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Tuesday, September 06, 2016

"आदिदेव कर दीजिए बेड़ा भव से पार"; चर्चा मंच 2457


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योग्य धनुर्धर होने को 
हो पूर्ण ध्यान निशाने पर 
लक्ष्य भेदन तभी संभव 
जब एकाग्र हो मन  निरंतर
शिक्षा थी गुरू की यही... 
Akanksha पर Asha Saxena 
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दोहे 

"आदिदेव कर दीजिए बेड़ा भव से पार" 

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

poet kavi 

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युग का दास - 

लघुकथा 

मधुर गुंजन पर ऋता शेखर मधु 

किताबों की दुनिया -127 

नीरज गोस्वामी 

समय को मत समझाया कर 

किसी को एकदम उसी समय 

सुशील कुमार जोशी 

खुमान, मुक्तिबोध और दिवाकर 

संजीव तिवारी 

आ गया -  

स्मार्टफ़ोनों का बाप आ गया! 

Ravishankar Shrivastava 

मांग भरने की प्रथा के प्राचीन प्रमाण 

ब्लॉ.ललित शर्मा 

चीन यात्रा - ११ 

Praveen Pandey 

क्रोध बनाम सौंदर्य - 

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shashi purwar 

तुम रुको,.. 

Priti Surana 

नारी सशक्तिकरण .. 

mridula pradhan 

इसलिए मै टूट गया …..फेसबुक 

yashoda Agrawal 

आधुनिकता 

Gopesh Jaswal 

भली करेंगे राम, भाग्य की चाभी थामे 

रविकर 
(1)
माने मूरख स्वयं को, यदि मूरख इंसान। 
निश्चय ही वह बन सके, मूरख से विद्वान्। 
मूरख से विद्वान्, सुनी हैं कई कथाएं।
लेकिन यदि विद्वान्, स्वयं को विज्ञ बताएं।
कह रविकर विद्वान, उक्ति कह गये सयाने।
बन सकता वह मूर्ख, बदल फिर जाए माने।। 

7 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. परिश्रम के साथ की गयी स्तरीय चर्चा।
    आपका आभार आदरणीय रविकर जी।

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  3. सुप्रभात
    उम्दा लिनक्स
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सर |

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  4. सुन्दर मंगलवारीय अंंक । आभार 'उलूक' का रविकर जी उसके सूत्र 'समय को मत समझाया कर किसी को एकदम उसी समय' को स्थान दिया ।

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  5. सुन्दर चर्चा प्रस्तुति
    आभार!

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  6. गणेशोत्सव की सभी पाठकों को हार्दिक बधाई ! सुन्दर सार्थक सूत्रों से युक्त आज की चर्चा में मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी !

    ReplyDelete
  7. @ये दुनिया किसी के बगैर अधूरी नहीं होती..................पर

    ReplyDelete

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