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Friday, January 23, 2015

"हम सब एक हैं"(चर्चा-1867)

आज की चर्चा में आपका हार्दिक अभिनन्दन है।
फूल अलग-अलग रंगों के होते हैं, अलग-अलग आकृतियों के होते हैं, लेकिन उनका सार है- खुशबू और खूबसूरती। फूलों से मन प्रसन्न हो जाता है। फूल सम्मान और प्रेम का प्रतीक है। इसी प्रकार धर्म हैं। चाहे वह हिन्दू धर्म हो, मुस्लिम हो, सिक्ख हो, ईसाई हो या फिर और कोई धर्म-पंथ। सभी का सार एक ही है और वह है- प्रेम। सभी धर्म प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं। कोई भी धर्म हमें नफरत या घृणा नहीं सिखाता। कहा गया है-मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
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 डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
धूप और बारिश से,
जो हमको हैं सदा बचाते।
छाया देने वाले ही तो,
कहलाए जाते हैं छाते।।
अर्चना चावजी
रिश्तों की अनोखी दास्तानें लिखी जाती है फ़ेसबुक पर .... इसी को आधार बनाकर एक कहानी लिखने की कोशिश की है .....कहानी में देवनागरी से ज्यादा ए बी सी डी ...हो लिए हैं शब्द .... ...
विवेक रस्तोगी 
    कचरा फैलाने के मामले में हम भारतीय महान हैं । और कचरा भी हम इतनी बेशर्मी और बेहयाई से फैलाते हैं जबकि हमें पता है कि यही कचरा हम सबको परेशान कर रहा है इसलिये हम सबको बड़े से बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिये, 
उपासना जी 
चारदीवारी में
एक बड़ा सा दरवाजा है
एक दरवाजा छोटा सा भी हैं
ताला लगा है लेकिन वहाँ
भीतर की तरफ
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विजय कुमार
दोस्तों, आज पिताजी को गुजरे एक माह हो गए.
इस एक माह में मुझे कभी भी नहीं लगा कि वो नहीं है. हर दिन बस ऐसे ही लगा कि वो गाँव में है और अभी मैं मिलकर आया हूँ और फिर से मिलने जाना है. कहीं भी उनकी कमी नहीं लगी.
शालिनी  कौशिक 
मुज़फ्फरनगर उत्तर प्रदेश का सबसे ज्यादा आपराधिक इतिहास वाला जिला रहा है और इस तथ्य को बी.बी.सी.ने भी एक समय स्वीकार किया था .आज भी यह जिला और किसी क्षेत्र में नाम कमाए न कमाए किन्तु इस क्षेत्र में अपना नाम गंवाने की गलती पर नहीं है .
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रजनीश तिवारी 
घट रही पेट्रोल की कीमत यारा धीरे धीरे
 लॉन्ग ड्राइव पर चलें अब तो हर दिन शाम सबेरे
 जनता मांगे है नेता जो करें देश की सेवा
  नेता मांगे है सत्ता ताकि मिले कैश और मेवा 
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श्याम कोरी 'उदय'

ठण्ड का असर … दिनदहाड़े भी देखा जा सकता है … 
( तस्वीरें - बिलासपुर छत्तीसगढ़ से)
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कविता रावत जी 
निष्ठुर सर्दी का मौसम। सुबह तड़के रमा घर की एक सुनसान अन्धेरी कोठरी में चिमनी के सहारे भारी दुःखी मन से चक्की पीसे जा रही थी। बाहर ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा था। आसमान गरज-चमक दिखाकर ओले बरसा रहा था।
रश्मि शर्मा
रांची के काव्यांचल में अपेक्षाकृत युवा व सशक्त हस्ताक्षर रश्मि शर्मा , कविता के क्षेत्र में तेज़ी से उभरता हुआ नाम है। प्रस्तुत पुस्तक ‘नदी को सोचने दो’ कवियित्री का प्रथम विधिवत संग्रह है ।
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सरस 
कभी कभी एक छोटी सी बहस
बन जाती है चीर –
और लिपटे रह जाते हैं उसमें –
सारी समझदारी –
सारा प्यार –
सारा अपनापन !
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प्रतिभा कटियार 
रोज सुबह
उगता है एक घर
सूरज के साथ,
कभी टहनियों पर 
जा टिकता है,
रेवा जी 
बचपन से लेकर आज तक
 बहुत कड़वाहट मिली है ,
 बेगानों से और
 अपनों से भी……
वन्दना गुप्ता 
सुना है एक बार फिर 
चुनाव का मौसम लहलहा रहा है 
निकल पड़े हैं सब दल बल सहित 
अपने अपने हथियारों के साथ
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रंजना भाटिया 
भूलभुलैया ............
भटकते हुए रास्ते 
और तलाश उस मंजिल की 
जो मिल जाये तो 
मोक्ष ..
और न मिले तो 
कब्र गाह ....
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(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
भोले-भाले लोग हैं, सीधा विमल वितान।
गाँवों में ही तो बसा, अपना हिन्दुस्तान।१।
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कोई निरक्षर ना रहे, करो साक्षर देश।
पढ़-लिख करके साथियों, बदलो अब परिवेश।२।
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निर्धन-श्रमिक-किसान को, शिक्षा का दो दान।
अलख जगाओ ज्ञान की, गाँवों में श्रीमान।३।
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तुम्हें गैरों से कब फुरसत हम अपने ग़म से कब खाली
चलो बस हो गया मिलना ना तुम खाली ना हम खाली

अंदाज अपना देखते हैं आईने में वो
और ये भी देखते हैं कोई देखता ना हो
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ऋषभ शुक्ला 
सच मे हम है,
एक महान भारतीय है |
नियम और कानून को ,
तोड़ना हमे अति प्रिय है ||
प्रमोद जोशी 
पंकज श्रीवास्तव की बर्खास्तगी के बाद मीडिया की नौकरी और कवरेज को लेकर कुछ सवाल उठेंगे। ये सवाल एकतरफा नहीं हैं।
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अनीता जी
मन के पीछे छिपी चेतना निर्मल है, उसके सामने जो भी आता है उसको उतनी ही देर के लिए वह ग्रहण करती है उसके बाद वह पुनः पहले की तरह निर्मल हो जाती है. भीतर की वह चेतना दर्पण है, मन में जो इकठ्ठा हुआ
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धन्यवाद, फिर मिलेंगे अगले सप्ताह 

10 comments:

  1. सार्थक सन्देश के साथ चर्चा की सुन्दर और सम्यक चर्चा के लिए
    आपका आभार आदरणीय राजेन्द्र कुमार जी।

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  2. बहुत सुंदर सूत्र संयोजन सुंदर चर्चा ।

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  3. बढ़िया चर्चा -आभार आदरणीय

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  4. सुन्दर चर्चा प्रस्तुति में मेरी ब्लॉगपोस्ट को शामिल करने हेतु बहुत आभार!

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  5. umda charcha....meri kavita ko shamil karne kay liye dhanyavad

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  6. विविधरंगी, पठनीय, बेहतरीन सूत्रों का चयन..आभार !

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  7. बहुत सुंदर सूत्र संयोजन सुंदर चर्चा,आभार !

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  8. सुंदर प्रस्तुति, मेरी रचना की स्थान देने हेतु धन्यवाद ...

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