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Thursday, September 09, 2021

'जल-जंगल से ही जीवन है' (चर्चा अंक 4182)

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

सादर अभिवादन। 

गुरुवारीय अंक में आपका स्वागत है। 

आइए पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ- 

 

ग़ज़ल "दिल को बेईमान न कर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


जल-जंगल से ही जीवन है
दोहन और कटान न कर
जो जनता को आहत करदे
ऐसे कभी बयान न कर

पिरामिड

       वे 

       यही 

      देखते

     रह गए 

      दुलार स्नेह  

    उसके मन का

    पर कह न पाए

   यह किसको कहते

   करके बड़ा मनुहार

*****

ना 'सिरचन' मरा, ना मरी है 'बुधिया'... -(भाग-)

.ख़ैर ! .. फ़िलहाल तरुमित्र आश्रम के रमणीक परिसर में अवस्थित महाविद्यालय के BMC के छात्रों द्वारा बनाई गयी फ़िल्मकफ़न की बात करते हैं। सुबह से शाम तक तरुमित्र के इसी रमणीक परिसर में और परिसर में ही अवस्थित महाविद्यालय के भवन उसके 'कैंटीन' में सभी युवा छात्र-छात्राओं के साथ-साथ, कब और कैसे बीत गया, मालूम ही नहीं चल पाया।

*****

अमेरिका और रूस के बीच क्या सम्पर्क-सेतु का काम करेगा भारत?

रूसी सिक्योरिटी कौंसिल के प्रमुख के साथ इस मुलाकात से पहले अप्रैल में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव दिल्ली पहुंचे थे। लेकिन तब उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं हुई थी। उससे निष्कर्ष निकाला गया था कि भारत ने रूसी नीतियों को लेकर अप्रसन्नता व्यक्त की है। पर इधर लग रहा है कि दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को बेहतर किया है। गत 3 सितम्बर को ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (ईईएफ) के व्लादीवोस्तक में हुए छठे शिखर सम्मेलन के भाषण में नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और रूस की मैत्री समय की कसौटी पर खरी उतरी है। इस वर्चुअल सम्मेलन में उनके भाषण को राजनयिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

*****

पाकिस्तान में जींस और टाइट्स नहीं पहन सकेंगी टीचर्स

महिलाओं के लिए फॉर्मल ड्रेस के तौर पर सादे सलवार कमीज सूट, ट्राउज़र, दुपट्टे या शॉल के साथ शर्ट का सुझाव दिया गया है. पर्दा करने वाली महिलाओं को स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति दी गई. जींस और टाइट्स पहनने की किसी सूरत में इजाज़त नहीं होगी. टीचर्स को स्निकर्स और सैंडल्स पहनने की अनुमति होगी लेकिन स्लिपर्स की नहीं.

*****


पर हर कठिनाइयो में खड़े रहते हम ,

खाने  का खाना रहता |  

सोने के लिए घर ,

फिर भी हौसलों से बढ़ते रहे हम

*****

 आज बस यहीं तक 

फिर मिलेंगे अगली प्रस्तुति में। 

रवीन्द्र सिंह यादव 


11 comments:

  1. जी ! सुप्रभातम् वाले नमन संग आभार आपका .. मेरी बतकही को आज एक संदेशपरक, शीर्षक और अपनी भूमिका के साथ अपनी बहुरंगी प्रस्तुति में इस मंच के माध्यम से अन्य कई कुशल पाठकों तक पहुँचाने के लिए ...
    (वैसे आज तड़के .. "ना 'सिरचन' मरा, ना मरी है 'बुधिया' ... -(भाग-४)."- अंतिम भाग "पाठकों" को "दर्शकों" में बदलने के लिए तैयार है .. बस यूँ ही ...) ☺

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  2. सुप्रभात
    आभार सहित धन्यवाद रवीन्द्र जी मेरी रचना को स्थान देने के लिए |

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  3. सुप्रभात, चर्चा मंच का यह अंक भी पठनीय और विचारणीय विषयों पर लिखी रचनाओं के सूत्रों से सजा है, आभार!

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  4. खूबसूरत रचनाओं और महत्वपूर्ण लेखों से सजा बहुत ही सुंदर और सरहानीय चर्चामंच

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. बहुत सुदर ल‍िंक, सभी एक से बढ़कर एक हैं रवींद्र जी, वाह

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  7. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति|
    आपका आभार रवीन्द्र सिंह यादव जी!

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  8. सुंदर सूत्रों से सजा अंक । बहुत शुभकामनाएं रवीन्द्र जी ।

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  9. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति।
    मेरी रचना को मंच पर स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय।

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