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Monday, September 27, 2021

'बेटी से आबाद हैं, सबके घर-परिवार' (चर्चा अंक 4200)

सादर अभिवादन।

सोमवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।

आइए पढ़ते हैं चंद चुनिंदा रचनाएँ-

दोहागीत "बिटिया दिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

*****

ताजा खबर है आई है अभी

उलूक
फिर कुछ
लिखने गया आज
कुछ नहीं जैसा आदतन
बदलेगा भी नहीं कुछ कभी

बहुत कुछ पर
लिखने वाले सुना है
पूछे जा रहे हैं आजकल हर जगह
ताजा खबर आई है अभी 

*****

नमन तम्हें


सभी कार्य गोण हुए  देश प्रेम के आगे  |

नमन तुम्हें हे वीर सपूत देश के

ताउम्र याद रहेगा बलिदान तुम्हारा

*****

हैप्पी डॉटर्स डे

तो क्या गलत हो गया जो मै अपने बेटे को अपनी बेटी की तरह भी देखती हूं, मेरे यथार्थ ने कभी मुझे यह अहसास नही होने दिया कि मेरे साथ एक सहेली की तरह दुख सुख बांटने वाली बेटी नही। वो वैसे ही रसोई में मेरा हाथ बंटाता है जैसे बेटियां हाथ बंटाती है। वो वैसे ही मेरे साथ वैसे ही शॉपिंग करता है जैसे बेटियां करती है। तो क्या हुआ अगर मै अपने बेटे में अपनी बेटी भी देखती हूं।

*****

अवधी भाषा के कवि पढ़ीस जी, पढ़िए उनकी ये अनमोल कवितायें

बहिनी, बिटिया कंगाल जाति की, तुमरे कारन पिसी जायि,

तुम सह्यब बने सभा मा भूल्यउ, कयिस, अयिस कनवजिया हउ।

पढ़ि-पढ़ि पूरे पथरा भे हउ, घर-घर मा जगुआ छायि रहा।

यी सयिति दिल्ली ते घाखति हयि, अयस बड़े कनवजिया हउ।

*****

६०५.बदलाव

अच्छा-बुरा जो भी है,

आज है,कल नहीं है,

अभी है,बाद में नहीं है.

इसलिए ज़्यादा दुःखी होना

उतना ही अर्थहीन है,

जितना ज़्यादा ख़ुश होना.

*****

 वर्ण पिरामिड: बेटियाँ

तू

परी

लाडली

नैन बसी

मन मोहिनी

आँचल में लेटी

राजदुलारी बेटी ।।

*****

उऋण

जीवन का सातत्व

अब दिखता स्पष्ट

बेटी बड़ी हो गई

संभाला उसने घर आँगन

फिर बना एक आशियाना

घरौंदे में गूँजा जीवन संगीत

*****

मोदी की अमेरिका-यात्रा के निहितार्थ

जर्मन रेडियो की एक रिपोर्ट में लिखा गया हैक्वॉड शिखर सम्मेलन में इस बात पर राय भी बनी कि चारों देशों के शीर्ष नेता सालाना बैठक करेंगे और उनके मंत्रिगण तथा अधिकारी चौतरफा सहयोग बढ़ाने में लगातार जुटे रहेंगे। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग का व्यापक खाका खींचने की कवायद भी यहां साफ दिखती है.

*****

आज बस यहीं तक 

फिर मिलेंगे अगले सोमवार। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

9 comments:

  1. बहुत सुंदर संकलन.मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार.

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  2. बहुत सुंदर सामयिक तथा रोचक संकलन,मेरी रचना को स्थान तथा मान देने के लिए आपका असंख्य आभार और अभिनंदन ।आपको और सभी रचनाकारों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं ।

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  3. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति।
    सादर

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  4. धन्‍यवाद रवींद्र जी, मेरी पोस्‍ट को इस महत्‍वपूर्ण मंच पर स्‍थान देने के ल‍िए । सभी ल‍िंक ऐक से बढ़कर एक हैं

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  5. उम्दा लिंक्स।

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  6. बहुत सुंदर संकलन,मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका आभार|

    ReplyDelete
  7. शानदार लिंक चयन सुंदर चर्चा।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    सभी लिंक बेहतरीन।

    ReplyDelete

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