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Wednesday, June 24, 2020

"चर्चा मंच आपकी सृजनशीलता" (चर्चा अंक-3742)

बिना किसी भूमिका के चलते हैं 
बुधवार की चर्चा में  
मेरी पसन्द के कुछ लिंक... 
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श्रीमती अनीता सैनी अपने बारे में कहती हैं-   
"मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, 
प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, 
कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, 
अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है" 
जी सही कहा आपने कविता का मर्म ही उसका सार होता है। 
और रचनाकार का धर्म शब्दों की माला में 
सुरभित सुमन पिरोना होता है।
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19 मार्च 1974 को बुन्देलखण्ड के उरई (जालौन) उ0प्र0 में जन्मे  डॉ. राजा कुमारेन्द्र सिंह स्पन्दन के सम्पादक हैं। आपकी शैक्षिक योग्यता पी-एच0 डी0 (हिन्दी साहित्य एवं अर्थशास्त्र) डी0 लिट्0 (हिन्दी साहित्य) बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालयझाँसीस्वीकृति की प्रत्याशा में परास्नातक (एम00 - अर्थशास्त्रहिन्दी साहित्यराजनीतिविज्ञानसमाजशास्त्र)
स्नातक (बी0 एस-सी0 गणित) स्नातकोत्तर डिप्लोमा - पत्रकारिता एवं जनसंचार, (पीजीजेएमसी) है। आप नियमित लेखन के साथ विभिन्न ब्लॉगों को संचालित करते हैं और फेसबुक-ट्वीटर पर भी आपकी प्रतिदिन की पोस्ट देखी जा सकती हैं।
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चर्चा मंच आपकी सृजनशीलता का सम्मान करता है।

ईगो ... 

दो पीठ के बीच का फाँसला
मुड़ने के बाद ही पता चल पाता है
हालांकि इन्च भर दूरी
उम्र जितनी नहीं
पर सदियाँ गुज़र जाती हैं तय करने में... 
स्वप्न मेरे पर दिगंबर नासवा  
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युद्ध में नहीं बदलेगा तनाव 

भारत चीन सीमा पर तनाव को लेकर कुछ लोग युद्ध की आशंका से अभी चिंतित होने लगे हैं। स्वाभाविक है। बात केवल युद्ध की नहींउसके बाद बनने वाले हालात की होती है। इसका अंदाजा दोनों देशों को है।
आशंका यह है कि अगर यह युद्ध शुरू हुआ तो केवल भारत चीन तक सीमित नहीं रहेगा। यह अंततः विश्वयुद्ध में बदल जाएगा। यह आशंका गलत नहीं है। युद्ध हुआ तो वाकई विश्वयुद्ध में बदलेगा। अमेरिकाइजरायलआस्ट्रेलियाफ्रांस जैसे बड़े पहलवान अभी से कमर कसने लगे हैं और सब भारत की ओर अखाड़े में कूद चुके हैं... 
इयत्ता पर इष्ट देव सांकृत्यायन 

भाव और अभाव 

जो भी दुःख है...  अभाव से उपजा है 
जो भी इच्छा है...  उस अभाव को दूर करने की है 
जो भी कर्म है...  उस इच्छा को पूरा करने के लिए है 
समीकरण सीधा है 
अभाव का अनुभव ही कर्म में लगाता है... 
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हाईकू 

१- 
हो बेमिसाल
कोई नहीं तुमसा
तेरे प्यार सा
२-  

माँ की ममता
कोई उससा नहीं
 उसके सिवाय... 

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दुर्वासा ऋषि का क्रोध बना था  

समुद्र मंथन का कारण 

इस विशाल, महान, श्रमसाध्य कार्य के लिए कई दैवीय शक्तियों और उपकरणों की आवश्यकता थी। दैवीय उपकरण सागर मंथन से ही उपलब्ध हो सकते थे और इसके लिए यह जरुरी था कि दैत्य-दानव जैसी आसुरी शक्तियों का भी सहयोग लिया जाए। पर सुर और असुर एक दूसरे के जानी दुश्मन थे ! इस समस्या को सुलझाने के लिए त्रिदेवों ने काफी सोच विचार कर एक योजना बनाई और असुरों को साथ लाने का कारण गढ़ा गया।  
कुछ अलग सापरगगन शर्मा 
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मैंने जीना सीख लिया है ... 

हँसी उड़ाती छंदमुक्त छंदबद्ध की बातें
मैंने तुम्हारे मन के झरोखे देखे
तुम्हारे मन में छुपे अहंकार को मैंने देख लिया है
जिंदगी को आँखों में आँखे डालना सीख लिया है
मैंने जीना सीख लिया है ! 

झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव 
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आज मैंने चर्चा मंच के चर्चाकार रवीन्द्र सिंह यादव जी का 
जीवन परिचय पढ़ा तब आभास हुआ कि आपका हिंदी साहित्य में बहुत बड़ा योगदान है।
मेरी फ़ोटो
देखिए इन्हीं की जुबानी इनका कृतित्व।
हिन्दी कविता,कहानी,आलेख,हाइकु आदि लेखन 1988 से जारी. आकाशवाणी ग्वालियर से 1992-2003 के बीच कविताओं, कहानियों एवं वार्ताओं,विशेष कार्यक्रमों का नियमित प्रसारण. वेबसाइट: हिन्दी आभा भारत ब्लॉग: हमारा आकाश:शेष विशेष मेरे शब्द-स्वर चैनल (YouTube.com). गृह ज़िला: इटावा (उत्तर प्रदेश ) कृतियाँ: 1. प्रिज़्म से निकले रंग (काव्य संग्रह- 2018 ) 2. पंखुड़ियाँ (24 लेखक एवं 24 कहानियाँ - 2018) 3. प्यारी बेटियाँ / माँ ( साहित्यपीडिया द्वारा प्रकाशित सामूहिक काव्य संग्रह -2018/2019) 4.सबरंग क्षितिज:विधा संगम 2019 सम्मान: साहित्यपीडिया काव्य सम्मान 2018 संपादन: अक्षय गौरव पत्रिका (त्रैमासिक) अन्य : नव भारत टाइम्स, अमर उजाला काव्य आदि वेबसाइट पर रचनाओं का प्रकाशन। संप्रति : निजी चिकित्सा संस्थान में नई दिल्ली में कार्यरत। 
बारिश फिर आ गयी  
खिड़की  से बाहर 
हाथ  पसारकर 
नन्ही-नन्ही  बूंदों को हथेली में भरना 
फिर हवा के झौंकों में लिपटी फुहारों में 
तुम्हारे सुनहरे गेसुओं की 
लहराती लरज़ती लटों का भीग जाना 
याद है अब तक झूले पर झूलना-झुलाना 
शायद तुम्हें भी हो...? 
हिन्दी-आभा*भारत  पर  
Ravindra Singh Yadav 
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उच्चारण पर डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
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शब्द-सृजन-27  का विषय है-

'चिट्ठी' 

आप इस विषय पर अपनी रचना
 (किसी भी विधा में) आगामी शनिवार
 (सायं बजे)   तक चर्चा-मंच के ब्लॉगर संपर्क फ़ॉर्म
 (Contact Form )  के ज़रिये हमें भेज सकते हैं।
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आज की चर्चा में हस इतना ही...। 
अगले सप्ताह फिर कुछ ब्लॉगरों के 
परिचय के साथ उपस्थित हो जाऊँगा। 
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14 comments:

  1. सुंदर और सार्थक चर्चा।
    आपको नमन।

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  2. बहुत ही सुंदर सराहनीय प्रस्तुति आदरणीय सर.परिचय की नई पहल बहुत ही रोचक है निसंदेह उत्साहवर्धक रहेगी.आपकी मेहनत और लगन को मेरा प्रणाम.मेरे परिचय और रचना को स्थान देने हेतु सादर आभार.

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  3. सुप्रभात
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद सर |

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  4. बेहतरीन प्रस्तुति नए प्रयोग के साथ आदरणीय शास्त्री जी द्वारा। ब्लॉगर परिचय के साथ प्रस्तुति में रोचकता आ गई है।
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।
    मेरी रचना चर्चा में सम्मिलित करने हेतु सादर आभार आदरणीय शास्त्री जी।


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  5. ब्लॉगरों के परिचय का नूतन प्रयोग बहुत ही सराहनीय है। आपकी मेहनत को सलाम आदरणीय शास्त्री जी। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  6. बहुत ही शानदार आज की चर्चा मंच की पोस्ट जीवन परिचय शामिल करना बहुत ही शानदार पहल है आपकी और हमारी पोस्ट को शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय शास्त्री जी

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  7. आकर्षक भूमिका के साथ पठनीय सूत्रों की खबर देता चर्चा मंच ! आभार मुझे भी शामिल करने हेतु !

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  8. चर्चामंच का हर प्रयोग सराहनीय है। रचनाकारों के बारे में विस्तृत परिचय जानकर अच्छा लगा। आपकी मेहनत और लग्न हमें भी ऊर्जावान बनाती हैं ,सत सत नमन सर

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  9. उत्कृष्ट अभिनव प्रयोग के साथ बेहतरीन प्रस्तुति । सभी सूत्र सुन्दर और सराहनीय । बहुत मेहनत और समय दे कर सजायी गई पुष्पगुच्छ सी प्रस्तुति ।

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  10. बहुत सुंदर अपनी सुभग छाप छोड़ती सारी रचनाएं बेमिसाल है

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  11. बहुत ही सुंदर सराहनीय प्रस्तुति .परिचय की नई पहल, बहुत ही रोचक है चर्चा कारों के बारे में जानना उनकी सतत लेखन में रत लेखनी और उनकी कृतियां निसंदेह उत्साहवर्धक रहेगी उनके लिए और पाठक वर्ग को अपने चर्चाकारों को जानने का सहज अवसर दे रही है.आपकी मेहनत और लगन साफ झलक रही है.मेरी रचना को स्थान देने हेतु सादर आभार.
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

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  12. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  13. वाह! आदरणीय गुरु जी , अभिनव प्रयोग और सुंदर प्रस्तुतिकरण | ब्लॉगर के परिचय के रूप में रचनाकारों के बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा | बधाई और शुभकामनाएं| सादर

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  14. बहुत सुंदर चर्चा अंक।बेहतरीन प्रस्तुति।

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