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Sunday, November 28, 2021

"वृद्धावस्था" (चर्चा अंक 4262)

सादर अभिवादन

आज रविवार की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है

( शीर्षक और भुमिका आदरणीया सुधा देवरानी जी की रचना से)


"जन्म से ले ज्ञान पर,

अंत सब बिसराव है।।

शून्य से  हुआ शुरू,

शून्य ही ठहराव है।।"

जीवन दर्शन कराती सुधा जी की अति सुन्दर रचना


इस शाश्वत सत्य को स्वीकार करना अत्यंत कठीन है परन्तु यदि स्वीकार कर लिया तो जीवन सरल हो जाएगा।

चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं कि ओर....

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 गीत "मैं घास-पात को चरता हूँ"

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


है नहीं मापनी का गुनिया,
अब तो अतुकान्त लिखे दुनिया।
असमंजस में हैं सब बालक,
क्या याद करे इनको मुनिया।
मैं बन करके पागल कोकिल,
कोरे पन्नों को भरता हूँ।

मैं कवि लिखने से डरता हूँ।।

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नहीं ! बिलकुल नहीं.. अध्येता हूँ। मेरा पूरा ध्यान विधा निर्देशानुसार अभिविन्यास पर रहता है।"

"प्रस्तुति कर्त्ता-कर्त्री रचनाकार से अकेले में विमर्श किया जा सकता है न? आँखों के किरकिरी बनने से बचना चाहिए.."

"यानि तुम्हारा गणित यह कहता है कि डरना चाहिए...। जो डर गया...,"

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मेरे हिस्से का शून्य


इसमे पीड़ा,बेचैनी,लाचारी,चुप्पी,उदासी,छटपटाहट,तड़प, .....कोई शब्द नहीं समाता,

बस एक मौन ही है जो मरहम का काम करता है।

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आधी हक़ीक़त आधा फ़साना
बीस साल की ख़ूबसूरत और मासूम सी दिखने वाली दिव्या की शादी जब 30 साल के, मोटे कौएनुमा व्यक्तित्व वाले डॉक्टर मनोज कुमार से हुई तो इस जोड़ी को देख कर बहुत से लोगों के दिमाग में एक साथ -
‘कौए की चोंच में अनार की कली’ वाला मुहावरा कौंधने लगता था.
लेकिन इस अनार की कली को अपनी चोंच में दबा कर लाने वाले हमारे डॉक्टर मनोज कुमार कोई मामूली कौए नहीं थे.

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देखना एक दिन #पछताओगे ।

यूं  न #उलझा करो मुझसे एक दिन पछताओगे ।

देखना किसी दिन #दिल अपना मेरे हवाले कर जाओगे ।


ढूंढते हो मुझसे बार बार मिलने के बहाने ,

बनाते हो गलियों को मेरी अपने ठिकाने ,

देखना इन्हीं ठिकानों पर दिल अपना अटका पाओगे ।

******

२३. ब्रह्मपुत्र को सुनो

सुनो,

किसी शाम एक नाव लेते हैं, 

ब्रह्मपुत्र में निकलते हैं,

लहरें जिधर ले जायँ,

उधर चलते हैं.


इतनी दूर निकल लेते हैं 

कि गौहाटी शहर की बत्तियां 

ओझल हो जायँ नज़रों से. 

******

अक्सर
ज्यूं, चिलचिलाती धूप में, इक छाँव ढ़ूंढ़ता हूँ!

यूँ, रुक भी ना सकूं, इस मोड़ पर,
सफर के, इक लक्ष्य-विहीन छोड़ पर,
अक्सर, खुद को, रोकता हूँ,
अन्तहीन पथ पर, ठांव ढ़ूंढ़ता हूँ!

******

मेरी अग्नि परीक्षा

मुझे पूरा विश्वास है कि 
ईश्वर की कृपा से, 
परिवार के सहयोग से, 
आपकी दूआओ से, 
और खुद की हिम्मत से, 
जिंदगी भर दी जाने वाली इस अग्नि परीक्षा में मैं अवश्य पास होऊंगी............ 

******

 हम सभी को यकिन ही नहीं अटल विश्वास है कि आप  इस जंग में जरूर जीतेगी । हमारी शुभकामनाएं आप के साथ है ज्योति जी।******हमारी दो सखियां " चर्चा मंच की हमारी प्रिय सदस्य मीना भारद्वाज जी और हमारी प्रिय ब्लॉगर ज्योति देहलीवाल जी" जीवन के कुछ कठीन दौर से गुजर रही है, शारीरिक रूप से वो कुछ ज्यादा अस्वस्थ है । चर्चा मंच परिवार की ओर से मैं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं। ईश्वर उन्हें शीघ्र अतिशीघ्र स्वस्थ लाभ दे।*****इसी कामना के साथआज का सफर यही तक, अब आज्ञा देआप का दिन मंगलमय हो




14 comments:

  1. सुप्रभात !
    विविधता से परिपूर्ण आज का संकलन आपके श्रम का परिचायक है प्रिय कामिनी जी ,हर रचना पर गई, और सबसे कुछ न कुछ अर्जित किया ।बहुत आभार आपका प्रिय सखी ।आपको मेरा नमन और वंदन । सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं ।

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  2. सुप्रभात🙏
    बहुत ही सुंदर व शानदार प्रस्तुति 😊
    हर अंक एक से बढ़कर एक हैं और सराहनीय हैं🙏
    इतनी बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद🙏🙏

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  3. आदरणीय कामिनी मेम मेरी प्रविष्टि को चर्चा अंक 4262) पर शामिल करने के लिए बहुत धन्यवाद एवं आभार ।
    इस अंक में सभी सम्मिलित प्रविष्ठियां बहुत ही उम्दा है सभी को शुभकामनाएं एवं बधाइयां ।
    सादर ।
    --

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  4. आभार आपका कामिनी जी...। मैं मीना जी और ज्योति जी के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ...।

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  5. सुंदर प्रस्तुति.मेरी प्रविष्टि को शामिल करने के लिए आभार ।

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  6. सुंदर चर्चा। सभी रचनाएँ शानदार।

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  7. बहुत सुंदर और सार्थक चर्चा प्रस्तुति|
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी!

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  8. वाह काम‍िनी जी, एक से बढ़कर एक ल‍िंक, बहुत खूब, बहुत द‍िनों बाद चर्चामंच पर आना हुआ। बहुत अच्‍छा लगा

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  9. उत्कृष्ट लिंको से सजी लाजवाब चर्चा प्रस्तुति
    शीर्षक में अपनी रचना का शीर्षक देख बहुत ही खुशी हुई तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी मुझे चर्चा में सम्मिलित करने हेतु।
    सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

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  10. आप सभी को हृदयतल से धन्यवाद एवं सादर अभिवादन

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  11. आपके स्नेह का ढेर सारा आभार सखी ! आपका स्नेह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्बल है । मैं अभी ठीक हूँ । स्वास्थ्य धीरे धीरे जीवनरूपी पटरी पर लौटने लगा है पहले दाँत की परेशानी और अब tachycardia problem के कारण मुझे बहुत सारी गतिविधियों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार विराम देना होगा । आपके स्नेह के लिए आभारी हूं🙏🙏

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  12. सुंदर प्रस्तुति आदरणीय मीना और आदरणीय ज्योति दी के शीघ्र स्वस्थ्य लाभ की कामना।
    सादर

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  13. कामिनी दी, मुझे पूरा विश्वास है कि आपके स्नेह और दुआओं से मैं मेरी अग्नि परीक्षा में अवश्य सफल होउंगी। स्वास्थ्य की वजह से ही टिप्पणी करने में देरी हो गई थी।

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