चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Tuesday, January 07, 2014

पाक चाहता आप की, सेंटर में सरकार; चर्चा मंच 1485

मिले मुफ्त कश्मीर फिर, जम्मू अगली बार-

चली मिटाने सब्सिडी, भ्रष्टाचारी कोढ़ । 

माल मुफ्त में काट के, घी पी कम्बल ओढ़ ।। 


पाक चाहता आप की, सेंटर में सरकार । 

मिले मुफ्त कश्मीर फिर, जम्मू अगली बार॥ 


दक्षिण-पंथी घूरते, हर्षित दीखे वाम ।

कांग्रेसी संतुष्ट हैं, देख आप का काम ॥ 

---रविकर   

अमित श्रीवास्तव ....... " केहि विधि प्यार जताऊं "

निवेदिता श्रीवास्तव 

दर्द-ए-जिंदगी

Manav Mehta 'मन' 


स्वप्न (क्षणिका )

Asha Saxena 

एक ऐसा गांव जहां घरों में नहीं होते दरवाजे

Vineet Verma 
 

जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिवस

HARSHVARDHAN 

Treating chronic kidney disease using clay minerals: A new agent in the treatment of chronic kidney disease. © FIM Biotech GmbH

Virendra Kumar Sharma 
 

बालार्क की नवीं किरण

vandana gupta 

क्या नाम दूँ ऐसे रिश्ते को ???

Rewa tibrewal 
Love  

मानो इक ही कहानी का हक़दार था मैं...

Manav Mehta 'मन' 

'आप'के आने के बाद


Ghotoo

सफलता का कोई शॉर्ट-कट नहीं होता।

ZEAL
ZEAL 

"माता के उपकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 
 कई फूलों से चेहरे आ गये मेरी इबादत में...............दिनेश नायडू
yashoda agrawal 

 



कार्टून :- अब यह बेताल न कीला जाएगा ...काजल कुमार Kajal Kumar 
 Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून 
vedic mutiplication 3 digit
इंजीनियर शिल्पा मेहता
रेत के महल

"मयंक का कोना"

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 

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मधु सिंह : रह -रह कोई
तप्त वेग  धमनी का बन कर
बुला   रहा   है  रह-  रह  कोई
न्योछावर  में  पुष्प प्यार  के
चढ़ा  रहा  है   रह - रह  कोई

कभी गुलाब की पंखुड़ियाँ बन
कभी  एक  कलिका  बन कर
बढ़ा -  बढ़ा  अपनें  हाथो  को 
बुला  रहा  है   रह - रह  कोई.. 

मधु मुस्कान
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लघु कथा
(यह एक सत्यकथा है , परन्तु पात्रों का नाम बदल दिया गया गया है ) 
अनुभूति पर कालीपद प्रसाद -
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जाम भी ढल जाने दे 

ग़ाफ़िल की अमानत पर 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’
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मनोज शुक्ल का गीत 

यूँ न शरमा के नज़रें झुकाओ प्रिये, 
मन मेरा बाबला है मचल जायेगा. 
तुम अगर यूँ ही फेरे रहोगी नज़र, 
वक़्त है वेवफा सच निकल जायेगा...
Nirjhar Times पर Brijesh Neeraj 
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जजमेंटल... 
गुज़रे हो तुम सभी इसी दौर से कभी 
फिर नई नस्लों के लिए नई फ़सलों के लिए 
क्योंकर एकपक्षीय हो जाते हो 
क्यों जजमेंटल हो जाते हो...
लम्हों का सफ़र पर डॉ. जेन्नी शबनम
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ग़ज़ल - प्यार उनका मेरा... 

प्यार उनका मेरा अब है ठहरा हुआ 
था जो गंगो-जमन थार सहरा हुआ...
डॉ. हीरालाल प्रजापति
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हे भारत मत भूलो कभी 
ये गौरव –गाथा है 
तेरे ही सीता –सावित्री –दमयंती सी 
नारी के आदर्श अभी भी 
सर्वत्यागी नाथ शंकर उपासना करते है 
जी भर वो तुम्हारे हैं अभी भी 
मत भूलना तुम कभी भी...
BHARTI DAS
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आ कुछ दूर चलें,फिर सोचें 

काव्यान्जलि पर धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 
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सिर किसी की आँख फोड़ कर गया ... 
राह में चिराग छोड़ कर गया 
जो हवा के रुख को मोड़ कर गया 
क्योंकि तय है आज रात का मिलन 
जुगनुओं के पँख तोड़ कर गया...
स्वप्न मेरे... पर Digamber Naswa 
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"ज़िन्दग़ी की सलीबों पे चढ़ता रहा" 
उच्चारण
वन्दना वीणा-पाणि की पढ़ता रहा।

राह सुनसान थीआगे बढ़ता रहा।
वन्दना वीणा-पाणि की पढ़ता रहा।।

पीछे मुड़ के कभी मैंने देखा नही,
धन के आगे कभी माथा टेका नही,
शब्द कमजोर थेशेर गढ़ता रहा।
वन्दना वीणा-पाणि की पढ़ता रहा।।
उच्चारण

21 comments:

  1. बड़े ही सुन्दर सूत्र संकलित किये हैं।

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  2. रविकर सबकी सहायता करता है।
    --
    मंगलवार की सलोनी चर्चा के लिए आभार।

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  3. धन्‍यवाद जी कि‍ आपने कार्टून को भी सजाया

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  4. बड़े ही सुन्दर सूत्र .... आभार मुझे भी शामिल करने का ...

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  5. सुप्रभात मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |
    उम्दा सूत्र |

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  6. बहुत ही सुन्दर लिंक्स आदरणीय ..

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  7. सुंदर चर्चा सुंदर सूत्र ! आभार ! उल्लूक भी दिख रहा है कहीं !

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  8. सुन्दर सुन्दर कलेक्शन.....

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  9. आज की बेहतरीन प्रस्तुति व अच्छे सूत्र , आदरणीय रविकर सर व मंच को धन्यवाद
    नया प्रकाशन -: बच्चों के लिये मजेदार लिंक्स - ( Fun links for kids ) New links

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  10. sundar charcha.......inmay mujhe bhi shamil kiya apne abhar

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  11. लाये चर्चा मंच पे रविकर बढ़िया लिंक

    कह लो इसे इंडिआ इंक।

    सुन्दर सेतु चयन एवं समन्वयन। हृदय से आभार आपका हमारे सेतु समायोजन के लिए।

    ReplyDelete
  12. बेहद की उत्कृष्ट प्रासंगिक व्यंग्य रचना

    मिले मुफ्त कश्मीर फिर, जम्मू अगली बार-
    चली मिटाने सब्सिडी, भ्रष्टाचारी कोढ़ ।
    माल मुफ्त में काट के, घी पी कम्बल ओढ़ ।।

    पाक चाहता आप की, सेंटर में सरकार ।
    मिले मुफ्त कश्मीर फिर, जम्मू अगली बार॥

    तोड़ी झुग्गी झोपड़ी, खोदे बड़े पहाड़ ।
    घूम चुकी है खोपड़ी, फिर भी रहा दहाड़ ॥

    दक्षिण-पंथी घूरते, हर्षित दीखे वाम ।
    कांग्रेसी संतुष्ट हैं, देख आप का काम ॥

    बहुत बहुत शुभकामना, बना रहे ईमान ।
    कर मुस्लिम से दोस्ती, हिन्दू का भी ध्यान ॥

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  13. सुन्दर रचना... एक से बढ़कर एक लिंक...बहुत बढ़िया प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

    नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो

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  14. बहुत ही सुन्दर लिंक्स आदरणीय,एक से बढ़कर एक लिंक.आभार.

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  15. धन्यवाद ! मयंक जी ! मेरी रचना '' प्यार उनका मेरा अब है ठहरा हुआ ..........'' शामिल करने हेतु ।

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  16. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ....
    आभार!

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  17. सुन्दर सजीली चर्चा, बधाई...............

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