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Friday, August 12, 2022

'जब भी विपदा आन पड़ी, तुम रक्षक बन आए' (चर्चा अंक 4519)

शीर्षक पंक्ति: युवा कवयित्री अनंता सिन्हा जी की रचना से। 

सादर अभिवादन। 

शुक्रवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

लीजिए पढ़िए आज की चुनिंदा रचनाएँ- 

दोहे "सम्बन्धों के तार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 
अपनी बहनों से कभी, मत होना नाराज।

भइया रक्षा-सूत्र की, रखना हरदम लाज।।

--

धागे कच्चे हों भले, ममता है मजबूत।

लेकिन भाई का हृदय , कर देते अभिभूत।।

*****

दोस्त के लिए

कभी आओ

रेलवे प्लेटफार्म पर

सीमेंट की बेंच पर

बैठी मिलूंगी

पहले खूब देर तक झगड़ा करेंगे

*****

अमृत महोत्सव भारत में

आजादी के  शूर शहीदों का,

सम्मान  देता  आज  तिरंगा।

चांद    होय   या   मंगलयान,

लहराये शान से आज तिरंगा।।

*****

आज़ादी के अमृत महोत्सव पर कविता

वो राजगुरुवो भगत सिंह
बिस्मिल हों या अशफ़ाक उल्ला
आज़ादबोसगांधी जी की
कुर्बानी नहीँ गई व्यर्थ,
पंद्रह अगस्तपंद्रह अगस्त 
पंद्रह अगस्तपंद्रह अगस्त ।

*****

कह दूँ जो हो बात सही

उड़ता फिरता मन का पंछी

चुनता शब्दों का दाना

बुद्धि नीड़ में करे बसेरा

बुनती है ताना-बाना

लिख-लिख पाती फाड़ी कितनी

मंथन से निकला न मही

करूँ कल्पना कविता रच दूँ

कह दूँ जो हो बात सही।।

*****

सदा सुरक्षित घर आना

सीमाओं पर युद्ध  छिड़े, प्रकृति कहर बरसाए।

जब भी विपदा आन पड़ी, तुम रक्षक बन आए।

सँजोया है बड़े जतन से, देश का ताना-बाना

ईश करें चिरायु तुमको, सदा सुरक्षित घर आना।

*****

शुभ रक्षाबंधन

*****

आह! कितनी उम्मीदें हैं तुम्हारे नाम से-किशोर चौधरी

सब बातें नहीं होनी चाहिए हमारे बस में
मगर मूर्खतापूर्वक करना प्रेम
और समझदारी से मारे जाना, सीखना चाहिए सबको.

*****

अर्द्ध नारीश्वर

आधे

अंग में

तुम तो अपना

रूप है

साजे।

 

आधे

अंग में

लगती हैं तेरे

पार्वती मांँ

विराजे।

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव

 

8 comments:

  1. विविध रचनाओं से सज्जित सुंदर संकलन ।
    रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. अच्छी प्रस्तुति, सुजाता

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर और सार्थक चर्चा।
    आपका आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी।

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  5. आदरणीय सर, मेरी रचना को आज की प्रस्तुति में जोड़ने के लिए हार्दिक आभार । मैं बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर सक्रिय हुई हूँ परंतु मैं आप सबों की स्मृति में हूँ, यह आप सब का स्नेह है ।अपने आशीष की छत्र-छाया बनआए रखिएगा । आज की हर एक रचना अत्यंत सुंदर है , संबंधों के मिठास को उजागर करती और रक्षा-बंधन व आगामी स्वतंत्रता दिवस का उत्साह एक साथ मनाती यह प्रस्तुति हम सब को आनंदित कर रही है । अब से सक्रिय रहूँगी। आप सबों को मेरा सादर प्रणाम ।

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  6. बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं मेरी रचना को चयनित करने के लिए सहृदय आभार आदरणीय सादर

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  7. अच्छी और सुंदर रचनाओं से सजी शानदार चर्चा
    सार्थक संयोजन के लिए साधुवाद

    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मलित करने का आभार

    सादर

    ReplyDelete
  8. सुन्दर संयोजन, हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ !
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए हृदय से आभार आपका।

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