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Saturday, February 22, 2014

"दुआओं का असर होता है" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1531

 जो मंजिल तक पहुंचा दे वही सफ़र होता है
सिर्फ दीवारों से नहीं कोई घर होता है

करिश्मा होने को तो सब कुछ हो सकता है
साहिल तक पहुँचाने वाला भी भंवर होता है

यह दुनियां जो कहलाता है मुसाफिर-खाना
आना-जाना तो यहाँ सब का मगर होता है

नाचते रहते हैं सभी घनचक्करों की तरह
शहनाई बजती इधर, मातम उधर होता है

जख्म मिलते रहते हैं,अपनों से,बेगानों से
इनको भरने में दुआओं का असर होता है 
(साभार : राजेंद्र निशेश)    
 नमस्कार  !
मैंराजीव कुमार झा
चर्चामंच चर्चा अंक : 1531  में
कुछ चुनिंदा लिंक्स के साथ, 
आप सबों  का स्वागत करता हूँ.  
--
एक नजर डालें इन चुनिंदा लिंकों पर...
 हाइकू (सुख के पल ) 
आशा सक्सेना
 
सुख के पल 
ठहर गए होते
दुःख ना होता  |
ये राजनीति जानी तो इसी रास्ते थी
हर्षवर्द्धन त्रिपाठी      

आखिरकार कम से कम बोलने वाले हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी बोल ही पड़े। बोल रहे हैं कि राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई का फैसला सही नहीं है। 
सुमन

कल कूड़े कचरे पर सतीश सक्सेना जी की लिखी रचना पढ़ रही थी, उनकी रचना ने मुझे इस लेख को आप तक पहुँचाने के लिए प्रेरित किया आभार सतीश जी ! कूड़ा कचरा आज हमारे महानगरों में एक भयावह समस्या बनती जा रही है !

                                                                     प्रीति----स्नेह     
मेरा दिल कमजोर नही हमदर्द
तुम क्या जानो बेरुखी का दर्द

कैसे सहता है दिल अनदेखा होना

 सेहतनामा
वीरेन्द्र कुमार शर्मा  

 (१) अध्ययनों से विटामिन D के निम्नतर स्तर (शरीर में इस विटामिन कमी )और अवसाद में परस्पर एक अंतर -सम्बन्ध की पुष्टि हुई है। आधा घंटा धूप में बिताइये। 
प्रतिभा सक्सेना       
 मेरा फोटो
सिहर उठी सृष्टि 
धुरी पर घुमते पिण्ड सहम गए 
 
फूलो की घाटी के नाम से प्रसिद्ध इस घाटी में फूल तो हमें कुछ खास देखने को नही मिले । इसका कारण था मौसम । हम जिस मौसम में आये थे उसके बाद बरसात आती है और तभी ये फूल ज्यादा खिलते हैं ।
मेरा फोटो
मन में विचारों की आँधी चली,
लेखक का जीवन खंगाला गया
धर्म की पड़ताल हुई
गोत्र पर भी चर्चा हुई

कालीपद प्रसाद           
छोटा सुदर्शन अवोध शिशु
माँ के गोद में लेटा निश्छल शिशु
कभी मुस्कुराता है
कभी जोरजोर से रोता है
Rajeev Kumar Jha    

A Solitary rose stood aloof
In a garden of gorgeous
Bloom, in ostentatious extravaganza
The crimson rose, clad in
एक धारा
रजनीश तिवारी      


एक धारा 
बहती हुई 
रेत पत्थरों के समंदर में 
 
सारे धर्म ग्रन्थ सिखलाएँ , प्रेम से रहना मानव को !
राजनीति के चश्में फेंको,पढ़िए वेद कुरआन वही है !

My Photo
तिल तिल कर कातिल मरे, बचे नहीं दुर्दांत | 
लूलू लूला लचर लॉ, रहा लबलबा प्रांत |
दिनेश प्रजापति  
      क्लाउड कम्यूटिंग
विभा रानी श्रीवास्तव      

अपने हिस्से का दुःख खुद झेलते हैं
खुशियों को दुसरे का मोहताज़ क्यूँ बनायें 

My Photo
लेकिन कृष्ण ‘मल्टी डायमेंशनल’ हैं.ऐसा आदमी जमीन पर खोजना कठिन है,जो कृष्ण में प्रेम करने योग्य तत्व न पा ले.----कृष्ण एक आरकेस्ट्रा हैं.जिन्होंने भी प्रेम किया उन्होंने कृष्ण में चुनाव किया है’. (ओशो)

           आलोक रंजन            
हमारे नीतीश भैया ने विश्व का सबसे लंबा मुफ़तिया 'वाई-फ़ाई ज़ोनबना के नाम तो कमा लिया गुरुजी ! कम से कम अहिए बहाने उनका नाम तो चमकेगा और राजनीति का दू–एक दिन भी भटकेगा ।
      विजयलक्ष्मी           
समेटते है सामाँ ए मुहब्बत जब भी दीवाने से हुए हम ,
क्यूँ खींचकर दामन गिरा जाते हो अपने हाथो से सारा ,
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"उम्र तमाम हुई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनों की रखवाली करते-करते उम्र तमाम हुई।
पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।। 
धन्यवाद !
आगे देखिए-
"कुछ अद्यतन लिंक"
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
--
समझदार लोग़ 
मील के पत्थरों को हटाते हुए ही 
आगे जाते हैं 

उल्लूक टाईम्स पर सुशील कुमार जोशी

--
मुझे दोस्तों से मिला... 

मुझे दुश्मनी का शौक़ है ॥ 
मुझे प्यार से तू देख मत 
 मुझे बेरुख़ी का शौक़ है... 
डॉ. हीरालाल प्रजापति
--
इससे खूबसूरत पश्चाताप और कोई नहीं … 

कहीं कुछ मेरे स्वभाव के विपरीत हुआ 
मैंने ओढ़ ली चुप्पी की चादर 
जबकि मुझे बोलना था … 
मेरा मन बोल भी रहा था 
बोलता ही है- समय-असमय 
मैं सुनती रहती हूँ...
मेरी भावनायें...पर रश्मि प्रभा...
--
नेटवा बैरी …… 

झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव

--
बोलो बसंत 

उजड़े को सँवारते हो 
नाउम्मीदी से भरे दिलों में  
उम्मीद की किरण जगाते हो.…  
इसीलिए,,, 
बसंत--- तुम..... ऋतुराज कहलाते हो..... 
My Expression पर 
Dr.NISHA MAHARANA 
--
कुछ दोहे 
बदली संस्कृति सभ्यता, बदला है अंदाज ।  
संबंधो पर गिर रही, परिवर्तन की गाज...
दास्ताँने - दिल  

(ये दुनिया है दिलवालों की) 
पर 
अरुन शर्मा अनन्त 

--
"दोहागीत-लोकतन्त्र का रूप” 
बात-बात पर हो रही, आपस में तकरार।
भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार।।
(१)
बेकारी में भा रहा, सबको आज विदेश।
खुदगर्ज़ी में खो गये, ऋषियों के सन्देश।।
कर्णधार में है नहीं, बाकी बचा जमीर।
भारत माँ के जिगर में, घोंप रहा शमशीर।।
आज देश में सब जगह, फैला भ्रष्टाचार।
भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार...
उच्चारण
--
कार्टून :-  
तुम अपना अण्‍णा मुझे दे दो... 

काजल कुमार के कार्टून

23 comments:

  1. सुप्रभात
    चर्चा बहु आयामी |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |

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  2. बहुत मेहनत से सजाई है आज की चर्चा राजीव । उल्लूक का सूत्र " समझदार लोग़ मील के पत्थरों को हटाते हुए ही आगे जाते हैं" शामिल किया आभार ।

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  3. सार्थक लिंकों के साथ श्रम के साथ लगाई गयी चर्चा।
    आदरणीय राजीव कुमार झा जी आपका आभार।

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  4. सुन्दर, रोचक और पठनीय सूत्र,राजीव कुमार झा जी आपका आभार।

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  5. सार्थक लिंक्स से सजा बहुरंगी चर्चा मंच ! शानदार प्रस्तुति !

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  6. बहुत सुन्दर सूत्रों से आज की चर्चा सजाई है राजीव भाई .. बहुत आभार.

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  7. सुन्दर -
    आभार भाई जी-

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  8. अच्छी प्रस्तुति , मंच व राजीव भाई को धन्यवाद
    information and solutions in Hindi

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  9. सार्थक लिंक्स से सजा सराहनीय प्रस्तुति
    मुझे मान और स्थान देने के लिए
    आभारी हूँ
    धन्यवाद

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  10. पठनीय सूत्र मिल गये आपकी चर्चा में ....
    चर्चा - मंच में सम्मिलित करने के लिये आभार ....

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  11. राजीव जी बहुत ही सुन्दर लिंक संजोये हैं आपने, आदरणीय श्री शास्त्री सर मेरी रचना को स्थान देने हेतु हृदयतल से हार्दिक आभार आपका.

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  12. bahut sundar links ....thanks nd aabhar ......

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  13. बड़े ही रोचक और पठनीय सूत्र..

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  14. बहुत बेहतरीन लिंकों के चयन के साथ सुन्दर प्रस्तुतिकरण, धनयबाद।

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  15. सभी लिंक एक से बढ़कर एक शानदार है। मेरी प्रविष्टि शामिल करने के लिए आभार।

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  16. धन्यवाद ! मयंक जी ! मेरी रचना ''मुझे दोस्तों से मिला... '' को सम्मिलित करने हेतु

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  17. राजीव जी,
    बहुत बहुत आभार आपका !

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  18. हाइकू (सुख के पल )
    आशा सक्सेना

    सुख के पल
    ठहर गए होते
    दुःख ना होता |सुन्दर है हाइकू

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  19. Virendra Sharma
    भले ये सबके साथ। एक प्रतिक्रिया ब्लॉग :

    http://sumanpatil-bhrashtachar-ka-virus.blogspot.in/2014/02/blog-post_977.html

    हमारे महानगरों में कूड़ा कचरा एक भयावह समस्या …


    कल कूड़े कचरे पर सतीश सक्सेना जी की लिखी रचना पढ़ रही थी, उनकी रचना ने मुझे इस लेख को आप तक पहुँचाने के लिए प्रेरित किया आभार सतीश जी ! कूड़ा कचरा आज हमारे महानगरों में एक भयावह समस्या बनती जा रही है ! कचरा किसी के लिए व्यर्थ की चीज है तो किसी के लिए अनर्थ और किसी के लिए जीवन जीने के लिए उपयोगी है ! कैसे आईये इस लेख द्वारा जानते है ! इस लेख को लिखा है न्यूयार्क के एक लेखक ने नाम है एंड्रूऑडो पोर्टर ने और हम तक पहुंचाया है ओशो प्रेमी अनिल सरस्वती ने ! अनिल जी, अगर आप मुझे पढ़ रहे है तो आभार इस महत्वपूर्ण लेख के लिए !

    पोर्टर लिखता है … "मै एक लेखक हूँ, मेरी अच्छी खासी आय है, मेरे पास सुविधाओं का भंडार है ! बस कमी है तो एक चीज की, वह है समय ! मेरे घर में उपयोग के बाद बहुत सी प्लास्टिक और कांच की बोतले जमा होती रहती है जिन्हे मै सुपर मार्केट में जाकर लौटा सकता हूँ और बदले में मुझे मिलेंगे ५ सेंट प्रति बोतल ! यदि मै बीस बोतलें लौटाता हूँ तो एक डॉलर मिलता है ! अब जितना समय मै इन बोतलों को जाकर लौटाने में लगाउंगा उससे कही अधिक मूल्य का समय गँवा दूंगा ! मै इन बोतलों को कचरे में फ़ेंक देता हूँ ! इस कचरे को उठवाने के लिए मै नियमित रूप से पैसे देता हूँ ! जहाँ मेरे लिए प्लास्टिक की बोतलों का कोई मूल्य नहीं वही भारत में कचरा बीनने वाले बच्चे के इन दो रुपये प्रति बोतल से भरी एक बोरी बड़ी मूलयवान है क्योंकि आज उसने अपना खाना नहीं खाया है "!
    पोर्टर आगे लिखता है "जहाँ नार्वे के निवासी अपने कचरे को उठवाने और उसे छांटने के लिए ११४ डॉलर प्रति टन भुगतान करने के लिए तैयार वही बहुत से देशों के किसान इस कचरे को अपने खेतों में खाद की भांति उपयोग करने के लिए पैसे देते है !"
    तारा बाई एक दस वर्षीय बच्ची है जो मुम्बई के कूड़ेदानो से प्लास्टिक और धातुओं से बनी चीजों को इकठ्ठा करती है ! जब उससे पूछा गया कि क्या उसे अपने काम से नफरत है तो वह गुस्से से सर हिलाती हुई बोली, 'नफरत का सवाल ही नहीं है, मै इस काम के कारण जिन्दा हूँ !"
    तारा एक किसान की बेटी है ! उनके गांव में आयी बाढ़ से बर्बाद हो वे मुंबई आ गए पर भीख मांगना गंवारा न था तो उसका परिवार कचरा बीनने लगा ! कचरे के ढेरों में रेंगते कीड़ों के बीच से उठाना होता है उन्हें अपनी आजीविका का साधन !
    कोई नहीं जानता भारत में कितने कचरा बीनते बच्चे है ! मात्र राजधानी दिल्ली में ३००००० कचरा बीनने वाले है ! यह आठ घंटा काम करके ५० से १०० रुपये तक कमाते है ! इनके अधिकारों के लिए काम करने वाली एक संस्था चिंतन के अनुसार वे दिल्ली नगर पालिका के ६००००० रुपये प्रतिदिन बचाते है ! जो काम प्रशासन को करना चाहिए वह बच्चे कर रहे है ! अपने आजीविका के लिए काम कर रहे यह बच्चे ५० रुपये प्रतिदिन कमाने के लिए प्रत्येक दिन एक भयावह जीवन जीते है ! इन्हे अपनी चपेट में लेने वाले रोगों की सूचि में कैंसर,दमा,टीबी और चर्म रोग शामिल है !
    इस असहनीय कार्य से पैदा हुए प्रभाव को कम करने के लिए यह बच्चे कच्ची आयु में ही धूम्रपान, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने लगते है !
    अब इन कचरा बीनते बच्चों के पास कोई चुनाव नहीं है ! उन्हें जीवित रहने के लिए अपने जीवन को खतरे में डालना अनिवार्य है ! लेकिन पोर्टर और हम में से वे लोग जिनके पास चुनाव सुविधा है, अपने प्रयास कर सकते है !
    भारत के महानगरों में घरों से निकलने वाला कचरा एक भयावह समस्या बनता जा रहा है!
    मुंबई का सबसे बड़ा कचरा संग्रह देवनार कचरा स्थल पर होता है ! ११० हेक्टेयर में फैली इस जगह पर ९२ लाख टन कचरे का ढेर लगा है ! मुंबई के घरों से हर रोज १०००० टन कचरा निकलता है !
    देवनार इलाके के पास बसी बस्तियों में प्रत्येक १००० से ६० बच्चे जन्म लेते ही मर जाते है ! बाकी मुंबई में यह औसत ३० बच्चे प्रति हजार है ! इसके पास रहने वाले लोग मलेरिया, टीबी, दमा और चर्म रोगों से ग्रसित रहते है !
    राजधानी दिल्ली भी इससे पीछे नहीं है ! १९५० से लेकर आज तक यहाँ १२ बड़े कचरे संग्रह स्थल बनाये जा चुके है जिनमे लाखों टन कचरा जमा है ! एक जगह पर कचरे का ढेर सात मंजिला ऊँचा है ! इनमे कचरा जमा करने की क्षमता तेजी से घट रही है !
    भारत में बढती हुयी जनसँख्या और विकास दर के साथ यह समस्या एक विकराल रूप लेती जा रही है !
    भारत में २०२० तक जनसंख्या का अनुमान … १,३२,०००००० लोग ! भारत में प्रत्येक व्यक्ति आधा किलो कचरा रोज उत्पन्न करता है ! इस गणित से पूरा भारत हर दिन २०२० में ६,६०,००० टन कचरा पैदा करेगा यह सारा कचरा कहाँ जायेगा किसी को कोई अनुमान नहीं !

    "सुरभित सुमन"

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  20. --
    "दोहागीत-लोकतन्त्र का रूप”

    बात-बात पर हो रही, आपस में तकरार।
    भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार।।
    (१)
    बेकारी में भा रहा, सबको आज विदेश।
    खुदगर्ज़ी में खो गये, ऋषियों के सन्देश।।
    कर्णधार में है नहीं, बाकी बचा जमीर।
    भारत माँ के जिगर में, घोंप रहा शमशीर।।
    आज देश में सब जगह, फैला भ्रष्टाचार।
    भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार...
    उच्चारण

    सटीक कटाक्ष हमारे राजनीति के जोकरों पर।

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  21. कुछ बे -रोज़गारों को मिल जाएगा सीटी बजाने का काम ,सीटी बजाओ रोज़गार योजना का श्री गणेश करेंगे राजनीति के प्रखर धंधेबाज़ श्रीयोजना लालजी।

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  22. राजीव कुमार झा जी बढ़िया सेतु सजाये हैं आप हमको भी बिठाये हैं। आभार हम लाये हैं।

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  23. मेरी कृति को आपने स्नेह दिया, इसके लिए हृदय से आभार.

    शुभकामनायें

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...