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Thursday, September 23, 2021

'पीपल के पेड़ से पद्मश्री पुरस्कार तक'(चर्चा अंक-4196)

सादर अभिवादन। 

गुरुवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

 यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ कि राजस्थान के नागौर निवासी आदरणीय हिमताराम भाम्बू जी को  अब तक लगभग साढ़े पांच लाख पेड़-पौधे लगाने का कीर्तिमान स्थापित करने पर भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित अलंकरण 'पद्मश्री' प्राप्त हुआ है। श्री हिमताराम जी की जीवनभर की साधना को सरकार की नज़र में लाने वालों का बहुत-बहुत धन्यवाद। विचारणीय बिंदु है कि राजस्थान के मरुस्थली इलाक़े में लोगों के लिए छाँव और पर्यावरण के लिए हरियाली और शुध्द हवा एक ऐसे व्यक्ति का मिशन बना जो कोई विशेषज्ञ नहीं है बल्कि एक साधारण पुरुष है जो अब अपने विराट संकल्प के चलते असाधारण पुरुष में तब्दील हो गए हैं। प्रकृति भी ऐसे पर्यावरणप्रेमी की ऋणी हो जाती है। प्रेरणा लेने वालों के लिए श्री हिमताराम जी बेमिशाल उदाहरण हैं। 

चर्चामंच परिवार की ओर से आदरणीय हिमताराम भाम्बू जी को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।  

-अनीता सैनी 'दीप्ति'

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-

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पीपल के पेड़ से पद्मश्री पुरस्कार तक प्रकृति प्रेमी हिमताराम जी भाम्बू

दादी के साथ  एक पीपल का पेड़ लगाने वाले  हिमताराम  भाम्बू ने अब तक लगभग साढ़े पांच लाख पेड़ पौधे लगाकर एक रिकॉर्ड बनाया है, तथा 2020 में भारत के महामहीम राष्ट्रपति  श्री रामनाथ कोविंद जी द्वारा पद्मश्री पुरस्कार (अवार्ड) प्राप्त किया है। ये हमारे परिवार गोत्र के लिए तो गौरव की बात है ही साथ ही साथ हमारे पुरे देश के लिए गर्व की बात है
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जीवन के पथ में मिले, जाने कितने मोड़।
लेकिन में सीधा चला, मोड़ दिये सब छोड़।। 

पग-पग पर मिलते रहे, मुझको झंझावात।
शह पर शह पड़ती रहीं, मगर न खाई मात।।
मेरे पड़ोसी
लगा रहे हैं आँगन में दीवार
बाँट रहे हैं आँगन
मजबूत हो रही है हमारे बीच
यह दीवार ।
मैं उन पैरों के बारे में
सोचता हूँ
जिनकी इसने रक्षा की है
और
श्रद्धा से नत हो जाता हूँ
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बहुत गर्मी है आज,

सूरज चिलचिला रहा है,

हवाएं ख़ामोश हैं,

पत्ते गुमसुम,

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गीता

सत् के आधार पर ही 

असत् की नौका डोलती है 

कभी दिखती 

कभी हो जाती ओझल 

खुद अपना भेद खोलती है 

विशालकाय तारे भी 

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एक रोज़ तुम्हें बताऊँगा..

क्यूँ गुज़रे लम्हों की हर एक यादें
एक तेज छुरी सी चमकती है
फिर क्यूँ प्रणय मिलन से डरता है मन 
मैं तुम्हें  किसी रोज बताऊंगा
मत समझो बेटियों को भार, 
    यहीं है हमारे जीवन का आधार!! 

7) सूरज तो सिर्फ़ दिन में रोशनी देता है... 
   पर बेटियां तो पूरा जीवन, 
  घर को रोशनी से भर देती है!! 
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वह चली गई ना रुकी   
 न रुकना चाहा
ना ही रोकने का मन बनाया  
कैसे बताता
मेरा  मन ही बैरी हुआ |
लतिका अपने आप में एक मिसाल थी। रामजी ने जोड़ा भी, सोच-समझ कर ही बनाया था। एक भरे-पूरे घर की बहू, एक यशस्वी डॉक्टर की पत्नी, दो भाग्यशाली बच्चों की ममतामयी माँ और अपनी गहस्थी के प्रति एकदम जागरूक। बात-बात में हँँसती-खिलखिलाती। ओंठों पर लिपस्टिक की जगह मुस्कान का लेप लिपटाती लतिका ने जिस तरह अपने सुहाग डॉक्टर कमल के जीवन में बारहों मास बसन्त बना रखा है उसके तो क्लबों और परिवारों में उदाहरण दिए जाते थे। शहर में डॉक्टर तो पचासों थे पर अकेले डॉक्टर कमल और लतिका का जोड़ा वह जोड़ा था जिसके फोटो यार-दोस्तों और कमल बाजार की दुकानों में देवी-देवताओं की जगह लगे हुए थे। लोग जितनी चर्चा डॉक्टर कमल की करते थे उतनी ही लतिका की भी करते थे। कहने वाले तो यहाँ तक कहते थे कि डॉक्टर कमल की जिन्दगी में जब से लतिका आई है, देख लो कितना कुछ बदल कर परिवार कहाँ से कहाँ पहुँचा है! एक-एक का पग-फेरा है साहब!
इस दर्शनीय फ़िल्म की सबसे बड़ी ख़ूबी तो इसकी विषय-वस्तु ही है जो न केवल शिकारियों एवं लालची व्यापारियों की क्रूरता को दर्शाती है वरन वन्य जंतुओं के संरक्षण की आवश्यकता पर सार्थक एवं मनोरंजक ढंग से प्रकाश डालती है। प्रकृति के अंगों के रूप में वनस्पति तथा जीव-जंतुओं का सौंदर्य सम्पूर्ण फ़िल्म में बिखरा पड़ा है। इस सौंदर्य को रजतपट पर उतारने में छायाकार ने कमाल कर दिखाया है। ऐसा एक-एक दृश्य नयनों को शीतलता  प्रदान करता है। कई दृश्य मन को छू लेते हैं एवं दर्शकों को अन्य प्राणियों से प्रेम करने, उनकी परवाह करने तथा उनकी भावनाओं को समझने की शिक्षा देते हैं। तकनीकी रूप से अच्छी इस फ़िल्म का गीत-संगीत भी प्रभावी एवं कर्णप्रिय है। सभी प्रमुख कलाकारों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है। कहानी में घिसे-पिटे फ़ॉर्मूलों (रोमांस, मारधाड़ आदि) के प्रयोग के बावजूद यह फ़िल्म अपने उद्देश्य में सफल है।
आज का सफ़र यहीं तक 
फिर मिलेंगे 
गामी अंक में 

14 comments:

  1. हिमतारामजी भाम्‍बू के बारे में जानकर रोमांच हो आया। ऐसे गुमनाम सपूत ही हमारे सच्‍चे रखवाले हैं। भाम्‍बू के बारे में यह जानकारी देने के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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  2. हिमताराम जी के बारे में जानना बहुत अच्छा एवं प्रेरणादायक है। आपका संकलन अच्छा है अनीता जी। मेरे आलेख को स्थान देने हेतु आपका हार्दिक आभार।

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  3. हमेशा की तरह बेहतरीन प्रस्तुति हिमताराम जी की कहानी बहुत ही प्रेरित करने वाली है! हर किसी को हिमताराम जी से सभी को प्रेणा लेने की जरूरत है! पूरे विश्व को ऐसे ही सच्चे प्रकृति प्रेमी की जरूरत है हिमताराम जी को शत् शत् नमन् !

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  4. बेहतरीन प्रस्तुति.आभार

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  5. सुंदर सार्थक अंक ।

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  6. मेरी पोस्ट को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार धन्यवाद
    वास्तव में हिमताराम जी हमारे गोत्र समाज के साथ साथ देश के गौरव ह उनसे हर इंसान को सिख लेनी चाहिए

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  7. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  8. हिमताराम जी के प्रारक कार्यो से परिचय करवाने के लिए धन्यवाद, अनिता।
    मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहूत धन्यवाद।

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  9. सार्थक भूमिका और सराहनीय रचनाओं के लिंक्स से सजी सुंदर चर्चा, आभार!

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  10. हिमताराम जी भाम्‍बू का लेख साझा करने के लिए दिल से शुक्रिया अनीता जी,बेहतरीन चर्चा अंक,सभी को हार्दिक बधाई

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  11. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति
    हिमताराम जी को बधाई

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  12. बहुत सूंदर और उपयोगी चर्चा।
    आपका आभार।

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  13. Very nice…I am very happy to see this post because it is very useful for me. There is so much information in it. My Name is ​Arman Ansari

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