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Wednesday, October 21, 2020

"कुछ तो बात जरूरी होगी" (चर्चा अंक-3861)

 मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
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!!शारदेय नवरात्र!!
जो एक से दूसरे को जोडें उसे पर्व कहते हैं । जैसे हमारी हथेली के ऊपर पर्व होते हैं या गन्ने में गाँठ होती है उसे भी पर्व कहते हैं । इसी प्रकार जो आत्मा को परमात्मा से जोड़े । इंसान को इंसान से जोड़े । जो व्यक्ति को धर्म, परिवार, समाज , देश और विश्व से जोड़े उसे पर्व, महोत्सव या त्यौहार कहते हैं । 
नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना होता है. नवरात्रि के नौ दिनों में देवी शक्ति के नौ अलग-अलग रूप की पूजा-आराधना (Worship) की जाती है। शारदीय नवरात्रि अश्विन मास () के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनायी जाती है। 
शरद ऋतु में आगमन के कारण ही इसे शारदीय नवरात्रि (Sharadiya Navratri) कहा जाता है। ये हर साल श्राद्ध खत्म होते ही शुरू होता है, लेकिन इस बार अधिक मास लगने के कारण नवरात्रि 25 दिन देरी से शुरू हो रही हैं।

शारदीय नवरात्रि पर अखंड ज्योति जलाने के नियम (Navratri Akhand Jyoti Rules In Hindi)

  1. शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानि आज अखंड ज्योति जलाई जाती है। इस दिन साधक को स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और माँ दुर्गा की चौकी की स्थापना करनी चाहिए।

  2. नवरात्रि के दूसरे दिन अखंड ज्योति को नौ दिनों तक जलाने का सकंल्प अवश्य लें और पूरी तरह से इस अखंड ज्योति का ध्यान रखें।

  3. नवरात्रि के तीसरे दिन माता की चौकी स्थापना करने के बाद उस पर हल्दी या फिर हल्दी के रंगे हुए चावलों से अष्टदल कमल बनायें।

  4. अष्टदल कमल बनाकर एक तांबे का पात्र लें यदि आपके पास तांबे का पात्र न हो तो आप मिट्टी का भी पात्र ले सकते हैं, लेकिन मिट्टी के पात्र में अखंड ज्योति जलाने से पहले उसे 24 घंटे के लिए पानी में भिगो दें।

  5. इसके बाद आप जिस भी पात्र में अखंड ज्योत जला रहे हैं उसे अष्टदल कमल के बीचों बीच रख दें। यदि आप घी का दीपक जला रहे हैं तो माँ दुर्गा के दायें और अखंड ज्योत जलाएं और यदि किसी तेल का दीपक जला रहे हैं माँ दुर्गा के बाएं और जलायें।

  6. इसके बाद माँ दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हुए उस अखंड ज्योत को जला दें. उसके बाद अखंड ज्योति के चारों और फूल चढ़ायें।

  7. जब आप अखंड ज्योति जला लें तो पूरे नौ दिनों तक इस अखंड ज्योति के पास ही रहें और ध्यान रखें कि यह अखंड ज्योति न बुझे।

  8. यदि आपकी ज्योति की लौ कम हो रही है तो आप पहले अखंड ज्योति से पहले एक दीपक जला लें और उसके बाद ही अखंड ज्योति को ठीक करें, जिससे यदि आपकी अखंड ज्योति बुझ भी जाए तो वह खंडित न हो।

  9. इसके बाद नवमी तिथि पर कन्या पूजन के बाद भी अखंड ज्योत को जलने दें और उसे खुद से न बुझायें। इस अखंड ज्योत को स्वंय बुझने दें।

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गीत "कुछ मजदूरी होगी"  
महक रहा है मन का आँगन,
दबी हुई कस्तूरी होगी।
दिल की बात नहीं कह पाये,
कुछ तो बात जरूरी होगी।।

अरमानों के आसमान का,
ओर नहीं हैछोर नहीं है।
दिल से दिल को राहत होती,
प्रेम-प्रीत पर जोर नहीं है।
जितना चाहो उड़ो गगन में,
चाहत कभी न पूरी होगी।
कुछ तो बात जरूरी होगी।। 
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अनभिज्ञता है पूर्णता 
तुम्हें ये जो पूर्णता का बोध
ये अनभिज्ञता है तुम्हारी 
तुम्हारे मन-मस्तिष्क का 
उत्सुकता उत्साह पर 
अनचाहा विराम चिन्ह है  
अनीता सैनी, गूँगी गुड़िया 
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दिलबागसिंह विर्क, Sahitya Surbhi 
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हरसिद्धी देवी |  रानगिर |  सागर |  नवरात्रि | शुभकामनाएं 
सागर से करीब 46 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र रानगिर अपने आप में इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि यहां देहार नदी के किनारे स्थित प्राचीन मंदिर में विराजीं मां हरसिद्धि देवी की मूर्ति दिन में तीन रूप में अपने भक्तों को दर्शन देती हैं। सुबह के वक्त कन्या, दोपहर में युवा और शाम के वक्त प्रौढ़ रुप में माता दर्शन देती है। यह सूर्य, चंद्र, अग्नि शक्ति के प्रकाशमय, तेजोमय व अमृतमय करने का संकेत है। किवदंती है कि देवी भगवती के 52 सिद्ध शक्ति पीठों में से एक रानगिर है। जहां सती की रान गिरी थी। इसलिए इस क्षेत्र को रानगिर कहा जाता है।  
Dr Varsha Singh, Varsha Singh  
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मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती  --
त्रिनयनी के अश्रु 
रात के सीने में अंतहीन है अंधकार
की गहराई, ये कैसा उत्सव है,
कैसी निष्प्राण रोशनाई,
हर तरफ है निरुद्ध
जीने की दौड़ 
शांतनु सान्याल, अग्निशिखा 
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आज का उद्धरण 
विकास नैनवाल 'अंजान', एक बुक जर्नल  
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मिसेज दीक्षित  भाग-2 

विनिता दरवाजा बंद कर पूजा अर्चना में व्यस्त हो भजन गाने लगी।

हे जगपालक सबके स्वामी

करो कृपा अब हे अंतर्यामी

साथी जीवन के सब बिछड़े 

कोई ना आगे कोई ना पीछे

किसके लिए रहूँ मैं जीती 

प्रभु सुन लो मेरी आपबीती 

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लघुकथा :  आहट नन्हे कदमों की चन्द पलों में ही जैसे वो नन्हे कदम बड़े हो गए और वो दद्दू की गोद से उतर गई ,"नहीं दद्दू ! मुझे आपकी हथेलियों की सुरक्षा नहीं चाहिए क्योंकि जब कोई ऐसी सामाजिक मजबूरी आ जायेगी तब आप भी विवश हो कर अपना सुरक्षा घेरा तोड़ देंगे । अब मुझको पढ़ाई कर के इतना सशक्त होना है कि अपने साथ ही अपनी माँ और उन जैसी विवश स्त्रियों के लिए मैं हथेली बन जाऊँ ।"  
निवेदिता श्रीवास्तव, झरोख़ा  
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आज के लिए बस इतना ही...।
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16 comments:

  1. एक से बढ़ कर एक उम्दा रचनाओं का चयन.. साधुवाद
    वंदन

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  2. चर्चा मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों,सुधी पाठकों सहित आदरणीय डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक जी को नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 🚩🙏🚩

    इस बहुत अच्छी चर्चा में मेरी पोस्ट को शामिल करने हेतु हार्दिक आभार 🙏🍁🙏

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  3. सुन्दर प्रस्तुति. मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार.

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  4. बहुत सुन्दर सूत्रों से सजी अत्यंत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति ।

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  5. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  6. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति, मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय।

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  7. संक्षिप्त और सुंदर रचना गागर में सागर सुंदरम मनोहरम
    महक रहा है मन का आँगन,
    दबी हुई कस्तूरी होगी।
    दिल की बात नहीं कह पाये,
    कुछ तो बात जरूरी होगी।।

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  8. Alignment of blogs was contemporary ,good write ups specially Roop chndra shastri ,Omkar ji and Anita ji were superb while i praise them am not neglecting ever dominating Varsha singhji .

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  9. सराहनीय चर्चा । साहित्यिक मुरादाबाद ब्लॉग की प्रस्तुति शामिल करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत आभार ।

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  10. सुन्दर सार्थक भूमिका से सुसज्जित आज का चर्चामंच ! सभी सूत्र बहुत ही सुन्दर एवं पठनीय ! मेरी प्रस्तुति को आज की चर्चा में सम्मिलित किया आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  11. चर्चा का बहुत सुन्दर संयोजन... एवं मेरी रचना को उपयुक्त स्थान देने हेतु मयंक सर एवं अन्य सभी व्यवस्थापकों का हृदय से आभार...

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  12. सुन्दर सार्थक प्रस्तुति...

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  13. वाह ..सुंदर अंक
    एक से बढ़कर एक रचनाएँ।

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  14. वाह ..सुंदर अंक
    एक से बढ़कर एक रचनाएँ।

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  15. वाह ..सुंदर अंक
    एक से बढ़कर एक रचनाएँ।

    ReplyDelete

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