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Wednesday, December 16, 2020

"हाड़ कँपाता शीत" (चर्चा अंक-3917)

 मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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दोहे  "खेती का कानून" 
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नभ में सूरज गुम हुआ,  हाड़ कँपाता शीत।
दाँतों से बजने लगा, किट-किट का संगीत।।
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छोड़ दीजिए कृषक पर, खेती का कानून।
नहीं किसानों को रुचा, सरकारी मजमून।।
उच्चारण  
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"आँखें" 

उस पार बंधी है

लौकिक नैया 

 कौन खिवैया

तम की चादर 

कर पार..

भेद खोलना चाहती हैं


थकन भरी  है

आँखों में

बहुत दिन बीते

चैन से सोये

नींद भरे सागर में 

आँखें खोना चाहती हैं

Meena Bhardwaj, मंथन 
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नशेड़ी ज़िंदगी 
ज़िंदगी एक लत है 
उस नशे कि...
जो रोज़-रोज़ 
माँगती है 
अपनी ज़रूरतों को ।

हर ज़रूरत नशा नहीं 
पर जो ज़रूरत नशा बन जाए 
वही लत है 
सधु चन्द्र, नया सवेरा 
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मेरे नाना संत श्यामचरण सिंह - 4  डॉ. वर्षा सिंह |  संत श्यामचरण : जीवन तथा कृतित्व | भिक्षु धर्मरक्षित | पुस्तक 

प्रिय ब्लॉग पाठकों, 

बौद्ध धर्म के प्रकांड विद्वान भिक्षु धर्मरक्षित जी द्वारा मेरे नाना जी संत श्यामचरण सिंह के जीवन एवं कृतित्व पर लिखी गई पुस्तक "संत श्यामचरण : जीवन तथा कृतित्व" के अंश यहां साझा कर रही हूं। दुर्भाग्यवश इस पुस्तक के कई पृष्ठ दीमकों द्वारा नष्ट किए जा चुके हैं।

प्रकाशक - ममता प्रकाशन, कबीर चौरा, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

प्रथम संस्करण का प्रकाशन वर्ष 1964

 पांचवा अध्याय    

बौद्ध चिन्तन 

 पृष्ठ 67 से 82 तक

Sant Shyamcharan - Book of  Bhikshu Dharmarakshit

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शीर्षक - || धन्य है तू वेदने जग को बताऊँ ||

मोल अपने मैं प्रणय का क्या बताऊँ । 
वेदना मैं निज ह्रदय की क्या सुनाऊँ ।।

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कहानी पैदाइशी गरीब नहीं हूँ... 
''आंटी, मैं गरीब घर में पैदा नहीं हुआ था। मेरे पापा इंजिनियर है। हमारे पास बंगला, गाड़ी, नौकर-चाकर सब कुछ था। एक साल पहले तक मैं कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ता था। सब कुछ बहुत ही अच्छा था। अचानक मेरे मम्मी-पापा के बीच के झगड़े बढ़ गए और मेरी मम्मी घर छोड़ कर नानाजी के यहां चली गई। मम्मी मुझे अपने साथ ले जाना चाहती थी। लेकिन पापा ने मुझ से कहा कि तुम्हारी मम्मी तो कोई कमाई नहीं करती फ़िर तुम्हें क्या खिलायेगी?  
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ओ समय ठहरो ज़रा 

ओ समय ठहरो ज़रा

मुझे भी साथ ले चलो

अभी कुछ काम शेष रहे  हैं

उन्हें  पूर्ण कर लेने दो |

जब कोई काम शेष न रहेगा

मन सुकून से रह सकेगा

फिर  लौट न पाऊँगी 

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मुझे तीन बार इश्क़ हुआ है। 
Pic credit: Google.

मुझे तीन बार
इश्क़ हुआ है
पर हर बार
सिर्फ़ धोखा मिला है।
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पुस्तक अंश:  
तू है भ्रष्टाचार की माँ 

विकास नैनवाल 'अंजान', एक बुक जर्नल 
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दाता कौन भिखारी कौन  ( कितने छोटे बड़े लोग )  मैं नहीं कहता आप सभी कहा करते हैं क्या लाये थे साथ क्या लेकर जाओगे , क़फ़न में जेब नहीं होती सिकंदर जब गया दुनिया से दोनों हाथ खाली थे। मगर कहने और समझने में अंतर होता है जिनका दावा होता है उनको कुछ नहीं चाहिए वही जितना भी हासिल हो और पाने की हवस बढ़ती जाती है। ऊंचे महल वालों की गरीबी कभी मिटती नहीं उनकी गरीबी देख कर हमें अपनी झौंपड़ी उनसे अच्छी लगती है। 
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आ भी जाओ 
पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा,  
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महाकाय वृक्ष 
अक्सर, इस ऊँचे दरख़्त के नीचे
बैठ कर मैं, उसे क़रीब से
महसूस करना
चाहता
हूँ
उसकी फुसफुसाहट से ज़िन्दगी
का तत्व ज्ञान समझना
चाहता हूँ, उसकी
ऊर्ध्वमुखी
शाखा

प्रशाखाओं के आचार संहिता को 
शांतनु सान्याल, अग्निशिखा  
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आज के लिए बस इतना ही...।
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13 comments:

  1. बहुत सुंदर चर्चा। मेरी रचना को स्थान देने के लिए शुक्रिया।

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  2. सुप्रभात
    उम्दा लिंक्स आज के अंक की |मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार सहित धन्यवाद सर |

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  3. सुप्रभात!
    अत्यंत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति । मेरे सृजन को चर्चा में सम्मिलित करने के लिए सादर आभार सर ।

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  4. आदरणीय शास्त्री जी,
    सादर अभिवादन 🙏
    चुन-चुन कर लाते हैं आप तमाम ब्लॉगस् में से बेहतरीन लिंक्स... साधुवाद 🙏🍁🙏
    आज की इस चर्चा में आपने मेरी पोस्ट को शामिल किया, इस हेतु हार्दिक आभार 🙏🍁🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. बेहतरीन प्रस्तुति सर, सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं सादर अभिवादन

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  7. हरिः ॐ तत्सत
    आदरणीय मयंक जी,
    सादर नमन
    अद्भुत चुन-चुन कर लाते हैं आप तमाम ब्लॉगस् में से बेहतरीन लिंक्स...इसके लिए साधुवाद
    आज की इस चर्चा में आपने मेरी पोस्ट को शामिल किया, इस हेतु हार्दिक आभार
    ||पुनश्च सादर नमन||

    आचार्य प्रताप
    प्रबंध निदेशक
    अक्षर वाणी संस्कृत समाचार पत्र

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  8. सराहनीय प्रस्तुति सर।
    सादर

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति,हमारी रचना को शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..मेरी पोस्ट्स को चर्चा में शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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  11. अति सुन्दर चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete

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