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Friday, September 23, 2016

"नेता श्रद्धांजलि तो ट्विटर पर ही दे जाते हैं" (चर्चा अंक-2474)

मित्रों 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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सरिता हूँ मैं 

१ 
जीवन मेरा 
समर्पित सिंधु को 
सरिता हूँ मैं 
२ 
पिघली बर्फ 
पर्वत से उतरी 
प्रवाहमयी 
३... 
Sudhinama पर sadhana vaid 
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हिंदी दिवस 2016 

हृदयपुष्प पर राकेश कौशिक 
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एक बहस 

होते है जब हमले तो दिल्ली इतना रोती है क्यों 
कश्मीर की घाटी में ही खून हमेशा बहती हैं क्यों 
राजनीति में ताने सीना खूब भाषण बाजी होती है 
आकाश में गंगा बहाने की इंद्र तक बातें चलती है 
रोज फाईव स्टार होटल में सितारों से बतियातें हैं 
हमारे नेता श्रद्धांजलि तो ट्विटर पर ही दे जाते हैं... 
प्रभात 
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कदम 

क़दमों का क्या गुनाह बिन पिये ए लड़खड़ाते हैं 
दो बूँद शराब की फिर से क़दमों में घुँघरू बंध जाते हैं 
नचाती हैं जब दुनिया बिन पिये ही ए बहक जाते हैं 
और संभलने को फिर से मयखाने चले आते हैं... 
RAAGDEVRAN पर MANOJ 

बेचैन निगाहें 

बेचैन निगाहें जनवरी का सर्द महीना था ,सुबह के दस बज रहे थे और रेलगाड़ी तीव्र गति से चल रही थी वातानुकूल कम्पार्टमेंट होने के कारण ठण्ड का भी कुछ ख़ास असर नही हो रहा था ,दूसरे केबिन से एक करीब दो साल का छोटा सा बच्चा बार बार मेरे पास आ रहा था ,कल रात मुम्बई सेन्ट्रल से हमने हज़रात निजामुदीन के लिए गोलडन टेम्पल मेल गाडी पकड़ी थी ”मै तुम्हे सुबह से फोन लगा रही हूँ तुम उठा क्यों नही रहे ”साथ वाले केबिन से किसी युवती की आवाज़ , अनान्यास ही मेरे कानो से टकराई, 
शायद वह उस बच्चे की माँ की आवाज़ थी... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 

भारतीय संस्कृति 

यहाँभारतीय संस्कृति में जीवन में सोलह संस्कार मनाये जाते हैं अर्थात सोलह बार परिवारीजन उसको होने का अहसास और वे हैं उसके लिये अभिव्यक्त करते रहते हैं कि आप हमारे हैं । भरतीय संस्कृति में उत्सव त्यौहार और संस्कार सबका नियमन केवल पारिवारिक रिश्तों को एक दूसरे को जोड़े घटाने के लिये हैं और इसमें विवाह सर्वाधिक महत्वपूर्ण है... 
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एक ग़ज़ल : 

निक़ाब-ए-रुख में.... 

निक़ाब-ए-रुख में शरमाना, 
निगाहों का झुकाना 
क्या ख़बर हो जाती है दिल को, 
दबे पाँवों से आना... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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हल्के लोग 

(कविता) 

हल्के लोग करते हैं 
सदैव हल्की ही बातें 
और करते हैं सबसे ये उम्मीद 
कि उनकी हल्की बातों को 
भारी माना जाए... 
SUMIT PRATAP SINGH 
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छोटा सा चाँद 

छोटा सा चाँद हो एक लम्बी सी चंदनिया 
तारों की बारात में रात हो दुल्हनियां 
हो झुमके परिजात के हवाओं की हो डोलियां 
जुगनू के दीपक हो झिंगुर की हो बोलियां 
किरणों की मेखला बादलों में हो बिजलियां 
आओ सपनों से शब्द बुने भावों से रंग चुने 
कहाँ हो सजनिया 
Mera avyakta पर 
राम किशोर उपाध्याय 
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सोचता था लिखूँ तुझको उन्वान कर 

तू मना कर दिया जाने क्या जानकर 
सोचता था लिखूँ तुझको उन्वान कर 
पा लिया मैं ख़ुशी उम्र भर की सनम 
दो घड़ी ही भले तुझको मिह्मान कर ... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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3 comments:

  1. बहुत बढ़िया सूत्र संकलन आज के चर्चामंच में ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी !

    ReplyDelete
  2. सुन्दर शुक्रवारीय प्रस्तुति ।

    ReplyDelete
  3. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति
    आभार!

    ReplyDelete

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