Followers

Search This Blog

Sunday, November 14, 2021

"होते देवउठान से, शुरू सभी शुभ काम"( चर्चा - 4248)

 सादर अभिवादन

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है

( शीर्षक और भुमिका आदरणीय शास्त्री सर जी की रचना से)

दिन है देवोत्थान काव्रत-पूजन का खास।

भोग लगा कर ईश कोतब खोलो उपवास।।

--

आप सभी को देवोत्थान एकादशी व्रत और बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं की ओर....

******************


दोहे "होते देवउठान से, शुरू सभी शुभ काम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)


होते देवउठान सेशुरू सभी शुभ काम।

दुनिया में सबसे बड़ानारायण का नाम।।

--

मंजिल की हो चाह तोमिल जाती है राह।

आज रचाओ हर्ष सेतुलसी जी का ब्याह।।

*****

बाल दिवस विशेष

रमा... क्या जमाना आ गया है ,आजकल के बच्चे जब देखो तब मोबाइल में डूबे रहते हैं ,पता नहीं कैसे पेरेंट्स  हैं जो बच्चों का ध्यान नहीं रखते ,और इतने कम उम्र में ही मोबाइल थमा देते हैं ।

अब देखो पार्क में आयें है तो कुछ खेलने के बजाय

मोबाइल लिए बैठे हैं ।

******

भयभीत चेहरों का समाज

ये चेहरे
रोक देते हैं 
हमारी दौड़। 
भागते से हम 
ठिठक जाते हैं
इन्हें सामने पाकर। 
सच 
क्या ये आईना हैं
हमारे खुरदुरे समाज 
जिसमें हमेशा ही

बिगड़ी तस्वीर ही 

*****

अहाते का सूखा दरख़्त - -
*****शहर मेरा धुआं-धुआं सा है..

सहरा मे पसरा हुआ कुहासा है,

और शहर मेरा धुआं-धुआं सा है।

कोई कहे ये 'दिवाली' का रोष है,

कोई  दे रहा 'पराली' को दोष है,

मुफ्त़जीवी, मुरीद हैं गिरगिटों के,

विज्ञापनों से खाली हुआ कोष है।


*****

६१९. ग्रास

पिता की मृत्यु के बाद 

कोई कौआ कभी 

हमारी मुंडेर पर नहीं आया,

पितृपक्ष में भी नहीं. 


*****

आओ, मिलकर बढ़ें ...
रुको, रुको
मिलने पर,
मोबाइल पर,
अर्थहीन मुद्दों को दफ़न करो,
चेहरे की उदासी
आवाज़ के खालीपन में
एक छोटी सी मुस्कुराहट लेकर
एक दूसरे को महसूस करो ।
*****

मेरी बेटी

है गर्ब मुझे यह कहते हुए  

मैंने जन्म दिया था उसे 

 दोनो कुल का नाम बढाया उसने 

कभी नाम न डुबोया मेरा

मेरी सारी  अपेक्षा  पूरी की  उसने  |

कौन कहता है कि बेटी पराई होती है

कन्यादान के बाद उस पर आपका

****

प्रेम
स्त्रियां प्रेम को कई 
हिस्सों में बाँटकर 
अपना श्रृंगार करती हैं 
और हर हिस्सा 
अपने आप में 
पूर्ण होता है
गालों पर लालिमा 
होंठों पर मुस्कान 
आँखों में काजल 

******
आज का सफर यही तक, अब आज्ञा देआप का दिन मंगलमय होकामिनी सिन्हा





9 comments:

  1. उत्तम लिंको के साथ बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति!
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी|

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन प्रस्तुति। आभार, कामनी जी🙏

    ReplyDelete
  3. उत्कृष्ट संकलन

    ReplyDelete
  4. आभार आपका कामिनी जी। मेरी रचना को स्थान देने के लिए साधुवाद।

    ReplyDelete
  5. उत्कृष्ट प्रस्तुति.मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार.

    ReplyDelete
  6. आभार आपका मेरी रचना को शामिल करने के लिए

    ReplyDelete
  7. सुंदर सराहनीय अंक

    ReplyDelete
  8. सुंदर पठनीय लिंक्स।हार्दिक शुभकामनाएं

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।