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Monday, August 16, 2021

'नूतन के स्वागत-वन्दन में, डूबा नया जमाना' ( चर्चा अंक 4158 )

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय डॉ.रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक' जी की रचना से। 

सादर अभिवादन। 

सोमवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

15 अगस्त 2022 को 

हम आज़ादी की 

75 वीं वर्षगाँठ मनाएँगे। 

अर्थात 1947+75 = 2022  

इस विशिष्ट साल के 

तारीख़ ,महीने ;दिन 

गिनते जाएँगे। 


आइए अब पढ़ते हैं चुनिंदा रचनाएँ-

"डूबा नया जमाना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 वो अतीत-इतिहास बन गया,
जो भी हुआ पुराना।
नूतन के स्वागत-वन्दन में,
डूबा नया जमाना।।

*****

जन्म से मृत्यु तक

किसी ने विवरण

 दिया भी तो

 नमक मिर्च लगा कर 

किस्सा सुनाया। 

है कितनी सच्चाई  

उस विवरण में

आज तक

जान न पाई।

***** 

1125-आज़ादी के मायने

रैली निकाली जानी है

एक सभा

आयोजित करानी है

अपना पक्ष

गम्भीरता से रखना है

भाषण में करना है

परतन्त्रता का विरोध

स्वतंत्रता में बड़ा अवरोध

*****

पचहत्तर साल बाद - -

*****

प्रणाम...(शहीदों को )

पोंछकर सिंदूर अपना शृंगार करती देश का

देह,मन प्रीत समिधा शांति यज्ञ परिवेश का,

तपस्विनी तेजोमयी के चक्षुओं से स्वप्न झरकर,

शिखर पर हिम के तिरंगे संग रेखांकित हो गये।

*****

नमन् उन्हें जो आजादी की खातिर सबकुछ भूल गये...

नमन् उन्हें कि जो सीमा पर
प्रहरी बनकर रहते हैं,
देश सुरक्षित रहे इसलिये
हर दुख सहते रहते हैं...

*****

वे वीर थे हिंदुस्तान के

जान गंवा लाशों की ढेरी,
लगा दिए जो दुश्मन की।2
भूल कभी परवाह नहीं की,
जिसने अपने जीवन की।2
जंजीर तोड़ दी मां की जिसने,
लगाके बाजी जान की।

वे वीर थे....

*****

हमारा घर--25

"जी ऐसा ही हुआ है रमन जी। उन्होंने भी शादी नहीं की थी।हमारी पिकनिक जयपुर के जिस होटल में रुकी थी।वही मौसी जी की मुलाकात मौसा जी से हो गई। और फिर दोनों को एक-दूसरे के साथ घटी घटनाओं की जानकारी हुई और फिर दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया..!"*****

गूंजने दो विजयी नारा

न जाने कितना लहु बहा,
कितना कुछ सभी ने सहा। 

आज हम स्वतंत्र हैं,

पर मन में कई प्रश्न हैं। 

*****

नीति के दोहे मुक्तक

राजनीति 

अपराधी लड़े  चुनाव, नहि निर्भय मतदान। 
पराजित  हो अपराधी , वोटर खतरे  जान।।

 ©कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर,कानपुर। 
*****

*****

आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगले सोमवार। 

रवीन्द्र सिंह यादव  

9 comments:

  1. लाजवाब! बहुत बढ़िया।ओजपूर्ण रचनाओं से ओत-प्रोत बेहद सुंदर प्रस्तुति

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  2. बहुत सुन्दर और सार्थक चर्चा प्रस्तुति

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  3. चर्चा मंच में उत्तम कविताओं का संकलन।

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  4. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति।मेरी रचना को मंच पर स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय।

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  5. जय हिन्द !
    धन्यवाद

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  6. सुंदर संकलन में मेरी रचना सम्मिलित करने के लिए अत्यंत आभार आपका रवीन्द्र जी।

    प्रणाम
    सादर।

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  7. बहुत शानदार अंक! मान्यवर मेरी रचना को स्थान देने के लिए अत्यंत आभार! 🙏

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