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मंगलवार, जून 08, 2021

"सवाल आक्सीजन का है ?"(चर्चा अंक 4090)

सादर अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है

(शीर्षक आदरणीय संदीप जी  की रचना से )

"5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया" 

लेकिन जब सवाल ऑक्सीजन का अर्थात "प्राणवायु" का हो 

तो एक दिन पौधे लगाने से,बधाईयाँ देने से या 

उसके ऊपर चंद पंक्तियाँ लिख देने से 

क्या हमारा उदेश्य पूरा हो जायेगा 

और समस्या का समाधन हो जायेगा ???

क्यों न हम हर दिन पर्यावरण दिवस मनाये.....? 

खैर,चलते हैं आज की रचनाओं की ओर.....

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 सवाल आक्सीजन का है ?




प्रकृति दर्शन, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के जून माह के अंक का कवर पेज- 

सवाल आक्सीजन का है ?


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धूलभरे दिनों में







धूलभरे दिनों में
न जाने हर कोई क्यों था रुठा ?
बदहवासी में सोए स्वप्न
शून्य की गोद में समर्पित आत्मा
नींद की प्रीत ने हर किसी को था लूटा
चेतन-अवचेतन के हिंडोले पर
मनायमान मुखर हो झूलता जीवन


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नैन से आँसू झरे (विश्व पर्यावरण दिवस)


मेघ बरसे यूँ कि जैसे नैन से आँसू झरे ।
दामिनी भी कड़ककर, आज तरुवर पर गिरे ।।

आँधियों ने ला बवंडर, धुंध फैलाई विकट ।
सूर्य की किरणों ने फेंकी, अग्नि जैसी लौ लपट ।।


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सीख दुनियादारी की





छि! क्या दुनिया है ?...कैसी दुनिया है?...बड़ी अजीब दुनिया है....ऐसी ही है ये दुनियादारी...!!!

लोगों से बार-बार ऐसे शब्द सुन तंग आ गयी दुनिया की रूह!

फिर लिया फैसला और चली  हर एक नवजात शिशु को दुनिया में आते ही दुनिया का हाल बताने.......   ताकि उसे न लगे अजीब ये दुनिया....  न हो दुनिया से शिकायत...और न सुनाये वह भी दुनिया को दुनियादारी के ताने...... ।

वह मिली हर उस नवजातक से....


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गाँव की सृमति




दो घड़ी आ पास बैठें 

पीपली की छांव गहरी 

कोयली की कूक सुन कर 

गोखरू की झनक ठहरी ।।


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उपनाम - -




बहुत कुछ छूट जाते हैं गंत्वय से
पहले, साथ रह जाता है एक
शून्यता का शहर, और
विस्मृत उपनाम,
दस्तकों के
भीड़



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अभाव का काँटा जब तक चुभता रहेगा उर में 

भाव की धारा क्यों कर बहेगी 

जो ‘नहीं’ है ‘नहीं’ हो रहा है 

उस पर ही नज़र टिकी रही तो 

भय की कारा से छुट्टी क्यों कर मिलेगी 



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श्रीकृष्ण जी की लीला का अंतिम दिन , 18 फरवरी 3102 ईसा पूर्व



श्रीकृष्ण को मालुम था कि वे जहां जा रहे हैं वहां क्या होने वाला है ! उनका सामना अपने पूरे कुल और सारे पुत्रों की मृत्यु के शोक में डूबी, रौद्र रूपेण उस माँ से होने जा रहा था, जो श्रीकृष्ण को ही इन सब घटनाओं और युद्ध का उत्तरदाई मानती रहीं ! वह कुछ भी कर सकती थी ! पर फिर भी वे सांत्वना देने के लिए गांधारी के कक्ष की ओर निर्विकार रूप से बढे जा रहे थे ! फिर जो होना था वही हुआ !
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आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दे...

आप सभी स्वस्थ रहें,सुरक्षित रहें 

कामिनी सिन्हा 

17 टिप्‍पणियां:

  1. शुक्रिया आपका कामिनी जी...। आपने आक्सीजन जैसे संकट को महसूस किया... ये वह दौर है जब हमें संजीदा होना होगा...। पत्रिका का ये अक आक्सीजन संकट पर है...। हम मूल विषयों पर विषय केंद्रित पत्रिका का प्रकाशन कर रहे हैं... आपके माध्यम से मैं समस्त उन साथियों का जो ब्लॉग पर हैं और प्रकृति पर लिख रहे हैं... चाहे जो विधा हो...आप हमें ईमेल कर सकते हैं...। वैसे मैं हर अंक का विषय यहां शेयर करूंगा...। आभार आपका...
    नोट- हम आलेख या किसी भी रचना पर किसी भी तरह का मानदेय देने की स्थिति में नहीं हैं ..ये सहयोग से ही संभव हो पा रही है...
    ईमेल- editorpd17@gmail.com
    व्हाट्सएप- 8191903651

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही सुंदर सराहनीय संकलन आदरणीय कामिनी दी।
    मेरे सृजन को स्थान देने हेतु दिल से आभार।
    सभी को हार्दिक बधाई।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुंदर संकलन कामिनी जी! दिन में फुर्सत से सभी सूत्रों को पढ़ती हूँ । चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  4. सुंदर चर्चा। सभी लिंक्स शानदार।

    जवाब देंहटाएं
  5. सार्थक भूमिका और सराहनीय रचनाओं के सूत्रों से सजा चर्चा मंच! आभार

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  7. कामिनी जी
    रचना को सम्मिलित कर मान देने हेतु अनेकानेक धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
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  9. बहुत ही उम्दा लिंकों से सजी लाजवाब चर्चा प्रस्तुति
    सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं।
    मेरी रचना को स्थान देने हेतु हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी!

    जवाब देंहटाएं
  10. कामिनी जी आज का अंक बहुत सुंदर सार्थक है।
    सभी रचनाएं बहुत आकर्षक पठनीय है।
    भूमिका में संदीप जी की पंक्तियाँ गहरा असर छोड़ रही है।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय तल से आभार।

    जवाब देंहटाएं
  11. कामिनी जी,आज के अंक पर देर से आने के लिए क्षमा प्रार्थी हूं,समसामयिक तथा आकर्षक रचनाओ ने मन मोह लिया, श्रमसाध्य कार्यहेतु आपको मेरा सादर नमन एवम वंदन,सभी रचनाकारों को मेरी शुभकामनाएं,मेरी रचना को स्थान देने हेतु आपका हार्दिक शुक्रिया ।

    जवाब देंहटाएं
  12. आप सभी का हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार

    जवाब देंहटाएं

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