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Wednesday, January 07, 2015

कैसे शब्द बचेंगे अपने ?? चर्चा मंच 1851




रुतबे जिनके बड़े-बड़े हैं,
देख रहे वो दिन में सपने।

Dr.pratibha sowaty 

7 comments:

  1. सुप्रभात
    सूत्र और सूत्र संयोजन दोनो ही उम्दा हैं |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  2. शुभ प्रभात। सुन्दर सूत्र समायोजन।

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  3. सुंदर बुधवारीय अंक । आभार रविकर जी 'उलूक' के सूत्र 'चूहे मारने वाली बिल्लियों को कुत्तों की देखभाल करने के काम दिये जाते हैं' को भी शामिल करने के लिये ।

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  4. बहुत सुंदर बुधवारीय अंक सजाया है आपने।
    आभार रविकर जी

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  5. आप सभी से प्रेरित हो कर हमने भी पहली बार लिखा है ..शायद आपको अच्छा लगे
    http://dharmraj043.blogspot.in/2015/01/blog-post.html

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  6. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!

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