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Sunday, September 26, 2021

"जिन्दगी का सफर निराला है"((चर्चा अंक-4199)

सादर अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक और भूमिका आदरणीय शास्त्री सर की रचना से )

 जिन्दगी का सफर निराला है,

कंटकों ने गुलों को पाला है,

चन्द साँसों का खेल सारा है।

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सच,चंद साँसों का खेल ही तो ये जग सारा है... 

पितृपक्ष के दिन चल रहें हैं...

इन दिनों अपने बिछड़े प्रियजनों की याद बहुत सताती है... 

कर्मकांडों के अनुसार सभी उनके आत्मा की शांति के लिए दान-पुण्य,तर्पण,पूजन-हवन आदि कर रहें हैं..

उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि तो बस यही है कि-हम उनके दिए हुए संस्कारों का वहन कर सकें.. 

बिछड़े प्रियजनों को नमन करते हुए चलते हैं,आज की कुछ खास रचनाओं की ओर...

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गीत "जिन्दगी का सफर निराला है"

 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिसको चन्दा ने तपन ही बाँटी,

और चन्दन ने जलन ही बाँटी,

अब तो किस्मत का ही सहारा है।

मुद्दतों में जो तन सँवारा है।

आज रोगों से वही हारा है।।

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माँ ...

9 साल ... वक़्त बहुत क्रूर होता है ... या ऐसा कहो वक़्त व्यवहारिक होता हैप्रेक्टिकल होता है .... उसे पता होता है की क्या हो सकता है, वो भावुक नहीं होता, अगले ही पल पिछले पल को ऐसे भूल जाता है जैसे ज़िन्दगी इसी पल से शुरू हई हो ... हम भी तो जी रहे हैं, रह रहे हैं माँ के बिना, जबकि सोच नहीं सके थे तब ... एक वो 25 सितम्बर और एक आज की 25 सितम्बर ... कहीं न कहीं से तुम ज़रूर देख रही हो माँ, मुझे पता है ...   

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तर्क से परे है प्रेम

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स्मृति पटल पर गाँव

बैठ कर मन बाग मीठी 

मोरनी गाने लगी है 

हर पुरानी बात फिर से 

याद अब आने लगी है।।

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एकाकी

हल्के हल्के पदचापों की आहटें l
थिरका रही बावरे मन की आयतें ll 

दस्तक दे रही उस परिंदे घरोंदों को l
आ ढहा जा इस एकाकी दीवारों को ll

कटे पर बेताब हूँ परवाज़ भर जाने को l
आतुर हूँ छूने अम्बर के उन बादलों को ll
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तट रेखा का इतिहास 


-----------------बिना हद का आसमान है !

बिना हद का आसमान है ,

ऑनलाइन के जमाने में ,

दिल भी बे-हद मिलेंगे ,

दीवानगी को आजमाने में ।

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यातायात ! कहीं दाएं, कहीं बाएं ! 

ऐसा क्यूं

हमारे देश में वाहन और यातायात बाईं तरफ से प्रवाहमान होता है बावजूद इसके कि दुनिया के ज्यादातर देशों में यह दाहिने हाथ की तरफ से चलता है ! इसका एक प्रमुख कारण बताया जाता है कि अंग्रेजो का जहां-जहां राज था वहां-वहां यह रवायत पड़ी, जैसे ऑस्ट्रेलया, न्यूजीलैंड, भारत, पकिस्तान या कुछ अफ़्रीकी देश ! पर मिस्र अंग्रेजी शासन के बावजूद सदा दाहिनी ओर ही चलता रहा ! इसके अलावा जापान कभी भी  ब्रिटिश हुकूमत के नीचे नहीं रहा पर वहां भी बाएं हाथ पर चलने का चलन है ! पर साथ ही सवाल यह भी है कि अंग्रेज ही क्यों बाएं-बाएं चले  ?

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Manyavar ‘Kanyadaan’ ad: समाज को नई दिशा दिखाता विज्ञापन

हाल ही में कपड़ों के ब्रैंड मान्यवर ने एक विज्ञापन जारी किया है, जिसमें आलिया भट्ट 'कन्यादान' (#Kanyadaan) की जगह अब 'कन्यामान' (#Kanyamaan) शब्द का इस्तेमाल करने की बात कर रही है। मान्यवर के मोहे कलेक्शन के तहत जारी किए इस विज्ञापन ने समाज को नारी सम्मान के दृष्टिकोन से एक नई दिशा में सोचने मजबूर किया है। 
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जाने चले जाते हैं कहाँ .....
जाने चले जाते हैं कहाँ ,दुनिया से जाने वाले, 
जाने चले जाते हैं कहाँ 
          कैसे ढूढ़े कोई उनको ,नहीं क़दमों के निशां 

 अक्सर, मैं भी यही सोचती हूँ 
आखिर दुनिया से जाने वाले कहाँ चले जाते हैं ? 
कहते हैं  इस जहाँ  से परे भी कोई जहाँ है, 
हमें छोड़ शायद वो 
उसी अलौकिक जहाँ में चले जाते हैं। 
क्या सचमुच ऐसी कोई दुनिया है ? 
क्या सचमुच आत्मा अमर है ? 
क्या वो हमसे बिछड़कर भी 
हमें देख सुन सकती है? 
क्या वो आत्माएं भी खुद को 
हमारी भावनाओं से जोड़ पाती है ?
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आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दें 
आपका दिन मंगलमय हो 
कामिनी सिन्हा 

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर और श्रमसाध्य चराचा।
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

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  2. आदरणीय सिन्हा मेम मेरी प्रविष्टि् की चर्चा रविवार (26-9-21) को "जिन्दगी का सफर निराला है"((चर्चा अंक-4199) पर शामिल करने हेतु सादर धन्यवाद जी।
    सभी संकलित रचनाएं बेहतरीन , सभी आदरणीय को बधाइयां और शुभकामनाएं ।

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  3. सुन्दर सूत्रों से सजी बेहतरीन प्रस्तुति ।

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  4. उम्दा चर्चा। मेंरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

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  5. बहुत आभार आपका कामिनी जी...। साधुवाद..

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  6. सारगर्भित रचनाओं से सज्जित सार्थक संकलन ।

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  7. बहुत ही सुंदर श्रमसाध्य प्रस्तुति।
    सादर

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  8. बहुत सुंदर संकलन ….
    आपका आभार मेरी रचना को इस को शामिल करने के लिए …

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  9. उत्साहवर्धन करने हेतु हृदयतल से धन्यवाद आप सभी को,सादर नमस्कार

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  10. बहुत सार्थक प्रस्तुति!
    श्रमसाध्य कार्य।
    सभी लिंक बेहतरीन।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय से आभार कामिनी जी।
    सस्नेह सादर।

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