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Tuesday, January 14, 2014

मकर संक्रांति...मंगलवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1492

नमस्कार

मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व पूरे भारत में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तब इस संक्रांति को मनाया जाता है।

यह त्यौहार अधिकतर जनवरी माह की चौदह तारीख को मनाया जाता है। कभी-कभी यह त्यौहार बारह, तेरह या पंद्रह को भी हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य कब धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण गति आरंभ होती है और इसी कारण इसको उत्तरायणी भी कहते हैं।

मंगलवारीय चर्चा मे ई॰ राहुल मिश्रा का आप सभी को प्यार भरा नमस्कार....
चलिये कुछ अपने चुनिन्दा लिंक परोसता हूँ मैं....


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ग़ज़ल-खास को होने लगी चिन्ता".....डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’
दरक़ती जा रही हैं नींव, अब पुख़्ता ठिकानों की

तभी तो बढ़ गयी है माँग छोटे आशियानों की 
जिन्हें वो देखते कलतक, हिक़ारत की नज़र से थे 
उन्हीं के शीश पर छत, छा रहे हैं शामियानों की 

बहुत अभिमान था उनको, कबीलों की विरासत पर 
हुई हालत बहुत खस्ता, घमण्डी खानदानों की 
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कल ही रात को मुझे एक जानकार के आत्महत्या का समाचार मिला,मन मर्माहत हुआ। आये दिन हमलोग आत्महत्या कि बढ़ती घटनाओं को सुनते ही रहते है,क्या आत्महत्या किसी समस्या का उचित समाधान है? आत्महत्या करने वालों कि समस्याएं पर नजर डालें तो इनमे पारिवारिक कलह,दिमागी बीमारी,परीक्षा में असफलता,प्रेम-प्रसंग से आहत ऐसे कई कारण आते हैं।
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मकर संक्रांति और मंदार....राजीव कुमार झा
मंदरांचल पर्वत अति प्राचीन काल से ही वर्तमान बौंसी की तपोभूमि पर समाधिस्थ है.बौंसी का प्राचीन नाम ‘वालिशानगरी’ था,जिसे कुबेर के पुत्र हेमेन्द्र ने अपनी माँ की स्मृति में बसाया था.वर्तमान बिहार के भागलपुर प्रमंडल के बांका जिला अंतर्गत बौंसी प्रखंड में मंदारहिल रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर की दूरी पर उत्तर में मंदार पर्वत अवस्थित है.
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मकर राशि में सूर्य का हो रहा प्रवेश
संक्रांति काल लेकर आया पर्व विशेष !
उत्तर में खिचड़ी कहें दक्षिण में है पोंगल
लोहड़ी जो पंजाब में असम में बीहू मंगल !
लकड़ी का एक ढेर हो शीत मिटाए आग
बैर कलुष जल खाक हों पर्व मनायें जाग !
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प्यार एक से होता है
प्यारे सब हो जाते हैं
जहेकिस्मत !
अपने बच्चों
अपनी माँ के बीच
कभी भी
कोई राज बनकर नहीं जीना
ज़िन्दगी बनकर जीना 
ज़िन्दगी ही सच है 
सच ही आग है जीने के लिए !

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सि‍तारों की छांव में हूं.....रश्मि शर्मा
रात
आया था ख्‍वाब
एक जंगल में
अकेले
खामोश चलते जाने का
शायद
यह नि‍यति थी
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यादों का पुलिंदा.....निवेदिता दिनकर
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भीगी आँखें......रेखा जोशी
वीरान दिल 
बिन तुम्हारे 
उतर आये 
हसीन लम्हे 
मेरे अंगना 
संग चाँद के 
बुला रही 
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फ़सल ...राजीव चतुर्वेदी
फसल ...
खडी होने तक हर हरामखोर फासले पर रहता है 
और अपने बच्चों से भी फसल से फासला रखने को कहता है 
फसल की प्यास छीन कर वह स्वीमिंगपूल में पानी भरता है 
फसल में शामिल हैकिसान की उदासी 
फसल में शामिल है नहर की खंती 
फसल में शामिल है सूरज की किरण और उसमें पकता हुआ किसान

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सुनहरी हंथेली ...अजय ठाकुर 

हो सके, तो
अपने सुनहरी हंथेलियों पे
एक हाशिया सा लकीर खींच लेना तुम,
और
उस हासिये पे
मुझे और मेरे प्रेम को रख देना,
बाँकी बचे हिस्से पे
अपनी कानों की बाली के आकार के
दो चार गोल परिधि बना लेना,
मैं अपने हिस्से से
तुझे अपलक ताका करूँगा
और तुम,
परिधि बदल बदल के
उसके गोलाईयों से मुझे ताकना,
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मौका नहीं है देती, ये ज़िंदगी दुबारा
जो चल पड़े सफर पे, उनको मिला किनारा

ज्ञानी हकीम सूफी, सब कह गए हकीकत
सपनों से उम्र भर फिर, होता नहीं गुज़ारा

देती है साथ तब तक, जब तक ये रौशनी है
परछाई कह रही है, समझो ज़रा इशारा
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बच्चों से घर चहके यूँ....नीरज गोस्वामी

अब रिश्तों में गहराई ? 
बहते पानी पर काई ? 
तुम कमरों में बंद रहे 
धूप नहीं थी हरज़ाई 
तुमसे मिल कर देर तलक 
अच्छी लगती तन्हाई

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मौन.....कैलाश शर्मा
मौन नहीं स्वीकृति हार की
मौन नहीं स्वीकृति गलती की,
मौन नहीं है मेरा डर 
और न ही मेरी कमजोरी,
झूठ से पर्दा मैं भी उठा सकता हूँ
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पड़ा साबका सड़क से, सबक सीखते आम |
इंतजाम पहले करो, फिर भेजो पैगाम |
फिर भेजो पैगाम, नाम ना आप डुबाओ |
कोशिश में ईमान, बाज हड़बड़ से आओ |
यह मीडिया इवेन्ट, लगाए झटका तगड़ा |
बढ़ा और नैराश्य, फाड़ते रविकर कपड़ा ||
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साथ चलें...अनुपमा पाठक

चलो ऐसा करें
साथ चलें...
इन हवाओं में बिखरे
जो संदेशें हैं,
उन्हें
एक एक कर बांचें...
और उनसे जुड़ते चले जाएँ...
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मेरे हाइकु-जोशीले पग....ऋता शेखर मधु
१.
जोशीले पग
वतन के रक्षक
रुकें न कभी|
२.
रुकें न कभी
धड़कन दिलों की
सूर्य का रथ|
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हम-तुम पानी की बूंद....कालीपद "प्रसाद"
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दुःख सहने की जीवन में अब कर ली है तैयारी
हमें खबर है ख़ुशी के घर है पूरी पहरेदारी.
ऐसे कर्म किये जीवन में दुःख ही दुःख अब सहना है,
मन ही मन घुटते रहना है किसी से कुछ न कहना है.
सबकी आती है अपनी भी आ गयी अब तो बारी,
हमें खबर है ख़ुशी के घर है पूरी पहरेदारी.
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ताबूत में ओढ़े कफ़न.....राजीव शर्मा

ताबूत से पहले बुत
लिये चला चलन
बुत खड़ा निहारे
बुत बुत का काटे कफन
बुत तराश धरा से
लेकर उसके संचयन
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'फ़लसफ़ा प्रकृति का'..................शोभा रतूड़ी
बहारों में शाखों के पत्ते,
साँसों को रखते जवाँ,....
पतझर में झरते पत्ते,
ढलते मौसम को
करते बयाँ……!
मुरझाती टहनी का
एक पीला पत्ता....
जिंदगी की बगिया से
दरकिनार होता....
मौसम-ए-पतझर में
कैसे गुलज़ार रहता ?
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कौन है औरत....?? वंदना गुप्ता 

एक प्रश्न : कौन है औरत महज घर परिवार के लिए बलिदान देकर उफ़ न करने वाली और सारे जहाँ के दोष जिसके सिर मढ़ दिए जाएँ फिर भी वो चुप रहे क्या यही है औरत या यदि वो सच को सच कह दे तो हो जाती है बदचलन औरत और हो जाते हैं उसकी उम्र भर की तपस्या के सारे महल धराशायी ? एक सोच से आज भी लड़ रही है औरत मगर उत्तर आज भी काल के गर्भ में दफ़न हैं क्योंकि आज कितना भी समाज प्रगतिशील हो गया है फिर भी यही विडंबना है हमारे समाज की सोच की वो आज भी पुरातन है , आज भी औरत को महज वस्तु ही समझती है इंसान नहीं , एक ऐसा इंसान जिसे सबके बराबर मान सम्मान और स्वाभिमान की जरूरत होती है 
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हमारे अंतर्मन की गहराइयों में कितना कुछ छिपा है, एक संस्कार जगते ही उसके पीछे विचारों की एक श्रृंखला जग जाती है. ऊपर-ऊपर से हम कहते हैं कि हम देह नहीं है आत्मा हैं, पर भीतर जाकर पता चलता है, हमारा चिपकाव देह, मन, बुद्धि से कितना गहरा है. प्रतिक्रिया का अर्थ है हम मुक्त नहीं हुए, भीतर उस वक्त भी बोध रहे कि हम कैसी प्रतिक्रिया जगा रहे हैं, क्रोध करते समय यह भान रहे कि यह क्रोध है तो धीरे-धीरे हम उससे मुक्त हो जाते हैं.....
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आदत ... उदय 
सच ! चाटुकारों की बातों पे तू एतबार न कर 
देख, आईना खुद बयां कर रहा है सूरत तेरी ? 
… 
खोखले हो चुके दरख्तों की, कोई हमसे उम्र न पूछे 
उनके बाजु से चलो … तो तनिक संभल के चलो ?
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धन्यवाद....!!!

आगे देखिए..."मयंक का कोना" 
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बोलती तस्वीरें ! 

अनुभूति पर कालीपद प्रसाद 

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जो आदमी अपनी मातृभूमि का मज़ाक उड़ा सकता है, 
वो किसी केजरीवाल का 
या अमेठी का हो हितैषी हो जाएगा, 
ऐसा सोचना ही मूर्खता है 

अलबेला खत्री
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AAP 

घड़ा फोड़ दो उनके अब पाप का। 
गया वक़्त दुःख और संताप का।। 
सही वक़्त पर लो सही फैसला , 
समय आ रहा दोस्तों AAP का...
Kunwar Kusumesh
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कवि की तरह ही ब्रांडिंग कर 
नेता बनना चाहते हैं कुमार विश्वास : 
बीपी गौतम स्वतंत्र पत्रकार

मिसफिट

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रात और दिन .... 
जब आई तेरी याद 
एक लम्हे ने बिताई रात 
दूजे ने बिताया दिन 
थके मेरे नैन 
पल-पल, छिन-छिन.... 
सांसो की ताल 
पर थिरकता रहा मन 
मेरे सजन 
तुम बिन ,तुम बिन....
मेरे मन की पर Archana 

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ये कोहरे की धुंध... 

'आहुति' पर sushma 'आहुति

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कार्टून :- इस बार थर्ड फ्रंट यूं होगा सफल 

काजल कुमार के कार्टून

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‘सुख का सूरज’ को पढ़ने का अनुभव 
(--डॉ. सारिका मुकेश)

उच्चारण

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हाँ से खेलें देह दो, वर्षों कामुक खेल - 
बेसुरम्‌
बेसुरम्‌ पर रविकर

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खो गयी मेरी ग़ज़ल 

ग़ाफ़िल की अमानत पर 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल
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"चन्दा मामा" 
नभ में कैसा दमक रहा है।
चन्दा मामा चमक रहा है।।
नन्हे सुमन
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गुलाबों की गुलाबी और बोन्साई रंगत में 

KAVITA RAWAT 

17 comments:

  1. सुप्रभात... मित्रों।
    मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    --
    राहुल मिश्रा जी
    मकरसंक्रान्ति की सुन्दर चर्चा के लिए आपका आभार।

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  2. मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    --
    आपको ये जानकर अत्यधिक प्रसन्नता होगी की ब्लॉग जगत में एक नया ब्लॉग शुरू हुआ है। जिसका नाम It happens...(Lalit Chahar) है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर ..... आभार।।

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  3. सुन्दर और बेहतरीन लिंको के चयन के लिए सादर आभार मित्रवर। मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  4. हार्दिक शुभकानाएं
    आभार सहित

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  5. मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ ! बहुत सुंदर चर्चा !

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  6. सुंदर चर्चा.
    'देहात' से मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.
    मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  7. सुन्दर लिंक्स, विस्तृत लिंक ... सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनायें ...
    शुक्रिया मेरी रचना को शामिल करने का ..

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  8. मकर संक्रांति की शुभकामनायें!
    आभार!

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  9. चर्चा मंच के सभी मित्रों को मकर संक्रांति पर हार्दिक शुभ कामनाएं |
    आशा

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  10. बहुत सुन्दर और विस्तृत लिंक्स...आभार...मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें!

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  11. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति में मुझे शामिल करने हेतु आभार! .
    सबको मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  12. सुंदर च्रचा सुंदर कडियाँ,
    कुछ पढीं औरों के लिये भी निकालते हैं घडियाँ।

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  13. मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ
    मुझे शामिल करने हेतु आभार

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  14. बढ़िया सूत्र , संक्रांति की शुभकामनायें !

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  15. बहुत ही सुन्दर सूत्र..

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  16. बहुत बहुत बधाई इस सुंदर चर्चा के लिए..आभार मुझे इसमें शामिल करने के लिए..

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  17. मकर संक्राति की शुभकानायें आप सभी को .. बहुत खुबसूरत लिंक और रचनायें शामिल है इन रचनाओं में मेरे रचना मो शामिल करने के लिए तहेदिल से आभार !! महीन धुप ...

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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