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Saturday, September 17, 2016

"अब ख़ुशी से खिलखिलाना आ गया है" (चर्चा अंक-2468)

मित्रों 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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कंधे से सटकर बैठने में बहुत सुख है... 

Pratibha Katiyar 
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अंग्रेजी भाषा के हम तो, खाने लगे निवाले हैं 
खान-पान-परिधान विदेशी, फिर भी हिन्दी वाले हैं 
अपनी गठरी कभी न खोली, उनके थाल खँगाल रहे 
अपनी माता को दुत्कारा, उनकी माता पाल रहे 
कुछ काले अंग्रेज, देश के बने हुए रखवाले हैं... 
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1949 के 14 सितम्बर को हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया लेकिन आज तक हिंदी अपना मुकाम हासिल नहीं कर पाई । हिंदी आज भी अपेक्षित-सी महसूस कर रही है । हिंदी के साथ अंग्रेजी को 15 वर्ष के लिए स्वीकार किया गया था । तब उम्मीद थी कि इतने वर्षों में हिंदी का प्रयोग हर क्षेत्र में होने लगा लेकिन वह अवधि हम कब की पार कर आए । अंग्रेजी आज भी हिंदी पर भारी पड़ रही है । स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि कई संस्थाएँ 14 सितम्बर को ' हिंदी डे ' मनाती हैं । हिंदी का अंग्रेजीकरण ज़रूरत से ज्यादा ही हुआ है । अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी में बात करना अपराध के समान है । अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी को जब विषय के रूप में पढ़ाया जाता है, तो इसे अंग्रेजी के माध्यम से ही पढ़ाया जाता है । मात्राओं का ज्ञान देने का नमूना देखिए - " आ has a मात्रा but अ does not have a मात्रा । " इस तरीके से पढ़े विद्यार्थियों को हिंदी का कितना ज्ञान होगा, इसका सहज ही अंदाज़ लगाया जा सकता है । अब प्रश्न यह है कि हिंदी की अवहेलना क्यों हो रही है ? हिंदी को सिर्फ़ हिंदी दिवस पर ही क्यों याद किया जाता है... 
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एक रहस्यात्मक पन्ना 

मेरी भावनायें...पर रश्मि प्रभा...  
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फेसबुकिया पोस्ट 

आप कितने उदार है। ज्ञान देते है, 
और हम लोग बड़े प्रेम से दो डब्बे बने बनाये स्माईल के डाल देते है। य
कीं नहीं होता मैंने अपने जीवन में इतनी सुंदरता से अभी हंसा होऊंगा। 
लेकिन बात क्या है न यहाँ का समाज तो 
कितना अच्छी तरह से बनता और बिगड़ता है, 
बनता है तो दूषित कहलाता है 
और बिगड़ता है तो प्रदूषित। ... 
प्रभात 
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हमे तो अब ख़ुशी से खिलखिलाना है 

सजन मिल आशियाना अब बसाना है 
हमें तो प्यार तुमसे ही निभाना है ... 
Ocean of Bliss पर 
Rekha Joshi 
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तेरे कूचे से हम जो गुज़रे 

तेरे कूचे से हम जो गुज़रे, ज़माना फिर से गुज़र गया। 
इक सूखा सा दरख्त कोई, हरा हो फिर से शज़र गया... 
अन्तर्गगन पर धीरेन्द्र अस्थाना 
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विजेंद्र और एकांत से 

महत्वपूर्ण कवि हैं शम्भु बादल 

शब्द सक्रिय हैं पर सुशील कुमार 
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वसुधैव कुटुम्बकम 

Image result for नक्शा दुनिया का
इतनी विशाल दुनिया में 
दूर दराज देशों में रहते लोग  
अनेक परिवेश 
जिनके भिन्नभाषाएँ हैं 
अनेक बात 
जब होती वसुधैव  कुटुम्बकम की... 
Akanksha पर Asha Saxena 
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या तो इस पार की या तो उस पार की 

अब तलक जो हुई सब थी बेकार की 
चाहिए बात हो अब ज़रा प्यार की... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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पंचकुला का कैक्टस पार्क 

कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
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हर भूले को राह दिखाना बनकर दीपक बाती-- 

ललित छंद 

टिक टिक करती घड़ियाँ बोलीं, 
साथ समय के चलना 
सोने से सो जाते अवसर, 
मिलता कोई हल ना .... 
मधुर गुंजन पर ऋता शेखर मधु  
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तब ही समझ तुम पाओगे..... 

पगतलियों के छालों को सहलाते भींचे लबों से 
जब कुछ गुनगुना पाओगे 
अश्रु छिपे कितने मुस्कुराती आँखों के सागर में 
तब ही समझ तुम पाओगे ... 
वाणी गीत  
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छोटे किसानों का बड़ा भला कर सकता है GST 

HARSHVARDHAN TRIPATHI 
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पगड़ी और कंगना होंगी आमने-सामने! 

Shivraj Gujar 
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पिंक पोएम 

अनिरूद्ध रायचौधरी की फिल्‍म 'पिंक' में यह प्रेरक कविता है। इसे तनवीर क्‍वासी ने लिखा है।फिल्‍म में अमिताभ बच्‍चन ने इसका आेजपूर्ण पाठ किया है। फिल्‍म के संदर्भ में इस कविता का खास महत्‍व है। निर्माता शुजीत सरकार और उनकी टीम को इस प्रयोग के लिए धन्‍यवाद। हिंदी साहित्‍य के आलोचक कविता के मानदंड से तय करें कि यह कविता कैसी है... 
ajay brahmatmaj  
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तेरी तो हर बात ग़ज़ल ... 

डा श्याम गुप्त ... 

तेरे दिन और रात ग़ज़ल, 
तेरी तो हर बात ग़ज़ल | 
प्रेम-प्रीति की रीति ग़ज़ल, 
मुलाक़ात की बात ग़ज़ल... 
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ध्वज हमारा 

Akanksha पर Asha Saxena 
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शुभदा वाजपेयी की रचनाएँ  
 कानपुर विश्वविद्यालय की स्नातक 
श्रीमती शुभदा वाजपेयी 
हिन्दी की श्रेष्ठ गीतकार ग़ज़लकार 
दोहाकार और मुक्तक लेखिका हैं... 
Sahityayan. साहित्यायन 
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"अच्छे दिन" और "काला धन" को 
जुमला कहे जाने पर भी 
जो आसक्त रहते है,  
हे तात कलि काल में 
उसे ही भक्त कहते है.. ----  
#साथी के #बकलोल वचन 
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हो गई पूजा  
याद पगी थी
तेरी खुशबू संग
ठुकराता क्यों ?

कहीं न गया
तुझे याद किया है
हो गई पूजा ।

आए थे याद
भूले-बिसरे पल
जिए दोबारा ।
साहित्य सुरभि 
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7 comments:

  1. सुन्दर शानिवारीय चर्चा ।

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  2. बढ़िया चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!

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  3. उम्दा चर्चा |बढिया संयोजन |मेरी दो लिंक्स आज देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ |इस हेतु आभार सहित धन्यवाद |

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  4. बढ़िया चर्चा

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  5. सुन्दर शानिवारीय चर्चा।

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  6. सुन्दर चर्चा, आभार हमारी रचना शामिल करने के लिए|

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  7. सुंदर मंच और प्रस्तुति।

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"सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819)

मित्रों! शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...