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Thursday, December 02, 2021

'हमारी हिन्दी'(चर्चा अंक-4266)

सादर अभिवादन। 
गुरुवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 


 शीर्षक व काव्यांश आ. डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक जी के आलेख 'हमारी हिन्दी खराब क्यों है?' से -

तो आइए बाते करें हिन्दी व्याकरण की-

हिन्दी व्याकरण हिन्दी भाषा को शुद्ध रूप से लिखने और बोलने सम्बन्धी नियमों का बोध कराने वाला शास्त्र है। यह हिन्दी भाषा के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें हिन्दी के सभी स्वरूपों को चार खण्डों के अन्तर्गत अध्ययन किया जाता है। इसमें वर्ण विचार के अन्तर्गत वर्ण और ध्वनि पर विचार किया गया है तो शब्द विचार के अन्तर्गत शब्द के विविध पक्षों से सम्बन्धित नियमों पर विचार किया गया है। वाक्य विचार के अन्तर्गत वाक्य सम्बन्धी विभिन्न स्थितियों एवं छन्द विचार में साहित्यिक रचनाओं के शिल्पगत पक्षों पर विचार किया गया है।

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-
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 वर्ण विचार हिन्दी व्याकरण का पहला खण्ड है जिसमें भाषा की मूल इकाई वर्ण और ध्वनि पर विचार किया जाता है। इसके अन्तर्गत हिन्दी के मूल अक्षरों की परिभाषाभेद-उपभेदउच्चारण संयोगवर्णमालाआदि नियमों का वर्णन होता है।
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सुबह जल्दी जग गई
स्त्रियों के हिस्से आता है
कुछ अलग किस्म का काम
वे बुहारती है आंगन
करती है गर्म बचा हुआ दूध
देखती हैं रसोई को एक मापक दृष्टि से
दुनिया 
एक खारी नदी है
और हम
नमक पर 
नाव खे रहे हैं।
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खांड   सीठी ,  चीनी    सीठी, 
जब से देखी मुस्कान मिठाई।
तन  मन  में   वह  रम   गई, 
ऐसी  है वह मुस्कान मिठाई।। 

अनुजों को दिया था हर तरह का सहारा 

भरोसे ऐसे पाले कि टूटे नहीं थे 

पिता का साया उठा माँ की दुआएँ थीं 

वह जब गयीं परिवार के मुखिया बने थे 

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कौन चाहता है

रात रात भर यूं जागना, कौन चाहता है
दूर दूर से चांद ताकना, कौन चाहता है

मिलता नसीबों से ही तोहफा ए इश्क
दिल खूंटी पर टांगना कौन चाहता है

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एक ग़ज़ल-कोई गा दे मुझे पीनाज़ मसानी की तरह

धूप के साथ में बारिश की कहानी की तरह
तुम हो सहरा में किसी झील के पानी की तरह
कोई पानी नहीं देता उसे मौसम के सिवा
फिर भी जंगल है हरा रात की रानी की तरह
नद-नाले नदियाँ पर्वत सब,
दिन-दिन खोते अपना रूप।
ताल-बावड़ी पोखर झरने,
सूख चले अब सारे कूप।
समस्या गंभीर है और जल्दी ही यदि इसका निराकरण नहीं किया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं ! ऐसा क्यों है कि बच्चों में मासूमियत और बचपना गुम होता जा रहा है ! इस समस्या पर चिंतन करें तो कई बातें ऐसी उभर कर सामने आती हैं जो हमें स्पष्ट संकेत देती हैं कि समस्या की जड़ कहाँ है और कितनी गहरी है !
सबसे पहला कारण है संयुक्त परिवारों का टूटना !
  मां ! आशीर्वाद एवं शिक्षाओं से भरी तुम्हारी चिट्ठी मिली। तुम्हारी और पापा की तबियत अच्छी है यह जानकर काफी खुशी हुई।सभी भतीजे-भतीजियां अच्छे से पढ़ाई कर रहे हैं। यह तो और भी अच्छी बात है। मां तुमने लिखा है कि तुम्हारी एक  भाभी मायका गयी और एक की तबीयत खराब है इसलिए सेवा-सुश्रुषा में कमी आ गयी। यइस बात से यही पता चलता है कि उनके रहने और स्वस्थ्य रहने पर तुम्हारी खूब सेवा होती है।यह तो कितनी अच्छी बात है मां! लेकिन मां !मैं देखती हूं तुम्हें नास्ते- खाना देने में उनलोग से पल भर भी देर होती है तो तुम नाराज़ हो जाती हो। मां मैं यही वह
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10 comments:

  1. बहुत बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति!
    आपका आभार अनीता सैनी दीप्ति जी!

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  2. सुप्रभात
    उम्दा लिंक्स |

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  3. उपयोगी एवं सराहनीय चर्चा।

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  4. आभार आपका अनीता जी...।

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  5. बहुत ही सराहनीय प्रस्तुति आदरणीय मैम!
    बहुत ही बहुत ही महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित लेख और रचनाओं का संगम!
    अद्भुत.. !
    आभार🙏

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  6. आपका हृदय से आभार।सादर प्रणाम

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  7. बहुत सुन्दर सार्थक सूत्रों से सुसज्जित आज का चर्चामंच ! मेरे आलेख को आज इसमें स्थान मिला ! आपका ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार प्रिय अनीता जी ! सप्रेम वन्दे !

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  8. बहुत सुंदर सराहनीय और पठनीय अंक ।बहुत शुभकामनाएँ अनीता जी ।

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  9. बेहद सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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