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Saturday, February 20, 2010

“परीक्षा सिर पर आई!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-69
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" 
आइए आज का
"चर्चा मंच" अपने पुराने ढंग से सजाते हैं-
सबसे पहले देखिए ये पोस्ट और इस पर आई एक महत्वपूर्ण टिप्पणी-
संवाद सम्मान 2009 - श्रेणी: नारी चेतना। एक लम्बी लड़ाई को जारी रखने की जद्दोजहद।

एक पुरानी कहावत है- विद्वान लोग दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं और समझदार लोग अपने अनुभवों से। लेकिन बेवकूफ कभी नहीं सीखते। सो, अपने आप को समझदार की श्रेणी में खड़ा करने के प्रयत्न में बीते दिनों से शिक्षा लेते हुए यह फैसला किया गया है कि अब आगे से 'संवाद सम्मान' के लिए नामित ब्लॉग के नामों का खुलासा नहीं किया जाएगा। सिर्फ उन्हीं ब्लॉग का जिक्र किया जाएगा, जिन्हें सम्मानित किया जा रहा है।…….
रावेंद्रकुमार रवि said...

"एक पुरानी कहावत है- विद्वान लोग दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं और समझदार लोग अपने अनुभवों से। लेकिन बेवकूफ कभी नहीं सीखते। सो, अपने आप को समझदार की श्रेणी में खड़ा करने के प्रयत्न में बीते दिनों से शिक्षा लेते हुए यह फैसला किया गया है कि अब आगे से 'संवाद सम्मान' के लिए नामित ब्लॉग के नामों का खुलासा नहीं किया जाएगा।"
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आप इससे क्या साबित करना चाहते हैं?
जितने अधिक विस्तार से बता सकते हैं, बताइए!
सरस पायस

परीक्षा सिर पर आई : रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत - परीक्षा सिर पर आई** खेल-कूद अब छोड़ें कुछ दिन, आओ, जमकर करें पढ़ाई! परीक्षा सिर पर आई!! टीवी-सीडी ख़ूब देख ली, ख़ूब किया है सैर-सपाटा! अब तो केवल देखें पुस्...
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वक्त की डोर - *कहते हैं जो रात गयी* *सो बात गयी ऐसा भी*** *कभी ही होता है*** *पर बात जो दिल में जाये उतर*** *क्या वो लाख भुलाये*** *भी भूलता है।*** * * *ये तो एक ..
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कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **

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मेरी भावनायें...

खाकर देखो तो - गोल-गोल रोटियों पर आज एक नज़्म लिखा है दाल में ख़्वाबों का तड़का लगा सब्जी में ख्वाहिशों का नमक मिलाया है खाकर देखो तो ज़िन्दगी क्या कहती है
GULDASTE - E - SHAYARI

- ज़ख्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें, ख़ुद निशाना बन गए वार क्या करें, जान चली गयी पर खुली रह गयी आँखें, इससे ज़्यादा हम उनका इंतज़ार क्या करें !
आदित्य (Aaditya)

1411 - अगली बार शायद पिजरें में भी न दिखे!! - मुझे भी चिंतित होना ही चाहिए न.. कहते है की भारत में अब केवल १४११ बाघ बचे है.. केवल १४११.. बस इतने से.. पापा पिछले वर्ष जिम कोर्बेट गए.. शायद एक बाघ मिल जा..

नारी की पोस्ट अखबार मे
साभार
नारी
रचना

आस्‍था तो अच्‍छी चीज है ... पर ये कैसे कैसे अंधविश्‍वास ( दूसरा भाग) ??
कल से ही मैं अपने देश में बेवजह फैले अंधविश्‍वास पर हमारे ब्‍लोगरों की निगाह की चर्चा कर रही हूं , इसी की दूसरी कडी आज प्रस्‍तुत है .......ऋषिकेश खोङके "रुह" जी को सुनने में अजीब सा लग रहा है कि किसी के शरीर में देवी आ गयी
गत्‍यात्‍मक चिंतन
संगीता पुरी
वीर बहुटी
कविता पँखनुचा - कविता--- पंखनुचा उसके अहं में छिपा विष उसकी मैं में, तू की अवहेलना, शोषण की बुभुक्शा, कामुक्ता कि लिप्सा, अभिमान की पिपासा, कर देती है आहत तर्पिणी का अनुराग..
शिल्पकार के मुख से
गज़ब कहर बरपा है महुए के मद का भाई........ जोगीरा सर र र र र र र हो..... जोगी जी (ललित शर्मा) - *फ़ा*गुन का मौसम है बस अब मन के रंग-अबीर-गुलाल उड़ रहे हैं, दिलों पर भी मस्ती छाई और हम भी मस्ती मे हैं, होली आने को जो है, अब उड़े रे रंग गुलाल। अभी से म..
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उर्मिला की विरह वेदना--------[गीत]--------वंदना गुप्ता - १) प्रियतम हे प्राणप्यारे विदाई की अन्तिम बेला में दरस को नैना तरस रहे हैं ज्यों चंदा को चकोर तरसे है आरती का थाल सजा है प्रेम का दीपक यूँ जला है ज्यों दीपक ..
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हाबड-तोब़ड़ का क्या लाभ? - आज कल किसी भी विचारण न्यायालय में यह दृश्य देखने को मिल सकता है। एक ओर अदालत का रीडर किसी मुकदमे में वकीलों से आवेदन या उन के जवाब रिकार्ड पर ले रहा है। दू..
खताएं भुला दे!
तन्हाई में ग़ुम मैं तेरा आदी हो गया हूँ,
कम से कम अब मेरी खताएं भुला दे,
ख़याल-ए-वस्ल(१) की हाफिजा(२) कुछ और जी लूं,
नींद और हो गहरी साया-ए-ज़ुल्फ़ फैला दे,….
कुछ मैं कहूं मुझसे ...........
कंकड़ उछालना प्रकृति है उनकी मैं देती हूं उससे अपनी नींवों को मजबूती ! इसी डगर पड़ सकता है कभी लौट आना चलते हुये भी कांटे हटाते जाना ! अजाने ही सांप को दूध पिलाते हैं फिर भी संभले वही सयाने है! शब्दों से तो कम ही काम लेना मन ही में गिनकर गांठ बांध लेना !
भोर की पहली किरण
 
किरण राजपुरोहित नितिला
कार्टून : गडकरी का बिजनेस फंडा

बामुलाहिजा >>
Cartoon by Kirtish Bhatt
Kajal Kumar's Cartoons 
काजल कुमार के कार्टून
कार्टून:- सच बताना, यह बस आपने भी देखी है न !
[Bus.jpg]

आज के लिए बस इतना ही-
कल फिर भेंट होगी!

15 comments:

  1. हमेशा की तरह आपने विस्तारित रूप से बहुत ही बढ़िया चर्चा किया है! बहुत से लिंक भी मिलें! मेरी शायरी चर्चा पर लाने के लिए धन्यवाद!

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  2. सुन्दर चर्चा ..........हमेशा की तरह.

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  3. बहुत गजब की चर्चा की आपने, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  4. शास्त्री जी, कमाल की चर्चा है,
    बहुत सुंदर-आभार

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  5. सुन्दर प्रस्तुति शास्त्री जी !

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  6. हमेशा की तरह बहुत बढिया रही चर्चा!!!
    आभार्!

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  7. सुन्दर चर्चा ..........हमेशा की तरह.

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  8. आदरणीय शास्त्री जी,
    आपने मेरी टिप्पणी को चर्चा में शामिल किया है,
    इसलिए एक रहस्य और उजागर करना पड़ रहा है - "संवाद सम्मान" एक "स्वांत: सुखाय" आयोजन है!
    ज़किर अली रजनीश जी ने
    "बच्चों का ब्लॉग" श्रेणी के अंतर्गत
    "शून्य" वोट पानेवाले जिस ब्लॉग को
    सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग की जो स्वत:कथित संज्ञा दी है,
    वह एक तरह से उन्हीं का ब्लॉग है,
    क्योंकि वे उसके सलाहकार संपादक हैं!

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  9. सादर अभिवादन! सदा की तरह आज का भी अंक बहुत अच्छा लगा।

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  10. Aaj ki charcha bhi bahut acchi rahi...Aapko bahut bahut dhanywaad!
    Saadar

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  11. धीर गंभीर व विस्तृत चर्चा के लिए आभार.

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  12. बहुत बढ़िया चर्चा . अच्छी पोस्टो का जिक्र किया है ...

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