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Tuesday, December 15, 2020

"कुहरा पसरा आज चमन में" (चर्चा अंक 3916)

स्नेहिल  अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक आ. शास्त्री सर जी की रचना से) 

सर्दी का मौसम अपने पूरे शबाब पर आने लगा है.......

अब देखते हैं ये अपने क्या-क्या रंग दिखाता है....... 

ख़ैर,चलते हैं आज की रचनाओं की ओर.......

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गीत "कुहरा पसरा आज चमन में"

 डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

पाला पड़ताशीत बरसता,
सर्दी में है बदन ठिठुरता,
तन ढकने को वस्त्र न पूरे,
निर्धनता में जीवन मरता,
पर्वत पर हिमपात हो रहा,
पौधे मुरझाये कानन में।
कुहरा पसरा आज चमन में।।

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तम शीत ऋतु की तरह आती हो

तुम्हारे आने की सुगबुगाहट से
खड़कियों में 
टांग दिए हैं
गुलाबी रंग के नये पर्दे 
क्योंकि
तुम्हें धूप का छन कर

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गज़ल (देखकर मुस्कुराते गये)

देखकर  मुस्कुराते  गये।
मुझको दिल में बसाते गये।

तिरछी नजरों से देखकर,
मुझको थोड़ा लुभाते गये।

मुझको पाने की ले आरजू ,
दिल अपना लुटाते गये।
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अंतहीन भटकाव - 

न जाने कितने जन्म - मृत्यु, सुख -
दुःख, योग - वियोग,  मान -
अपमान, अशेष ही रहे,
फिर भी चाहतों
के असंख्य
शून्य

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गीतिका (अभी तो सूरज उगा है)

अभी तो सूरज उगा है,

सवेरा यह कुछ नया है।

प्रखरतर यह भानु होता ,

गगन में बढ़ अब चला है।

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कोराना का डर

ऑफिस से आते जाते समय ये गुमटियां अक्सर  हमारी   ठिलवाई  का अड्डा होती है  चाय, सुट्टे के साथ साथ ठिलवाई और दोपहर का न्यूज पेपर,हम मध्यमवर्गी आज भी देश और दुनिया की  खबरों के लिए नाई की दुकान या चाय की गुमटी को अपना  स्रोत मानते है 
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मैं तो अपने लोगों के साथ सिंघु बॉर्डर पर हूँ

जमीन के नीचे
उबलते लावा का रंग
अब पढ़ते हैं
तस्वीर में
मेरा चेहरा
बढ़ी हुई दाढ़ी
और ....
कुछ नहीं
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वादा रहा..

 व्यग्र,व्याकुल इस जिंदगी को, 

मिल जाएगा निसाब जिस दिन,

ऐ मेरी अतृप्त ख्वाहिशों, 

कर दूंगा तुम्हारा भी हिसाब उस दिन।

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समानता

मैंने भी तेरी गुलामी का तुझे अहसास ना हो 
बेहोश करने वाला एक जरिया निकाला है 
"तुम सोलह श्रृंगार में कितनी खूबसूरत लगती हो"
और तेरा कद तेरे मन में मेरे बराबर हो जाता है।   

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लिखे को पढ़िये पन्ने दर पन्ने
किसलिये  ढूंढनी है 
कलम किस की है
और कहाँ रखी है 
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कभी मीरा ,कभी सुकरात ,ने पिया था जिसे हॅसकर,जहर की उस खुमानी को,लेकर साथ आई हूँ_gita

गमों की फिर से एक,
 कहानी लेकर आई हूँ ।
गुजरे वक्त की अपनी,
निशानी लेकर आई हूँ।1।
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आज का सफर यही तक 
आप सभी स्वस्थ रहें,सुरक्षित रहें 
कामिनी सिन्हा 
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15 comments:

  1. एक से बढ़कर एक उम्दा लिंक्स चयन
    सराहनीय प्रस्तुतीकरण
    साधुवाद

    ReplyDelete
  2. वाह! बहुत सुंदर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  3. सादर आभार आदरणीया कामिनी जी
    उम्दा लिंक्स चयन,बेहतरीन प्रस्तुतीकरण

    ReplyDelete
  4. बहुत शानदार लिंक्स।
    आभार

    ReplyDelete
  5. बहुत उता्तम चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

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  6. एक से बढ़कर एक सुंदर रचनाओं का संकलन ।
    सादर।

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  7. बहुत बढ़िया प्रस्तुति।

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  8. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  9. बहुत सुन्दर सूत्रों से सुसज्जित पुष्प गुच्छ सी प्रस्तुति । सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई ।

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  10. बहुत ही सुंदर सराहनीय प्रस्तुति आदरणीय कामिनी दी।

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  11. बहुत सुंदर प्रस्तुति, सभी लिंक पठनीय, श्रीराम रॉय

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  12. सभी रचनाएँ अपने आप में अद्वितीय हैं, सुन्दर संकलन व आकर्षक प्रस्तुति, मुझे जगह देने हेतु हार्दिक आभार, आदरणीया कामिनी जी - - नमन सह।

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  13. आप सभी का हृदयतल से धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

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