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Wednesday, May 25, 2022

"पहली बारिश हुई धरा पर, मौसम कितना हुआ सुहाना" (चर्चा अंक-4441)

 मित्रों!

बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

देखिए कुछ अद्यतन लिंक।

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गीत "पहली बारिश का आना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

पहली बारिश हुई धरा पर,

मौसम कितना हुआ सुहाना।

देख घटाएँ आसमान पर,

दादुर गाते हैं गाना।।

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फटी पपेली-हुआ उजाला,

हुई सभी को हैरानी,

पहले आँधी चली जोर से,

फिर बरसा जमकर पानी,

बाँट रहा सुख जन-मानस को,

पहली बारिश का आना।

देख घटाएँ आसमान पर,

दादुर गाते हैं गाना।। 

उच्चारण 

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सत्र पर बस ध्यान दो 

क्या हुआ क्या रह गया ?
कौन क्या-क्या कह गया ?
जितने मुँह उतनी कथन,
मत किसी पर कान दो ।
सत्र पर बस ध्यान दो ॥ 

जिज्ञासा की जिज्ञासा 

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यह विकट घेरा बंदी का काल है! 

आज कहीं अखबार की कटिंग पढ़ी कि अब सोशल मीडिया पर शेखी बघारना मँहगा पड़ेगा. अव्वल तो बात खुद से जुड़ी लगी अतः थोड़ी घबराहट स्वभाविक थी. शेखी तो क्या हम तो पूरे शेख बने फिरते हैं सोशल मीडिया पर. अपनी शेखी भी ऐसी वैसी नहींकभी खुद को गालिब तो कभी खुद को बुद्ध घोषित कर जाना तो आम सी बात है. 

उड़न तश्तरी .... 

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बन जाओ गर राग प्रेम का 

खुद से दूर हुआ है जो भी 

तुझसे दूर रहा करता है, 

प्रेमी ही यदि खोया हो तो 

प्रियतम कहाँ मिला करता है !

मन पाए विश्राम जहाँ 

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अनुभव - जवान बने रहने का एक राज़ जवान बने रहने का एक राज़ यह भी है कि स्वयं को सक्षम बनाया जाए और जहां तक संभव हो किसी और के भरोसे न रहा जाए। किसी का मोहताज होना अर्थात स्वयं को कमजोर करना। जबकि स्वयं पहल करके अपने काम करना अर्थात स्वयं को मजबूत बनाना, अपने आप को शक्ति प्रदान करना। फिर चाहे कोई भी उम्र हो आप सदैव स्वावलम्बी रहेंगे, खुश प्रसन्न रहेंगे। 

एक बूँद 

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जन्मदिन पर धन्यवाद संदेश (Thanks for Birthday Wishes in Hindi) आपके द्वारा भेजी गई जन्मदिन की शुभकामनाएं, किसी भी गिफ्ट से बेहतर और किसी भी केक से मीठी है!

आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल 

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कब तक यूं ही 

कब तक यूं ही बात न हो  
साथ तो हो पर साथ न हो 
धरती अंबर से न बोले 
ऐसे तो कभी हालात न हो 

धूप भले फिर लाख जला ले 
छांव का सर पे हाथ न हो 
उखड़े उखड़े  दिन हो चाहे 
मायूस मगर ,  ये रात न हो  

आपका ब्लॉग 

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सुरेन्द्र मोहन पाठक की नवीन पुस्तक जल्द ही होगी रिलीज; सीधे किंडल पर किया जाएगा प्रकाशन  

नया थ्रिलर उपन्यास ब्लाइंड डील जिसके साथ पाठकों को एक विस्तृत लेखकीय और तीन अप्रकाशित कहानियाँ मिलेंगी केवल किंडल पर 10 जून 2022 से उपलब्ध होगा। पोस्ट के साथ उन्होंने एक पोस्टर  भी साझा किया  जिसमें उपन्यास का कवर और उपन्यास के विषय में यह जानकारी भी दर्ज थी। 

एक बुक जर्नल 

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जयंती विशेष: साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार प्राप्‍त अन्नाराम सुदामा, पढ़िए उनकी कहानी- ''सूझती दीठ'' राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार अन्नाराम सुदामा का जन्म 23 मई 1923 में हुआ था। सुदामा ने राजस्थानी भाषा में साहित्य की कई विधाओं में रचनांए की हैं। उन्होंने उपन्यास, कहानी, कविता, निबंध, नाटक, यात्रा स्मरण एवं बाल साहित्य लिखा है। उन्होंने अन्य कई विधाओं में 25 से ज्यादा पुस्तकें लिखी हैं।

ख़ुदा के वास्‍ते ! 

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धूप के गुलमोहर- ऋता शेखर 'मधु' यूँ तो यह लघुकथा संकलन मुझे लेखिका की तरफ़ से उपहार स्वरूप मिला मगर अपने पाठकों की जानकारी के लिए मैं बताना चाहूँगा कि बढ़िया कागज़ पर छपे इस 188 पृष्ठीय लघुकथा संकलन को छापा है श् वेतांश प्रकाशन ने और इसका मूल्य रखा गया है 340/- रुपए जो कि कंटैंट को देखते हुए मुझे ज़्यादा लगा। आने वाले उज्ज्वल भविष्य के लिए लेखिका एवं प्रकाशक को बहुत बहुत शुभकामनाएं। 

हँसते रहो 

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स्नेह की डोर (लघुकथा) साथ - साथ गिरते - दौड़ते, चौकड़ी भरते दोनों पिछले दो फागुन से एक दूसरे के जीवन मेंअपने स्नेह और अपनापन का रंग भर रहे थे। यह देख-महसूस कर उसका बाल मन अघा जाता कि पिता ने भी उन दोनों पर अपने प्राण निछावर कर दिए थे।  

मेरा फोटो

विश्वमोहन उवाच 

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बेरोजगारी 

विपक्ष के मंझे हुए एक नेता वर्तमान समस्या,समस्या के कारण और निवारण पर जनसभा में बोल रहे थे।

चीख चीख कर व्यवस्था की पोल खोल रहे थे।

जिंदाबाद का नारा बीच-बीच में  बुलंद हो रहा था।

प्रथम पंक्ति की भीड़ उत्तेजित  थी, पिछला पंक्ति सो रहा था।

 इसी बीच मुद्दा बेरोजगारी का आया। 

नेताजी ने इसे सभी समस्याओं का जड़ बताया। 

कहा,"अपराध" जैसी समस्या समाज में बेरोजगारी से आता है। 

Hindi Bloggers Forum International 

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Ek paigam premika ke naam | एक पैगाम प्रेमिका के नाम। 

मैं कल सोच रहा था कि तुम्हारे अलावा किसी  और को दिल दे सकता हूँ क्या? फिर सुबह से शाम हो गई और मैं सोचता ही रह गया, लेकिन किसी और का नाम जुबाँ पर नहीं आया। 

मेरे मोहब्बत की इंतिहा की तो तुम्हें दाद देनी ही पड़ेगी कि तुमसे दूर रहकर भी मैं तुम्हें हमेशा अपने पास महसूस करता हूँ।  

Nitish Tiwary 

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जुआ वैध या अवैध 

मैं अपने सुधी पाठकों से यह जानना चाहता हूँ कि क्या देश में जुआ खेलना वैध है अथवा अवैध। या फिर वैध और अवैध जुए के मध्य कोई विभाजक रेखा है? 
हमारे समाज में जुए का इतिहास बड़ा पुराना है।  महाभारत काल से भी पुराना। राजा नल अपना सबकुछ जुए में हार गए थे यह युधिष्ठिर से बहुत पहले की कहानी है। मेरा जिस जुए से प्रथम बार परिचय हुआ वह शायद गाँव में गोली-कंचों का अथवा पैसों का रहा। लोगों को खेलते देखा बस कभी कभार खुद भी खेला होगा कुछ याद नहीं। इस संदर्भ में मेरे पिता जी अति कठोर थे। फिर लोगों को ताश खेलते देखा किन्तु खेला कभी नहीं इतना स्पष्ट है। उन दिनों कभी कभी पुलिस जुआरियों के विरुद्ध कार्यवाही कर देती थी। फिर दौर आया लॉटरी का। सबसे अधिक परिष्कृत और सरकार के द्वारा संचालित। लाखों परिवार विनष्ट हो गए लॉटरी के चक्कर में।अन्ततः सरकार ने बन्द करा दिया। यद्यपि लॉटरी दो चार बार लेखक ने भी खरीदी।
लॉटरी बन्द हुई तो सट्टा शुरू हो गया। अभी चल रहा है। जब तब कार्यवाही भी होती है किन्तु परिणाम शून्य। अब तो सट्टा अन्तर्राष्ट्रीय हो गया है। 

मेरी दुनिया 

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आज के लिए बस इतना ही...!

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8 comments:

  1. बहुत ही शानदार लिंकों से सजी लाजवाब चर्चा प्रस्तुति...
    आदरणीय शास्त्री जी

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  2. रोचक लिंक्स से सुसज्जित चर्चा। हमारी पोस्ट को चर्चा में शामिल करने हेतु हार्दिक आभार।

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  3. सुप्रभात !
    सुंदर पठनीय सूत्रों से परिपूर्ण उत्कृष्ट अंक।
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार।
    सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

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  4. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. इस सुंदर प्रस्तुति की बधाई और आभार!!!

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  7. बेहतरीन रचनाओं के लिंक्स सुझाती सुंदर चर्चा ! आभार शास्त्री जी !

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  8. बहुत सुंदर चुनकर लगाए गए लिंक

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