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Tuesday, February 09, 2010

“हमने ली ब्लागिंग से छुट्टी!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-59
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


आइए आज कछ नये ढंग से "चर्चा मंच" को सजाते हैं।
सबसे पहले चर्चा करते है कुछ अद्यतन ब्लॉग्स की पोस्टों की-

मेरी कही

सबकी सुनी अब अपनी कही


कम चीनी खाओ

राष्ट्रवादी का कहना है कि चीनी न खाने से आज तक कोई नहीं मरा. हाँ खाने में ज्यादा चीनी और नमक ज़हर के समान है. वो ये भी कहता है कि सौंदर्य प्रसाधन के सामनों के दामों में बढोत्तरी हो रही है इस पर कोई सवाल क्यों नहीं उठाता. सिर्फ़ चीनी की बात ही क्यों करते हो.

राष्ट्रवादी कृषि मंत्री शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का मुख पत्र है. इससे पहले भी वह कई मामलों खासतौर से जब कांग्रेसी पवार की बुराई कर रहे थे,……

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बेटा सबकुछ, बेटी बोझ

मनोज राठौर
आज के युग में लोगों के लिए बेटा हीसबकुछ है। बेटी उसेबोझ लगती है। अबआधुनिकता के कारण पता चल जाता हैकि गर्भ में पलने वाला भू्रण लड़का है याफिर लड़की।

यदि बेटा होता है तो परिजनखुशी का ठिकाना नहीं रहता। वह मोहल्लेमें हजारों रुपए की मिठाई बांट देते हैं।

मगर, हमारे देश की बिड़वना है कि बेटीहोने पर उसकी गर्भ में ही हत्या कर दीजाती है। उसके ……..


भारतीयम

मेरा फोटो

shankar chandraker
Raipur, Chhattisgarh, India
बकअप राहुल... शाबाश.. !!!

शाबाश राहुल !!! आपने शिवसैनिकों की धमकियों के बावजूद मुंबई में एक आम मुंबईकर की तरह सड़कों और लोकल ट्रेन में सफर कर मुंबई के शेरों को उनके ही मांद में दुबकने पर मजबूर कर दिया।….



आस्ट्रेलियाई सरकार भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर कितनी चिंतित है इसका अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय छात्रों को सलाह दी है कि वे हमले से बचने के लिए गरीब दिखें. यही नहीं और भी कई प्रयास किये गए हैं उन्ही में से एक है ये अनोखा उत्पाद जो खुद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने रीसर्च कर खास नस्लीय हमलों से भारतीयों को बाचने के लिए बनाया है.

fun/Satire, madvertising, photo fun

नाइस
“तार वीणा के बजे बिन साज नाइस।”

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कह दिया मेरे सुमन ने आज नाइस।
तार वीणा के बजे बिन साज नाइस।।
ज्ञान की गंगा बही, विज्ञान पुलकित हो गया,
आकाश झंकृत हो गया, संसार हर्षित हो गया,
नाम से माँ के हुआ आगाज़ नाइस।
तार वीणा के बजे बिन साज नाइस।।……

मेरी अंतराभिव्यक्ति

"अंतर में चलते रहता है जाने क्या-क्या,अभिव्यक्त किया है शब्दों में आ देखें है क्या"

"तेरी जय हो, विजय हो"

देर से ही सही समस्त भारत वासियों को गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं.सफ़र के साथ कदमताल करते हुवे आज हम अपना ६१ वाँ गणतंत्र दिवस भी मना चुके. बीते ६१ वर्ष संघर्षों,परेशानियों के साथ-साथ उपलब्धियों के वर्ष भी रहे और हमारे दिलो दिमाग में ढेर सारी उम्मीदों का सृजन कर गये जिन्हें साकार करने के लिये हम निरंतर आगे बढ़ते जा रहे हैं.....

चित्रांगदा

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चित्रांगदा सिंह
मेरी पहली पोस्ट-ब्लॉग की दुनिया में मेरा पहला कदम

मेरी पहली पोस्ट-ब्लॉग की दनिया में मेरा पहला कदमअपने शहर से दूर महानगर में हूं, कभी दिल्ली तो कभी मुंबई..तो सिर्फ अपनी रचनाशीलता की भूख मिटाने...भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता पढ़ने के बाद उसे अपनी जिंदगी में उतारने की कोशिश में थी। लेकिन मीडिया में दबंगई और इसके दोहरे चरित्र ने असहज कर दिया। तभी सिनेमा से जुड़ाव हुआ और फिर आप सबों के देने के लिए कुछ एड फिल्में भी कीं।
फिलहाल, एक किताब भी लिख रही हूं..अंदर एक अनुभव संसार है, जिसे आपके सामने लाने के प्रयासरत हं, किताब में मेरे पत्रकीय जीवन, सिनेमा के मेरे अनुभव और एड वर्ल्ड के मेरे तजुरबे शामिल होंगे। उम्र ज्यादा नहीं लेकिन मैंने बहुत कुछ सीखा है। एक औरत होना दुनिया का सबसे भारी और जिम्मेदारी भरा काम है।
ब्लॉग की दुनिया में अभी तक पाठक थी.. अब लेखन करने की हिमाकत कर रही हूं, जाहिर है आपके प्रोत्साहन की ज़रुरत पड़ेगी।
सादर

Photobucket

आकाश की आत्मकथा

रचनाकार:जयप्रकाश मानस

नितांत एकाकी नदी हूँ
जब कोई न था, जब कुछ भी नहीं रहेगा
अंत के बाद भी बहता रहूँगा
वह उस दुनिया का सबसे बड़ा भ्रम ही है
जिन्हें दीखता है मेरी गोद में सूर्य, चंद्र, सितारे नक्षत्र
उनसे भी अलग एकदम अकेला
अपने रचयिता का सुनसान के सिवाय
कुछ भी नहीं हूँ मैं ……….

रचनाकार परिचय:-

जयप्रकाश मानस देश-विदेश में विभिन्न सम्मानों से अलंकृत एक प्रख्यात साहित्यकार हैं। कविता, कहानी व निबंध आदि विधाओं में इनकी तीस से अधिक पुस्तकें अब तक प्रकाशित हैं। स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ में कार्यरत मानस जी की अनेक रचनायें प्राय: सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन से भी इनकी रचनायें प्रसारित हुई हैं।

विद्रोही

चाटुकारिता के खिलाफ जंग


यूमैन पेपीलोमा से बढ़ा बच्चेदानी का कैंसर
प्रदेश में बच्चेदानी का कैंसर विकराल समस्या बनकर उभर रही है। एक अध्ययन में इस तथ्य का खुलासा हुआ है कि महिलाओं में इस बीमारी के होने एक प्रमुख कारण पुरुष भी है। पुरुषों को ग्रसित करने वाला वायरस यूमैनपेपीलोमा यौन संबंध स्थापित होने के बाद महिलाओं में पहुंच जाता है, और इस वायरस की चपेट में आकर महिलाओं के बच्चेदानी के कैंसर से ग्रसित होने की ……..

अपना दौर

विभिन्न सामाजिक अनुभवों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास


प्रगति मैदान, नई दिल्ली की यात्रा

दोस्तो,

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला,2010 दिनांक 30 जनवरी, 2010 से जारी है और 7 फरवरी, 2010 तक चलेगा। अनेक बोलियों, भाषाओं और लिपियों के जानकार इस मेले में आ-जा चुके होंगे और आगे भी आयेंगे। प्रगति मैदान के एक हॉल के बाहर जब से यह बोर्ड लटकाया गया है तब से अब तक हिन्दी-साहित्य के अमिताभ बच्चन कहे जाने वाले…


इन्द्रधनुष

बातें हर रंग की


मेरा फोटो

मनोरमा
बंगलूरू, कर्नाटक, India
बदल रही है फिजा

बंगलूरू में रहने वाली बयालीस साल की अमूधा की सकि्यता को देखकर कहीं से एेसा नहीं लगता कि वो पिछले नौ साल से एचआईवी पाजीटिव हैं। दस साल पहले पति के एचवाईवी पाजीटिव होने का पता चलने पर इन्होंने अपना टेस्ट कराया तो अमूधा को खुद के एचआईवी पाजीटिव होने का पता चला। पति तो साल भर बाद चल बसे लेकिन अमूधा आज अपने तीन बच्चों समेत सभी के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। बेशक यह इतना आसान नहीं था,शुरूआती दो साल बहुत कठिन रहे, समाज में खुलकर अपने एचआईवी पाजीटिव होने का िजक्र करना बहुत मुशिकल था, पहली मुिशकल तो घर से ही शुरू हो गई जब उनकी गलती नहीं होने पर भी ससुराल वालों ने इन्हें बहिष्कृत कर दिया।……

मन का दर्पण

My Photo

nilze silvia
Fortaleza e Recif, Ceara , now in delhi, Brazil
बाल मजदूरी एक बहुत बड़ी वैश्व्यिक समस्या है,,(निल्ज़े सिल्विया )



बाल मजदूरी एक बहुत बड़ी वैश्व्यिक समस्या है,, विश्व समुदाय प्रतिबर्ष जून में बाल मजदूरी दिवश मनाता है ,,,सैकड़ो सामाजिक संस्थाए गैर सरकारी संस्थान और समूह बाल मजदूरी के खिलाफ लाम बद्ध होते है ,,,

बड़ी बड़ी बाते और प्रण किये जाते है,, और काम भी किये जाते है मगर हमें वो सफलता नहीं मिल पा रही है जो मिलनी चाहिए ,,,,अनेक क़ानून बनते है और बाल मजदूरी रोकने के भिन्न भिन्न हाथ कंडे सरकार द्वारा अपनाए जाते है ,,,

फिर भी हर साल अंतराष्ट्रीय मजदूर आर्गनाईजेसन की रिपोर्ट चौकाने वाली ही होती है,,,

इस संस्था के अनुसार विश्व में लगभग 246 मिलियन मजदूर बच्चो की उम्र 15 से नीचे है सबसे महत्व पूर्ण बात तो ये है की हर दस में से एक बाल मजदूर बच्चा क्रषि में कार्यरत है .....


Apna Uttarakhand

http://apnauttarakhand.com
कैसे बचें तनाव से ?
पिछ्ले भाग में हमने देखा कि किस प्रकार शहर की भागमभाग ज़िंदगी मनुष्य को तनाव से भर देती है और मनुष्य अपनी याद्दास्त भी खोने लगता है। लेकिन, क्या इस स्थिति से बचने का कोई रास्ता है? कई मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ‘हां है।’ मिशिगन विश्विद्यालय के…….

Apna Uttarakhand

मेरे दिल से

मेरा फोटो

MADHU.... CHAURASIA
MUZAFFARPUR, BIHAR, INDIA
सबसे लेट लतीफ कौन?

News, Views and Debate

यह ब्लॉग छोटी-छोटी खबरों पर आधारित है… ऐसी खबरें जिन्हें छापने अथवा दिखाने में हमारे सेकुलर मीडिया (चाहे इलेक्ट्रानिक हो या प्रिंट) को शर्म आती है…।

ऐसा कोई भी समाचार अथवा खबर, जिसमें भारत की छद्म-धर्मनिरपेक्षता बेनकाब होती हो, ऐसी खबर जिससे भारत की विदेश नीति शर्मसार होती हो, ऐसी कोई खबर जिसे अखबारों ने दबा रखा है… यहाँ प्रकाशित करने की कोशिश की जायेगी…



शहजाद को पकड़वाने वाले स्कूल प्रबन्धक की हत्या…

चौराहा

क्योंकि शाहरुख को आपकी जरूरत है-

सपोर्ट शाहरुख-

क्योंकि उन्होंने अमिताभ और करण जौहर की तरह मांद के मेमनो से माफी मांगने से इनकार कर दिया.

क्योंकि उनके समर्थन में उन्हीं की जमात का कोई आगे नहीं आ रहा जबकि ज्यादतर इसके शिकार हो चुके हैं या हो सकते हैं.

क्योंकि शाहरुख को अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए किसी ऐरे-गैरे की जरूरत नहीं है.

क्योकि ये ओछी वोट की राजनीति है

क्योंकि ये खुद को देश, कानून और संविधान से ऊपर समझने की खतरनाक कोशिश है

क्योंकि सचिन तेंदुलकर और मुकेश अंबानी को इसी तरह के बयानों पर न …….

विचारों का दर्पण

अक्सर मन और दिमाग में कुछ विचार चलते रहते है . इन्ही विचारो को शब्दों का रूप देने के लिए ब्लॉग की शुरुवात किया है . आप इस ब्लॉग को पढने के बाद आपने विचार ज़रूर प्रकट करें .

विवाद पैदा कर रहा है फेसबुक ...

देवेश प्रताप
कहा से शुरूवात करें ये बात जिसकी चर्चा यहाँ करने जा रहे है , अभी थोड़ी देर पहले फेसबुक (सोसिअलनेट्वोर्किंग साईट ) को लोगिन किया ....प्रोफाइल पर एक अचम्भित चीज दिखी ....एक कम्युनिटीजिसमें मेरे प्रोफाइल के कुछ लोग सदस्यता ले रखे है । मैंने भी जब वो कम्युनिटी को खोल कर देखा तो......बहुत हार्दिक दुःख हुआ । आप भी देखिये ये क्या है नीचे तस्वीर में है । ..........आखिर आज के इस आधुनिक युग में……

अन्तःप्रेरणा

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Kr.Shiv Pratap Singh

मुकेश गोयल की वर्षगाँठ के अवसर पर
७ फरबरी २०१०
सुन ऐ मुकेश बच्चे मेरे यह बात है हम सब के मन की !
तुझको न किसी की नज़र लगे आशीष मिले उस भगवन की !!
यूँ तो दुनिया में सब कोई आते हैं जाने जाते हैं,
कुछ अच्छा नाम कमाते कुछ बदनामी ले कर जाते हैं,
तेरे पलड़े में भी दोनों पर ज्यादा अच्छाई मन की !!

….
हमारा गुजरात
ज़िन्दादिल लोगों की बस्ती अपना अहमदाबाद

मस्ती ज़िन्दाबाद
जहाँ की हस्ती ज़िन्दाबाद
ज़िन्दादिल लोगों की बस्ती
अपना अहमदाबाद

बैसवारी baiswari
पुस्तक-मेला और पुलिस !

सोमवार, ८ फरवरी २०१०

दिल्ली में हो रहे १९ वें विश्व पुस्तक-मेले के आख़िरी दिन मैं अपने-आप को रोक नहीं पाया और वहां अपनी उपस्थिति ऐसे दर्ज़ कराई गोया मेरे गए बिना यह मेला संपन्न ही न होता ! बहर-हाल मैं वहाँ पहुंचा तो अकेले था,……..

रवि मन
मेरे लिए : रावेंद्रकुमार रवि
आइए अब जाने-माने ब्लॉगों की ओर रुख करते हैं-

हिन्दी काव्य संग्रह .......

याद तुम्हारी आई (गीत)















फिर
सज गई शाम सिंदूरी
मैसम ने ली अंगड़ाई
मुझे याद तुम्हारी आई ......

फूलों पर गुन गुनाए भ्रमर
हर कली कली शरमाई
मुझे याद तुम्हारी आई ......

लो क सं घ र्ष !: हिन्दू ह्रदय सम्राट बाल ठाकरे आदमखोर हो गया

हिन्दू टाईगर्स के नाम खुली पाती
प्रिय आजाद बुद्धिजीवी, प्रखर राष्ट्रवाद के प्रणेता
सादर प्रणाम,
हिन्दू ह्रदय सम्राट बाल ठाकरे उसके परिवारीजन राज ठाकरे उद्धव ठाकरे
अब आदमखोर टाईगर हो गए हैं उत्तर भारतीय नागरिकों का मांस खाने लगे। श्रीमान जी सच तो यह है कि यह विचारधारा ही गद्दारों कीविचारधारा है
जब कोई हत्या होती है तो हत्या भारतीय संघ में हिन्दू की होती है
मुसलमान की होती हैभारतीय नागरिक की होती है और भारतीय कानून
अपनी न्यायिक प्रणाली के तहत कार्य करता है लेकिनआदमखोरों के समूह
जब कंधमाल में भारतीय नागरिकों का मांस खाने लगते हैंगुजरात में खून की होलीखेल कर मांस खाने लगते हैं तो
एक आदमखोर को अपना चेहरा दागी आईने में देखने पर मति भ्रम हो जाने से
सारे लोग जातियों और धर्मों में बंटे दिखाई देते हैं और उसी सड़ांध से प्रखर राष्ट्रवाद पैदा होता हैआप काएक मुख्य सवाल यह भी है कि अफगानिस्तान से
हिन्दू मतावलंबी कम हो गए हैं आप जैसे लोग जरा सा
अपने गिरेबान में झांक कर देखें की जिस थाली में कुत्ता खा लेगा उस थाली को आप साफ़ कर रसोई में रखलेंगे लेकिन आदमी अगर खा लेगा तो
उस थाली को आप फेंक देंगे जिस धर्म का ठेका आपने ले रखा है
उसी के कुंठित स्वरूप के कारण छुआ-छूत और धर्म के नाम पर
शोषण उत्पीडन प्रारम्भ होता है आप जैसे लोगो नेहमारे धर्म को बदनाम कर रखा है
और उसी के कारण हजारों लाखों लोग हमारे धर्म को छोड़ कर जहाँ उनको
सामाजिक सम्मान मिल रहा है वह धर्म धारण कर रहे हैंअच्छा यह होगा कि न्याय सामाजिक समानतालिंग की समानता आदि
समाप्त किया जाए......

Kala Jagat

उत्सव और उसका आक्रोश!!! - उत्सव का नाम पहले भी सुना है मैंने। टेनिस खिलाड़ी रुचिका गेहरोत्रा को आत्महत्या के लिए मजबूर कर देने वाले हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौड़ पर..

ताऊजी डॉट कॉम

खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (191) : आयोजक उडनतश्तरी - बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं कि अब से इस खेल के दिन मंगलवार ...

Albelakhatri.com

अपने को जो प्रिय लगे, वैसा काम हमेशा करना चाहिए - दुनिया क्या कहेगी ? मुझ पर हँसेगी क्या ? ऐसे दुर्बल विचारों को न आने दे कर, अपने को जो प्रिय लगे, वैसा काम हमेशा करना चाहिए। यही सारे जीवन का रहस्य है ।...

मसि-कागद

इसे भी बताइए ज़रा कैसी लगी???------>>>>>दीपक 'मशाल' - आज से करीब १० साल पहले किशोरावस्था में मैंने और मेरे एक मित्र मोहम्मद शाहिद 'अजनबी' ने मिलकर एक छोटी सी साहित्यिक पत्रिका निकाली थी, नाम था... नई कलम... उभ..

हास्यफुहार

अच्छा क्या लगता है? - *अच्छा क्या लगता है?*** *फाटक बाबू की श्रीमती जी ने उस दिन बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए पूछा, **“**अच्छा बताइए तो आपको मुझमें ज़्यादा अच्छा क्या लगता ह..

ललितडॉटकॉम

हमने ली ब्लागिंग से छुट्टी!!! - (ललित शर्मा) - अभी अभी विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि *हमारी ब्लागिंग के खिलाफ एक षड़यंत्र रचा गया,* कल रात को एक बैठक हुयी जिसमे हमारी ब्लागिंग के प्रति लगन और स..

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

बच्‍चों के मनोवैज्ञानिक विकास में बहुत ही सकारात्‍मक प्रभाव डालता है 'लग्‍नचंदा योग' !! - क्षेत्रीय भाषाओं में बहुत नाज नखरों से पालन पोषण होनेवाले दुलारे बच्‍चे को 'लगनचंदा बच्‍चा' कहा जाता है , किसी बच्‍चे की जिद को देखकर उसे डांटते हुए यह भी कह..

वीर बहुटी

नई सुबह कहानी - नई सुबह - ---- * कहानी* आज मन बहुत खिन्न था।सुबह भाग दौड करते हुये काम निपटाने मे 9 बज गये। तैयार हुयी पर्स उठाया, आफिस के लिये निकलने ही लगी थी कि माँ जी न..

आरंभ Aarambha

लोहिया पर सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, बालकवि बैरागी व अन्य सात की कालजयी कविताएं - राम मनोहर लोहिया जी पर आधरित मेरे पिछले पोस्ट पर भाई अनुनाद सिंह जी ने टिप्पणी की, ..

रचनाकार

नन्दलाल भारती के दो आलेख - नन्‍दलाल भारती *एम.ए.** **। समाजशास्‍त्र** **।** **एल.एल.बी. ।** **आनर्स ।* *पोस्‍ट** **ग्रेजुएट** **डिप्‍लोमा** **..

ज़ख्म

बस इतना सा ............ - मैं नही कहता आसमाँ से चाँद तोड़कर लाऊँगा नहीं कहता तारों से माँग सजाऊँगा मैं नही कहता तेरे लिए आग का दरिया पार कर जाऊंगा नहीं कहता तूफानों का रुख मोड़ दूँगा ..

नुक्कड़

चीनी कम (अमिताभ श्रीवास्‍तव) - अमिताभ बच्चन और तब्बू की फिल्म थी 'चीनी कम'। मैने देखी नहीं। फिल्म देखने का शौक नहीं है सो नहीं देखी। उसकी कहानी भी पता नहीं। किंतु देश में चल रही सरकारी फ…

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लोकसंघर्ष को सीधा उत्तर
अगर एक भी ब्यक्ति का खून न बहाने बाले बाला साहब ठाकरे को आदमखोर कहेंगे तो फिर सिंगूर में निर्दोश किसानों,मजदूरों,महिलाओं ,बच्चों का खून बहाने बालों को क्या कहेंगे । और उन लोगों को जिन्होंने माओबाद,नक्सलबाद के नाम पर अपनी राजनिती चमकाने के लिए लाखों……

लखनऊ ब्लॉगर एसोसिएशन

आपकी सहेली ~ मेरी पहेली ~ 3
एक छोटी सी पहेली आप सभी साथियों के लिए ~नेहा और स्नेहा दोनों में लड़ाई हुई और एक दूसरे को पीटने लगी उनकी मम्मी ने आकर देखा तो बहुत नाराज़ हुई | लड़ाई से थक हार कर परेशान होकर उनकी मम्मी ने दोनों को सजा देने की सोची और दोनों को एक ही न्यूज़ पेपर के एक ही…

PRAKAMYA

कह रहीं बालियाँ गेहूँ की : डॉ॰ नागेश पांडेय संजय का एक बालगीत
कह रहीं बालियाँ गेहूँ की मधुर कान में काली कोयल गाए मस्त मल्हार!बाँट रहे हैं फूल सभी को ख़ुशबू का उपहार!पेड़ों ने पहनी है कोमल-नई-मनोहर वर्दी!भीनी-भीनी धूप निकलने लगी कम हुई सर्दी! लदे बौर से पेड़ आम के मस्त हवा संग झूमें!सुध-बुध छोड़ तितलियाँ सरसों पर…….

सरस पायस

“रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-19 का उत्तर” (अमर भारती)
रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-19 का सही उत्तर है- मानीला देवी मंदिर, अल्मोडा (उत्तराखण्ड) पहेली के विजेता हैं श्री ताऊ रामपुरिया जी रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-19 का सही उत्तर देने वाले नं०-2 हैं- श्री समीर लाल जी Udan Tashtari रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-19 का……….

अमर भारती

कार्टून : इसे कहते हैं रईसी !!


बामुलाहिजा >> Cartoon by Kirtish Bhatt

मेरी भावनायें...
कुछ कह दो - कुछ भी पुराना नहीं कुछ भी अनजाना नहीं कुछ भी अनकहा नहीं कुछ भी अनसुना नहीं फिर भी क्यूँ हैं हम अजनबी से क्यूँ ओढ़ ली है हमने ख़ामोशी की चादरें क्यूँ हमने..

कल चर्चा मंच पर

अवकाश रहेगा!

परसों फिर मिलेंगे!

राम-राम!

12 comments:

  1. खूबसूरत चर्चा । आभार ।

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  2. विस्तृत और सुन्दर चर्चा शास्त्री जी !

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  3. Aadarniya, yah charcha bhi khub rahi...Aabhar!!
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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  4. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  5. अच्छी चर्चा, अभिनंदन।

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  6. बहुत सुंदर, सुवाच्य एवम नयनाभिराम विस्तृत चर्चा.

    रामराम.

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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जानवर पैदा कर ; चर्चामंच 2815

गीत  "वो निष्ठुर उपवन देखे हैं"  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')     उच्चारण किताबों की दुनिया -15...