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Tuesday, April 13, 2021

"काश में सोलह की हो जाती" (चर्चा अंक 4035)

सादर अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का स्वागत है। 

(शीर्षक आदरणीया बीना सिह जी की रचना से )

क्या खूब लिखा है बीना जी ने 

"काश में सोलह की हो जाती" 

एक बार तो ये ख्याल सभी को आता ही है... 

क्यूँ है न ?

मगर इन दिनों तो ये ख्याल आ रहा है... 

"काश, हमारे पुराने दिन लौट आते"

माहौल बड़ा गमगीन हो रखा है या यूँ कहे ये मुये "कोरोना" ने डरा रखा है.. 

तो आज,

 थोड़ी देर के लिए घर से नहीं इस डर के माहौल से निकलते हैं... 

और कुछ प्रेम-गीत गुनगुनाते हैं ..... 

कुछ प्रेम पाती का आनंद उठाते हैं...

थोड़ा माँ को भी याद करते हैं... 

 शायद, थोड़ी देर के लिए ही सही सुकून आ जाये 

साथ ही साथ कुछ आमजनों से रूबरू होते हैं... 

और  थोड़ी  देश दुनिया की भी खबर लेते हैं....

तो चलिए,आज की कुछ खास रचनाओं का आनंद उठाते हैं.....

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 दोहे  

"खान-पान में शुद्धता, सिखलाते नवरात्र" 

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

करिये नियम-विधान से, नौ दिन तक उपवास। 
जगदम्बा माँ आपकी, पूर्ण करेंगी आस।। 

शुद्ध आचरण में रहेउज्जवल चित्र-चरित्र। 
प्रतिदिन तन के साथ मेंमन को करो पवित्र।। 
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काश में सोलह की हो जाती, और वह बीस का हो जाता। 

प्रेम पाती 
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काश में सोलह की हो जाती
और वह बीस का हो जाता
बन जाती मैं उसकी नायिका
 और वह मेरा नायक हो जाता

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'सिर्फ मेरे प्रेम पर ही सवाल क्यों?'-  मारीना 
 कल रात मारीना फिर आई. मुझे मालूम था वो आएगी. 
हम देर तक बात करते रहे. हालाँकि वो खामोश थी. 
लेकिन अब हम दोनों ने शब्दहीनता में संवाद करना सीख लिया है.
 मैंने उसकी कलाई अपने हाथ में लेते हुए पूछा, 'उदास हो?'
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वहीं रहना
यही तो है, जो, बांधता है मुझको,
वेधता है, संज्ञाशून्ताओं को,
समझने की कोशिश में, तुझको सोचता हूँ,
लकीरों में, बुनता हूँ तुम्हें ही,
मिथक हो, या कितना भी पृथक हो,
पर, लगते सार्थक से हो!
शायद, जब तलक कल्पनाओं में हो!
आम आदमी
अपने आप से
जूझता 
छली जा रही 
घटनाओं से बचता
घिसट रहा है
कचरे से भरे बोरे की तरह
समय की तपती 
काली जमीन पर
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नदी ढूंढ लेती है अपना मार्ग 

सुदूर पर्वतों से निकल 

हजारों किलोमीटर की यात्रा कर 

बिना किसी नक्शे की सहायता के 

और पहुँच जाती है 

एक दिन सागर तक 

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एक सच ऐसा भी (क्या हो गयी है तासीर जमाने की ) 
धूल में सने हाथ कीचड़ से धूले पाँव , चेहरे पर बिखरे से बाल धब्बे से भरा हुआ चाँद , वसन से झांकता हुआ बदन पेट ,पीठ में कर रहा गमन ---------------------------
लॉयड के एसी के विज्ञापन में दीपिका-रणवीर
पत्नी रूपी दीपिका अपने ''बेबी पति'' को नया एसी दिखा 
उसके गुणों का बखान करती है ! 
बैक्टेरिया वगैरह की बात करते हुए उसके हाथ सेनिटाइज करती है 
और फिर उसका वह बाहर से आया ''बेबी पति'' 
अपने जूतों समेत सोफे पर पसर जाता है ! 
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आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दें 
आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
मातारानी हम सभी पर अपनी कृपा बनाये रखें 
यही कामना करती हूँ। 
कामिनी सिन्हा 
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15 comments:

  1. नूतनवर्षाभिनंदन...
    नवीन वर्ष के नूतन पल से माँ अम्बे सबका कल्याण करे...

    जगतनियन्ता सबको शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि प्रदान करे...

    शक्ति आराधना पर्व चैत्र नवरात्रि पर माँ दुर्गा की स्नेहदृष्टि आप सब पर बनी रहे...

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  2. शानदार प्रस्तुति।

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  3. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आप सबको भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएँ।
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

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  4. वाह वाह खूब ढूँढ़ कर लिंक लगाये

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  5. उम्दा कहरच, कामिनी दी।

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  6. नवरात्रि के पवन पर्व पर सभी पाठकों एवं रचनाकारों को शुभकामनाएं, रोचक भूमिका व पठनीय रचनाओं की खबर देते सूत्र, आभार !

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  7. प्रियकामिनी जी, नमस्कार ।
    बेहतरीन सूत्रों से सजा चर्चा अंक की सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक शुभकामनाएं, मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपको मेरा नमन एवम वंदन । नवरात्रि के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं एवम बधाई ।

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  8. बहुत बढ़िया लेख ! आप सभी को नवरात्री व भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  9. बहुत बढ़िया लेख ! आप सभी को नवरात्री व भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  10. बहुत सुंदर और संग्रहणीय संकलन। बधाई कामिनी जी।

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  11. बहुत सुंदर चर्चा

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  12. चर्चा मंच पर उपस्थित होने के लिए आप सभी स्नेहीजनों का हृदयतल से धन्यवाद एवं सादर अभिवादन

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  13. बेहतरीन संकलन, सुंदर सार्थक प्रस्तुति।
    सभी लिंक बहुत सुंदर।सभी रचनाकारों को बधाई।

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति कामिनी जी । सभी रचनाकारों को बधाई ।

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  15. आपका हार्दिक आभार ।विलम्ब हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ

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