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Monday, November 08, 2021

'अंजुमन पे आज, सारा तन्त्र है टिका हुआ' (चर्चा अंक 4241)

 सादर अभिवादन। 

सोमवारीय प्रस्तुति में  आपका स्वागत है। 

आइए अपढ़ते हैं चंद चुनिंदा  रचनाएँ-


गीत "आन-बान, शान-दान, स्वार्थ में शुमार है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अंजुमन पे आज, सारा तन्त्र है टिका हुआ,
आज उसी वाटिका का, हर सुमन बिका हुआ,
गुल गुलाम बन गये, खार पर निखार है।
तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।
*****

महारास

हर मनुज के अंतर में

प्रेम का सितार बज उठता है 

और तब सृजन होता है

उस दिव्य अलौकिक संगीत का

जिसकी लय पर हर गोपिका

तुम्हारी संगति में स्वयं को

राधा समझने लगती है !

*****मध्य कहीं

कल्पना कहें, या, कहें सपना उसे!
अब कह दें कैसे, बेगाना उसे,
अनकही वो बातें, वो ही सौगातें,
दिन और ये रातें,
संग मेरे, मेरी तन्हाई में गाते,
दिल के मध्य, कहीं!
*****

*****

हादसे | कविता | डॉ शरद सिंह

भोथरी हो जाए तो जीने के प्रयासों की 

लिखावट

हो जाती है

भद्दी, बदसूरत

जिसे कोई

पढ़ना न चाहे
*****
शून्य में ही पूर्ण छिपा है
एक वैरागी या योगी के पास बाहर कुछ भी न हो  फिर भी उसके मस्तक पर एक कांति दमकती है और उसका आत्मबल नज़र आता है।जगत में रहते हुए भी यदि चीजों, घटनाओं और व्यक्तियों पर अपनी पकड़ हम छोड़ दें, कहीं कोई अपेक्षा न रखें तो मन उस शून्यता को अनुभव कर सकता है जो वास्तव में पूर्ण है। *****सुनहरे भविष्य की

प्रेम कहो शांति कहो 

वह अपना ही दिल है 

यहीं घटे अभी मिले वही वह रब है 

कभी गहा कभी छूटा 

जगत यह सब है !

*****

अभी बाकी है....

उदासियों के बादल भी छंट कर बरसेंगे कभी तो, 

सोंधी खुशबू मिट्टी की, उठनी अभी बाकी है।

ख्यालों का क्या है, आते जाते ही रहते हैं, 

गर ठहरे शब्द, तो पन्नों पर, उतरना अभी बाकी है। 

*****


आज बस यहीं तक 

फिर मिलेंगे अगले सोमवार। 


रवीन्द्र सिंह यादव,


4 comments:

  1. साहित्य के मर्मज्ञ पाठकों के लिए रस की सरिता बहाने प्रतिदिन की भांति आज भी पठनीय रचनाओं के सूत्रों से चर्चा मंच सजा है. आभार मुझे भी इसमें शामिल होने का सौभाग्य देने हेतु रवीन्द्र जी !

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  2. बहुत ही सुन्दर सार्थक सूत्रों से सुसज्जित आज की चर्चा ! मेरी रचना को इसमें स्थान दिया आपका दिल से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार रवीन्द्र जी ! सादर वन्दे !

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  3. सुन्दर सार्थक सूत्रों से सुसज्जित आज की चर्चा ! मेरी रचना को इसमें स्थान दिया आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह चादव जी !

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  4. शानदार रचनाओं से सजे इस मंच पर हमारी बाल कविता को स्थान देने के लिए सादर आभार..
    इस मंच पर सजे सभी लिंक अनूठे और सार्थक हैं। सभी रचनाकारों को बधाई

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