे और तुम सुलू !
Sudhinama पर Sadhana Vaid 
-- 
स्त्री की सुंदरता देखनी है
उसकी आँखों में नही
आँखों के नीचे बने 
काले घेरों में देखो
ये घेरे इस बात के साक्षी हैं 
कि उसकी सुंदरता  
आरोपित नही है... 
PAWAN VIJAY 
--

सावन गीत..... 

गरजत बरसत बदरा आये 
मेघ मल्हार ....सुनाये
सनन -सनन पवन बहे
रिस रिस जिया रिसाये
कल-कल नदिया धुन छेड़े
सावन मधुर-मधुर गाये।।
-- 
मन ही मन सोच रहे नर नारी
जीवन में कैसी विषम घड़ी आई।।
सागर लहरें पर उर्मिला सिंह
--    
उस पन्ने पर क्यों लिखा होगा, 
‘समुन्दर ! 
तुम कितना बड़ा दर्द हो !  
अपनी बाँहों, टांगों से  
सारा दर्द फेंकते किनारे को,  
लेकिन किनारा एक ही  
ठोकर से लौटा देता  
तुम्हारा दर्द तुम्हीं को !’  
Anita  
--
ऐ इश्क़ तेरे ख़ातिर
बेवफ़ाई उसकी बड़ी थी 
इश्क़ मेरा बौना हो गया,
इस तरह खेला उसने 
कि दिल मेरा खिलौना हो गया।
कभी अपनी तक़दीर को कोसते फिर उसकी तस्वीर को देखते,
ऐ इश्क़ तेरे ख़ातिर हमने 
क्या क्या नहीं देखा।
--

बरसात 

था इन्तजार 
हर वर्ष की तरह 
बरसात के इस मौसम का 
धरती में दरारे पड़ी थी 
अपना दुःख किसे बताती | 
झुलसी तपती गरमी से 
वह तरस रही थी  
वर्षा के लिए  
हरियाली की धानी चूनर से 
सजने के लिए... 
--
चलते-चलते 
वसुधा का रंग भी...
और आसमान इन्द्रधनुषी
बस...एक मन का आंगन है 
जिसके छोर से सांझ सी
अबोली उकताहट..
कस कर लिपटी है
जो हटने का नाम नहीं लेती
-000-
शब्द-सृजन-31 का विषय है-
'पावस ऋतु'  
आप इस विषय पर अपनी रचना
(किसी भी विधा में) आगामी शनिवार(सायं 5 बजे) तक चर्चा-मंच के ब्लॉगर
संपर्क फ़ॉर्म (Contact Form ) के ज़रिये हमें भेज सकते हैं।
चयनित रचनाएँ आगामी रविवारीय अंक में प्रकाशित की जाएँगीं।
-- 

 आज के लिए केवल इतना ही...! 

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 

--

12 comments:

  1. सावन मास के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी आपने दी है गुरुजी। सुंदर प्रस्तुति और लिंक्स।
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    श्रावण मास में हम लिंग-स्वरूप महादेव का अभिषेक करना होगा । शिवलिंग मनुष्य का शीश है और धड़ हैं शिवा (पार्वती)। शीश ज्ञान का और धड़ क्रिया का प्रतीक । इसी में सत्यता का एकीकरण होते शिवत्व प्रकट होते विलंब नहीं होगा ।ऐसी स्थिति में आंतरिक बुराई धूँँ-धूँँ कर जल जाएँँगी और रोमछिद्रों से बाहर निकलेंगा भस्म । यही हुई भस्म-आरती। ऐसा भी आचार्यों ने बताया है।

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  2. सुन्दर चर्चा. मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार.

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  3. आज की प्रस्तुति तकनीकी व साज-सज्जा के लिहाज से बहुत ही अनुठी बन कर उभरी है। लगा जैसे कोई पत्रिका पढ रहा हूँ।
    आ. शास्त्री की प्रतिभा व विद्वता का तो पहले से कायल हूँ। लेकिन यह विधा, विश्मयकारी है। ससम्मान शुभकामनाएँ।

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  4. बहुत सुन्दर और विशद चर्चा प्रस्तुति । विविधता सम्पन्न सूत्रों मेंं मेरी रचना को सम्मिलित करने हेतु सादर आभार सर ।

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  5. चर्चा मंच प्रबंधकों विशेषतया मयंक सर का हार्दिक आभार... हार्दिक बधाई इतने वर्षों से मंच के कुशल - सुचारु एवं निर्बाध संचालन के लिये... हार्दिक आभार सहित शुभकामना... हिन्दी साहित्य की सतत् निःस्वार्थ सेवा के लिये...'वृक्ष कबहुँ नहि जल भखै, नदी न संचै नीर' पंक्तियों को चरितार्थ करने के लिये... सच में प्रणाम है 'मयंक' सर की साहित्यिक निष्ठा को...

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  6. बहुमूल्य जानकारी के साथ, बहुत ही खूबसूरत रंगो से सजी रंग-बिरंगी प्रस्तुति आदरणीय सर,सभी लिंक भी शानदार,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं सादर नमस्कार

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  7. अरे वाह ! आज चर्चामंच अपनी पुरातन आन बान और शान के साथ पटल पर अवतरित हुआ है ! हार्दिक बधाई शास्त्री जी ! इस सुन्दर चर्चा में मेरी रचना को भी स्थान मिला आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार ! सादर वन्दे !

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  8. सावन के पावन माह में आने वाले सभी त्योहारों की जानकारी देती शानदार भूमिका।
    सुंदर लिंक चयन।
    सभी रचनाएं बहुत आकर्षक सुंदर।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय तल से आभार।

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  9. सभी रचनाएँ भावपूर्ण ,बहुत सुन्दर हैं ।हमारी रचना को शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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  10. धन्यवाद मेरी रचना को शामिल करने के लिए |उम्दा लिंक्स|

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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