Followers

Wednesday, June 17, 2020

"उलझा माँझा" (चर्चा अंक-3735)

"उलझा माँझा" (चर्चा अंक-3735)
मित्रों!
चर्चा के प्रारम्भ में यह निवेदन करना चाहता हूँ कि भविष्यवाणियों पर जरा भी ध्यान न दें। क्योंकि भविष्यवक्ता कोई भगवान नहीं होता है। बल्कि हमारी आपकी तरह से ही एक सामान्य इंसान होता है।
नास्त्रेदमस ने अनुसार 2020 में एक नए युग की शुरुआत होगी। उन्होंने अनुमान लगाया कि साल 2020 में कई देशों में आपस में टकराव बढ़ जाएंगे। इसके साथ ही 2020 में इस सदी का सबसे बड़ा आर्थिक संकट भी आएगा। भविष्यवाणी के अनुसार साल 2020 में दुनिया के बड़े देशों में गृह युद्ध जैसे हालात हो जायेंगे और लोग सड़कों पर उतर आयेंगे।
1.जलवायु परिवर्तन से होगा विनाश
2.बढ़ेगा वर्ग संघर्ष
3. तीसरे विश्व युद्ध की आशंका
4. दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी
5. बड़े नेताओं की जान को खतरा
नास्त्रेदमस की कुछ भविष्यवाणियों को हर वर्ष इसी तरह इंटरनेट पर किसी न किसी तरह प्रचारित किया जाता रहा है। उनकी भविष्वाणियों के कई अर्थ निकाले जा सकते हैं और कई व्यक्तियों से उनकी भविष्यवाणी को जोड़ा जा सकता है।
किन्तु...!
जहाँ तक जलवायु परिवर्तन का सवाल है तो यह कई वर्षों से जारी है। प्राकृतिक घटनाएँ हर वर्ष होती है। सूर्य ग्रहण भी हर वर्ष 2 या 3 होते ही रहते हैं। हर वर्ष कोई न कोई नेता किसी न किसी कारण से मारता या मारा जाता है। वर्ष संघर्ष आज से नहीं पिछले कई वर्षों से हर देश में जारी है। हर वर्ष के अन्त में यह घोषणा की जाती है कि अगले वर्ष तृतीय विश्व युद्ध होने की आशंका है। ऐसे में इन भविष्यवाणियों के विश्वसनीय होने का कोई आधार नहीं रह जाता है।
****
अब देखिए बुधवार की चर्चा में
मेरी पसन्द के कुछ लिंक...
**१**
क्या ब्लॉगर भी चोरी, सीनाजोरी जैसी
हरकतें करने लगे हैं?
कल रात नियमित भ्रमण पर हमारीवाणी पर टहलना हो रहा था. अभी ज्यादा दूर जाना नहीं हो सका था कि एक पोस्ट का शीर्षक हमें अपनी कविता जैसा दिखा. ब्लॉगर का नाम भी पहचाना हुआ था. इसलिए लगा नहीं कि हमारी कविता वहाँ पोस्ट की गई होगी. इसके बजाय लगा कि कहीं हमारी कविता के बारे में तो कुछ लिखा तो नहीं गया है. ऐसा विचार आते ही पोस्ट लिंक पर क्लिक कर दिया. पोस्ट खुली तो हमारी आँखें खुलीं. पूरी की पूरी कविता उस पोस्ट में थी मगर हमारे नाम के बिना...
रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
**२अ**
मन पाखी पिंजर छोड़ चला-गीत
**२ब**
दुनिया तो रैन बसेरा है-
गीत
9 Key Insights from Adam Grant's 'Give And Take' | Heleo
क्या तेरा है क्या मेरा है।
यह घर कुछ दिन का डेरा है।।
साथ चलेंगे कर्म हमारे,
यह पाप-पुण्य का फेरा है...
मधुर गुँजन पर ऋता शेखर 'मधु'
**३**
छत और आँगन
आँगन जिसके बिना घर अधूरा लगता है मुझे बचपन से ही घर में आँगन और छत से बड़ा लगाव रहा है . आँगन तो कवियों की रचनाओं में भी झिलमिलाता रहा है चाहे वे वात्सल्य की हों या श्रंगार की .देशभक्ति गीत हों या लोकगीत ..आँगन बिना घर अधूरा सा लगता है .आँगन पाँवों के नीचे जमीन देता है और उड़ानों के लिये आसमान भी . गाँव के तो हर घर में आँगन जरूर हुआ करता है...
Yeh Mera Jahaan पर
गिरिजा कुलश्रेष्ठ
**४**
विरासत में ऐसा संसार मिला
खिड़कियों से झाँककर
संसार निहारें हम
ऐसा हमारे बड़ों ने
संसार सौंपा है...
अभिनव रचना पर Mamta Tripathi
**५**
मंज़िल
कोरोना ने समझाया है इन्हें
कि जिसे मंज़िल समझा था,
वह तो बस एक छलावा था,
मंज़िल तो इनकी वहीं थी,
जहाँ से ये कभी चले थे.
कविताएँ पर Onkar
**६**
गुलमोहर
गुलमोहर बदरंग मन में रंग भरते
गुलमोहर निराश हृदय को आस दिलाते
गुलमोहर खिलते रहो उदासियों में भी
जीवन्त रहो नीरवता में भी ...
अभिनव रचना पर Mamta Tripathi
**७**
"उलझा मांझा"
My First Book
बीते जिस पर वो दिल जाने ,
खुद को वो समझाये कैसे ?
जीवन बगिया उलझा मांझा ,
उलझन को सुलझाये कैसे ?
मंथन पर Meena Bhardwaj
**८**
परांठे पर टैक्स
परांठे पर टैक्स? वो भी 18%? ये तो सरासर अन्याय हो गया. सुबह नाश्ते में परांठा ना हो तो सारा दिन ऐसा महसूस होता है कि नाश्ता ही नहीं किया. जब अखबार पढ़ी तो पता लगा की खबर सही है. 'तैयार' याने pre-cooked रोटी पर 5% जी एस टी और परांठे पर 18% जी एस टी लगा करेगा. हमारा और ज्यादातर उत्तर भारत का नाश्ता रोटी/परांठा + सब्जी + दही + चाय जैसे कॉम्बिनेशन से होता है...
Sketches from life पर
Harsh Wardhan Jog
**९**
ख़ाली हाथ जाना है
My photo
ख़ाली हाथ हम आए थे
ख़ाली हाथ ही जाना है !
तन्हा-तन्हा रातें गुज़री
तन्हा दिन भी बिताना है !
लम्हों का सफ़र पर
डॉ. जेन्नी शबनम
**१०**
क्या हो जाता है
मेरा सृजन पर
Onkar Singh 'Vivek'
**११**
पिघलते लम्हात -
उन वाष्पित पलों में कहीं तुमने
उकेरा था मेरा नाम बड़ी
गर्मजोशी से, वही हैं
खिड़कियां, वही
शीशों वाला
दरवाज़ा,
वादियों में अक्सर उभरते हैं...
अग्निशिखा : पर
Shantanu Sanyal
**१२**
विधाता का है उपहार
क्यों छोड़ चले संसार
था खुद पे नहीं एतबार
क्यों.........
था सबकुछ तो जीवन में
थी कैसी कमी तेरे मन में
किस बात से मान ली हार
क्यों...........
BHARTI DAS
**१३**
आलिंगन....
नीतू ठाकुर 'विदुषी'
कुंचित काली अलकें महकी मधुर पर्शमय अभिनंदन
चंद्र प्रभा सी तरुणाई पर महका तन जैसे चंदन।।
कजरारी अँखियों के सपने निद्रा से जैसे जागे
दर्पण में श्रृंगार निहारे चित्त पिया पर ही लागे
पिया मिलन की आस हँसी जब सोच आगमन आलिंगन...
MAN SE- Nitu Thakur
**१४**
लगता है कहीं कुछ गिरा है
धम !
लगता है कहीं कुछ गिरा है
मैं उत्सुक हो बाहर झाँका
लोग देखने लगे मुझे हिकारत से
शायद मैं ही गिरा था उनकी नज़रों से।
मन के वातायन पर
जयन्ती प्रसाद शर्मा
**१५**
क्योंकि खुश रहना है जरूरी...
Reason to be happy
संसार की मोहमाया के आगे व्यर्थ है ये सुंदर काया। तन स्वस्थ रखना जरूरी है पर उससे भी ज्यादा जरूरी मन की शांति है। अपने आस पास कुछ लोग ऐसे होने चाहिए जिससे आप बिना किसी झिझक के अपने दिल की बात कह सकें...
iwillrocknow- nitish tiwary's blog.
**१६**
यूँ ही गुज़रा - एक ख्याल ...
शबनम से लिपटी घास पर
नज़र आते हैं कुछ क़दमों के निशान
सरसरा कर गुज़र जाता है झोंका
जैसे गुजरी हो तुम छू कर मुझे...
स्वप्न मेरे पर दिगंबर नासवा
**१७**
imelight
ये लाइट ऐसी वैसी नहीं है
बहुत चमकदार है
जो भी इसके पास आता है
वो चमक जाता है
सूरज की रौशनी की तरह
और अपनी एक पहचान बना लेता है...
प्यार पर Rewa Tibrewal
**१८**
ग़ज़ल
"खाली हुआ खजाना"
उच्चारण
****
आज के लिए बस इतना ही....।
****

1 comment:

  1. आपकी प्रस्तुति हमेशा निराली होती है। बधाई इस कलेवर का!

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।