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Tuesday, January 06, 2015

मिटते फसल समेत, फिदाइन इनकी फितरत; चर्चा मंच 1850


ओले गोले सा बरस, चौपट करते खेत |
गलते थोड़ी देर में, मिटते फसल समेत |

मिटते फसल समेत, फिदाइन इनकी फितरत। 
पहुँचाना नुक्सान, हमेशा रखते हसरत ।  

बड़े अधम ये लोग, जहर दुनिया में घोले । 
होता रविकर खेत, पड़े बेमौसम ओले ॥। 

राजीव कुमार झा 


रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 


देश-प्रेम के लिए न्योछावर
हँस-हँस अपने प्राण करेंगे। 
हम भारत के भाग्य विधाता
नया राष्ट्र निर्माण करेंगे।।
गौतमगाँधीइन्दिरा जी की
हम ही तो तस्वीर हैं,
हम ही भावी कर्णधार हैं
हम भारत के वीर हैं,
भेद-भाव का भूत भगा कर
नया राष्ट्र निर्माण करेंगे। 
हम भारत के भाग्य विधाता
नया राष्ट्र निर्माण करेंगे।।


6 comments:

  1. सार्थक लिंकों के साथ बढ़िया चर्चा।
    आदरणीय रविकर जी आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  2. सुप्रभात
    उम्दा लिंक्स |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |

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  3. सार्थक चर्चा
    नववर्ष की बधाई।

    ReplyDelete
  4. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...
    आभार!

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  5. बहुत सुंदर चर्चा । आभारी हूँ रविकर जी 'उलूक' के सूत्र 'है तो अच्छा है नहीं है तो बहुत अच्छा है" को जगह देने के लिये ।बंदरों के उत्पात से नेट नहीं चल पा रहा है कई दिनों से अन्य ब्लागों पर ना जाने का खेद है ।

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  6. बहुत सुन्दर चर्चा।

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