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Friday, January 17, 2014

"सपनों को मत रोको" (चर्चा मंच-1495)

मैं राजेंद्र कुमार चर्चा मंच के १४९५ वें अंक में आपका सादर अभिनन्दन करता हूँ। तो आइये चलते हैं आपके कुछ चुनिंदा लिंकों की तरफ .....पहले एक सुभाषित पर मनन करते हैं …


अधमाः धनमिच्छन्ति धनं मानं च मध्यमाः।
उत्तमाः मामिच्छन्ति मानो हि महतां धनम्॥

अर्थ: "निम्न वर्ग का व्यक्ति केवल धन की इच्छा रखता है, मध्यम वर्ग का व्यक्ति धन और मान दोनों की ही इच्छा रखता है और उत्तम वर्ग का व्यक्ति केवल मान-सम्मान की इच्छा रखता है। मान-सम्मान का धन से अधिक महत्व होता है।"

 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
मन की वीणा को निद्रा में, 
अभिनव तार सजाने दो! 
सपनों को मत रोको! 
उनको सहज-भाव से आने दो!!
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यशोदा अग्रवाल 
सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको
जो दरीचा भी खुले तो नज़र आए मुझको।।

सदियों का रस जगा मेरी रातों में आ गया
मैं एक हसीन शख्स की बातों में आ गया।।
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जयकृष्ण राय तुषार
शहर के 
एकांत में 
हमको सभी छलते |
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डा प्रवीण चोपड़ा
अगर पथरी की जगह किसी के गुर्दे में ७०० ग्राम का पत्थर निकाला जाए तो बात हैरान करने वाली लगती है।

लेकिन ऐसा ही हुआ है दिल्ली के एक अस्पताल में
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 पथिक अनजाना 
गुजारतें हैं जिन्दगी हम जमीन पर आकर
सैलाब आकर कयामत को तबाह करते हैं
सांसें हमारी बंधी ताउम्र खुदाई हुक्मों से
सैलाब भी तो खुदा के हुक्म में बंधे होते हैं
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मुकेश कुमार सिन्हा
"छमिया" ही तो कहते हैं
मोहल्ले से निकलने वाले
सड़क पर, जो ढाबा है
वहाँ पर चाय सुड़कते
निठल्ले छोरे !
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वह बात तो भविष्य को बदलने की करते हैं, लेकिन उन्हें वर्तमान और इतिहास की कोई ख़ास समझ नहीं होती, बस वह एक राग अलापते हैं और उसी के बल पर अपना प्रभुत्व कायम करने की कोशिश करते हैं.
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मृदुला प्रधान 
मैं अपनी पलकों पर 
तुम्हारे 
इशारों के जाल 
बुनता हूँ......
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श्याम गुप्ता 
अगस्त्य महातीर्थ एवं भूतनाथ मंदिर समूह....दोनों पर्वतों के मध्य विशाल झील है जहां अगस्त्य मुनि का आश्रम था इसके चारों और ही बादामी नगर बसा हुआ है |
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प्रभात रंजन 
'सबलोग' पत्रिका के नए अंक में 
'आम आदमी पार्टी' की सीमाओं और 
संभावनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण लेख आए हैं। 
लेकिन सबसे जानदार है यह पत्र 
जो युवा आलोचक संजीव कुमार ने लिखा है। 
आप भी देखिये और बताइये है कि नहीं- प्रभात रंजन।
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Upcoming Competitive Exams 2014
● UPSC Special Class Apprentices’ Examination
2014 (January 12)
● Chhattisgarh Jail Department Prahari Recruitment Exam.
 (January 12)
● Uttar Pradesh Sainik School, Lucknow Entrance Exam.,
2014-15 (Class VII and IX) (January 19)
● Madhya Pradesh Civil Judge Group-II (Mains) Exam.,
 2013 (January 19)
Pushpa Chahar
--
वन्दना गुप्ता 

डॉक्टर कौशलेन्द्र मिश्र एक उद्देश्य के साथ लेखन करते हैं। 
साहित्य के माध्यम से अपने आदर्शों , संस्कृति 
और मूल्यों को बचाने के लिए प्रयासरत रहना 
और इसी का दर्शन 
उनकी कविताओं में होता है जब..
--
विनीत वर्मा 
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला मुख्यालय से लगभग 12 किमी दूर स्थित डूमरडीह गांव के लोगों ने सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल खड़ी की है। गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है...
--
रेवा जी 
बहुत कोशिश की 
तुझसे दुरी बनाने की 
--
आशा सक्सेना 
चेहरा तेरा
दर्प से चमकता
सच्चे मोती  सा 

--
डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 
मधुर-मधुर ये गाया करती ,
सुन्दर छंद सुनाया करती ।

तुम कान्हा हो तो मधुबन में ,
रसमय रास रचाया करती ।

--
कैलाश  शर्मा 
सूरज भैया बाहर आओ,
इस सर्दी से हमें बचाओ.

ओढ़ रजाई तुम कोहरे की 
बड़े मज़े में सोए रहते.
--
सरिता भाटिया 

तू बहादुर बेटी है पंजाब की 
तू शान आन और बान है हमारे घर की 
तू झाँसी की रानी है
तुझे क्या डर अकेले 
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अब आज्ञा दीजिये 
फिर मिलते है अगले शुक्रवार को 
तब तक के लिए शुभ विदा..
--
आगे पढ़िए 
"मयंक का कोना"
--
साहित्य से जुड़े कई गूढ़ प्रश्नों में 
एक यह भी है कि कविता किन तत्वों से महान बनती है। 
प्रश्न गंभीर ही नहीं, मतभिन्नतायुक्त भी है 
क्योंकि यह विषय जितना काव्य-तत्व से संबद्ध है 
उतना ही उसके सौंदर्य-पक्ष 
और रचना-प्रक्रिया से भी...
शब्द सक्रिय हैं पर Sushil Kumar 
--
आहें’ रहती हैं दबी,मन में उठे ‘कराह’ |
कोई कहे, न कहे या, सब की सुनता ‘आह’ ||
‘रहम’ करे हर किसी पर, मेरा ‘पिया’ ‘रहीम’ |
जो भी भटके ‘विजन-वन’, उसे दिखाता ‘राह’...
देवदत्त "प्रसून"
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कबीर भी क्या ही ऊंची बात कह गए हैं ..... 
ऐसी गति संसार की ज्यों गाडर की ठाठ...
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सजे कैसे कोई महफिल, किसी के सुर नहीं मिलते
बहुत ऐसे भी गुलशन हैं, जहाँ पर गुल नहीं खिलते..
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हम तुम ...पानी का बूंद 
सात फेरों के बंधन में बंध गए हम  
दो शरीर,एक आत्मा हो गए हम !
एक एक बिन्दु सम जीवनधारा में
बहते रहे साथ साथ...
कालीपद प्रसाद
--
Diary Cutting No 01.. 

खामोशियाँ...!!! पर मिश्रा राहुल 

--
क्या हुआ 
अगर खुद लिख कर 
खुद ही कोई समझ रहा है 

उल्लूक टाईम्स पर सुशील कुमार जोशी

--
रख विश्वास

नया आकाश 
नयी संभावनाएं 
नयी उड़ान....
अंतर्मन की लहरें पर 
Professor Sarika Mukesh 
--
दिया कबीरा रोय... 

चौथाखंभा पर ARUN SATHI 

--
पुरानी स्ट्रेटिजी है भीतरघात 
'आप' को इससे भी ज़्यादा 
भीतरघात के लिए तैयार रहना चाहिए, 
यह तो किसी को बदनाम करने 
और उसकी मुहीम को नुक्सान पहुंचाने की 
सदियों पुरानी स्ट्रेटिजी है...
छोटी बात पर Shah Nawaz 

--
भाषाओं की क़ब्रगाह बन गया भारत' 
पिछले 50 साल में भारत की 
क़रीब 20 फीसदी भाषाएं विलुप्त हो गई हैं... 

मुझे कुछ कहना है .... पर अरुणा 
--
कार्टून :- आप के पंगे आप के अंदाज़ हैं 
--
"आस्था-विश्वास" 
दिल कभी तो पत्थरों से भी लगाकर देखिए
प्यार से मन्दिर में इनको तो सजाकर देखिए

मान दोगे तो यही बन जायेंगे भगवान भी
आरती के साथ दीपक को जगाकर देखिए...
उच्चारण

15 comments:

  1. सुप्रभात
    भिन्न भिन्न विषयों पर सूत्र |
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार और धन्यवाद |

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  2. अत्यन्त सुन्दर और पठनीय सूत्र..

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  3. सुन्दर और पठनीय लिंक्स |आभार

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  4. सुन्दर लिंको के साथ सजा चर्चा मंच-
    आभार आपका-

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  5. बहुत खूब।
    मेरी Diary Cutting लगाने के लिए धन्यवाद।

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  6. सुन्दर और पठनीय लिंक्स |

    मेरी रचना को लगाने के लिए धन्यवाद।

    •٠• Education Portal •٠•

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  7. बहुत खूबसूरत सूत्रों से सरोबार आज की चर्चा । उल्लूक का पढ़ना लिखना भी दिखा बहुत बहुत आभार ।

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  8. सुन्दर लिंको के साथ सजा चर्चा मंच.......मेरी रचना को लगाने के लिए धन्यवाद।

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  9. बहुत सुन्दर चर्चा ।

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  10. बहुत सुन्दर लिंक्स...रोचक चर्चा..आभार

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  11. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    --
    आपका आभार आद.राजेन्द्र कुमार जी।
    सुप्रभात...।
    आपका दिन मंगलमय हो।

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  12. माँगे हाथ पसार नहि, वासो को अपमान ।
    नय बिसारद कौन बरग, खड़े तजे जो मान ।११५८।

    भावार्थ : -- हाथ पसार कर भीख माँगने के समान कोई अपमान नहीं है । इन 'राजनीति' के सुसम्पन्न ज्ञाताओं का कौन सा वर्ग है,जो अपना सम्मान त्यागे खड़े हैं ॥

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  13. meri kavita ke liye .....bahut-bahut dhanybad.links bade achche lage......

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  14. बहुत सुन्दर चर्चा ....हृदय से आभार ...धन्यवाद आपका !
    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

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