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Saturday, September 18, 2010

दीपक मशाल की शनिवासरीय चर्चा

प्रिय दोस्तों,






सादर/सप्रेम नमस्कार 
आज शनिवार की इस चर्चा में आप सबका स्वागत है..
आज की चर्चा आरम्भ करने से पहले एक सख्त लेकिन आवश्यक आग्रह है कि 'ये चर्चा सिर्फ तभी पढ़ें, या इस पर सिर्फ तभी टिप्पणी करें जब आपको सच में इसमें कुछ नया दिखे यानि इसमें मिलने वाले वो ब्लॉग जिनपर आप कभी गए नहीं.. उनपर आप जाएँ. यदि सिर्फ चर्चा देखने भर को देखनी है तो इन चर्चाओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता.'
जैसा कि मेरी चाह रहती है कि आपतक वो चिट्ठे पहुंचाऊं जो अच्छा लिखते हैं मगर उनपर या तो आपकी नज़र कम पड़ती है या फिर पड़ती ही नहीं. उसी क्रम में आज सामाजिक समस्याओं पर ध्यान दिलाने वाले कुछ चिट्ठे आपकी सेवा में हाज़िर हैं.

तो सबसे पहले देखते हैं इंदौर से निर्मला भुराड़िया जी का ब्लॉग ओब्जेक्शन मीलोर्ड. निर्मला जी समय-समय पर ऐसे मुद्दों को उठाती रहती हैं जो ना सिर्फ संवेदनशील हैं बल्कि अगर हमें अपने देश को सामाजिक स्तर पर भी विकसित और मजबूत बनाना है तो निश्चित ही उन मुद्दों पर बहस और उनमें पायी गई कमियों को दूर करने की जरूरत है.
उत्तराखंड से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री अशोक कुमार जी जो कि 'खाकी में इंसान' और Human in Khaki नामक पुस्तकें(क्रमशः हिन्दी और अंग्रेजी में) लिख चुके हैं अपने ब्लॉग खाकी में इंसान पर पुलिस के प्रति लोगों के मन में अंकित भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी की छवि को मिटा कर उसको एक ऐसे इंसान के रूप में उकेरने को प्रतिबद्ध हैं जो कि आमजन का मित्र, ईमानदार और बहादुर हो. साथ ही वो समय-समय पर लोगों को समाज और देश के प्रति उनके कर्त्तव्य भी याद दिलाते रहते हैं. अशोक जी का ये प्रयास अवश्य ही एक दिन रंग लाये ये दुआ करिए उनके लेखों को पढ़ने के बाद.         
हमारे बीच अर्द्धसत्य नामक एक ऐसा ब्लॉग भी मौजूद है जिसकी लेखिका बहिन मनीषानारायण हैं और जो ना सिर्फ समाज में इस वर्ग(तृतीय लिंगी) के बारे में फ़ैली भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश में लगीं हैं बल्कि कई व्यक्ति जो सामान्य होते हुए भी अल्पज्ञान के कारण स्वयं को तृतीय लिंगी समझने लगते हैं उनको विश्वास दिलाती हैं कि 'निश्चिं रहिये ईश्वर ने आपके साथ ये अन्याय नहीं किया'. दुनिया भर में लैंगिक विकलांग व्यक्तियों को समाज की मुख्य धारा में शामिल कर लिया गया है फिर हम ही क्यों उन्हें इस जिन्दा नरक में झोंकने को आमादा है.
अब बात करते हैं संजय कुमार जी के संजय कुमार ब्लॉग की.. इस ब्लॉग पर वो बीते कई महीनों से विभिन्न सामाजिक-राजनैतिक बुराइयों की ओर लोगों का ध्यान खींचते आ रहे हैं लेकिन लगता है कि हम सब ब्लॉग पर सिर्फ कविता कहानियों की चाह से आते-जाते हैं..
शिकागो में बैठे राम त्यागी जी भी बहुत परेशान हो उठते हैं जब वो नफरत की आग में झुलसते अपने देश और देशवासियों को देखते हैं और तब उनकी यही तकलीफ शब्दों में, आलेखों में ढल उनके ब्लॉग पर अवतरित हो जाती है. उनको पढ़िए मेरी आवाज़ पर.. 
एकोsहम पर विष्णु वैरागी जी की ओज से भरी लेखनी को पढ़ आपका विश्वास अवश्य ही मजबूत होगा कि धीरे-धीरे सही मगर हिन्दी ब्लोगिंग सार्थकता की तरफ कदम बढ़ा रही है.
इसी क्रम में एक और ब्लॉग है ये दुनिया है.. ज्यादा क्या कहूं बस इतना ही काफी है कि इस ब्लॉग को पढ़कर आपको खुद ही महसूस होगा कि इसको चर्चामंच पर आपके सामने क्यों प्रस्तुत किया है.. 
बड़ा अजीब सा नाम लगता है सुनने में लूज शंटिंग, लगता है कि लिखने वाला रेलवे में नौकरी करता होगा. लेकिन आपको यहाँ पर वो समाचार मिल सकते हैं जो आमतौर पर आपकी नज़रों से बच के निकल जाते हैं और साथ ही कभी सुन्दर आलेख भी बोनस के तौर पर आप पा सकते हैं. :)
बात समाज से जुड़ी हो तो अपने आसपास की बातों को कैसे भूल जाएँ भाई..और आस-पास की ये बातें बड़े ही चुटीले और चटपटे अंदाज़ में आपको पढ़ने को मिल जायेंगीं अपनी, उनकी, सबकी बातें पर.. वैसे ये ब्लॉग नाम से ही मोहल्ले का गपशप कोना लगता है. लेकिन इसके हर आलेख के अंत तक पहुँचते-पहुँचते आपको लगेगा कि इसको पढ़ना सार्थक रहा.. सिर्फ मौजखोरी नहीं.
चलिए अब आप ज्यादा पक ना जाएँ इसलिए कुछ अलग दिशा में घूम लेते हैं--
दर्शन में रूचि रखने वाले हों या फिर जीवन के हर पल को जीने की चाह रखने वाले, सत्य के निर्भीक खोजी या फिर आप दुनिया को पूर्ण रूप से व्यवहारिक नज़रिए से देखने की इच्छा रखते हों तो आपको आचार्य रजनीश अर्थात ओशो के विचार अवश्य ही पसंद आयेंगे... उन्हें पढ़ने के बाद संभव है आपको दुनिया की हर कलम बहुत बौनी लगे जबकि आप शायद विश्वास ना करें कि वो महान दार्शनिक कभी लिखता नहीं था.. सिर्फ और सिर्फ बोलता था.. बिलकुल बुद्ध की तरह. उन्हें पढ़िए ओशो सिर्फ एक पर..
अब अगर आप दर्शन में रूचि रखते ही हैं तो जे कृष्णमूर्ति हिन्दी में कैसे पढ़ना भूल सकते हैं साहब..

पिछले कुछ माह से आखर-कलश नामक ब्लॉग उभरते और स्थापित साहित्यकारों को एक बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है और इसी बहाने वो पठनीय साहित्य को भी एक जगह जमा करता जा रहा है. तो क्यों ना एक बार वहाँ भी ढूंढते हैं क्या मिलता है हमें अपने मन का..
बात चल पड़ी है उन चिट्ठों की जहाँ पर चिटठा संयोजक अपनी लेखनी का जौहर दिखलाने के बजाय हिन्दी की सेवा में ज्यादा यकीं रखता है तो आप बुरा मानें या भला.. मगर हम शब्दकार का नाम लिए बिना नहीं रह सकते जी.. :)
ह्म्म्म अगर आप दीवाने हैं लघुकथाओं के तो समकालीन लघुकथा के विचार-पक्ष एवं रचना-पक्ष की अव्यावसायिक मासिक ब्लॉग पत्रिका जनगाथा तो आपके ब्लोगरोल में निश्चित ही समा जाएगा..
अमेरिका में रह रहे सर्वप्रिय हिन्दी प्रेमी अनुराग शर्मा जी ना सिर्फ कहानियों को अपनी मधुर आवाज़ में अमर बनाने का काम करते हैं बल्कि अपनी जबरदस्त कहानियों की बारिश में भी पाठकों को तर-ब-तर कर देते हैं. आपने उन्हें पढ़ा भी होगा और मेरी बात से सहमत भी होंगे. अगर नहीं पढ़ा तो जाके देखए पिट्टसबर्ग में एक भारतीय पर..
निरंतर की कलम से पर डॉ. राजेंद्र तेला 'निरंतर' जी ने भी सुन्दर रचना को लगाया हुआ है और  अनुपम यात्रा की शुरुआत पर अनुपमा पाठक जी स्वीडन से हिन्दी साहित्य की सेवा में लगी हुई हैं.. आपको खुशी होगी जानकर कि स्वीडन से भी कोई शानदार कवितायें हिन्दी साहित्य को अर्पित कर रहा है.
क्षमा जी को तो आप सब जानते ही होंगे. उनकी रचनाओं के हम सभी लती हो चुके हैं तो बिखरे सितारे पर पढ़िए उनके   एक और दर्दीला धारावाहिक रहीमा के बारे में..
अभि जी की रोचक और जानकारी भरी बातें पढ़ने के लिए मेरी बातें पर एक फेरा लगा लीजिये प्लीज....
यल्लो कहा था ना कि दुनिया गोल है.. सब जगह घूमते फिरते हम फिर से वहीँ आ गए उसी शहर में जहाँ से हमने चर्चा शुरू की थी.. :) याने कि इंदौर में.. अब यहाँ इंदौर की नमकीन नहीं मिलेगी दोस्त.. यहाँ सुनने को और पढ़ने को मिलेंगीं उस नारी शक्ति की बातें जो निस्वार्थ भाव से हिन्दी ब्लोगिंग की सेवा में लगी हैं और जिनकी मधुर आवाज़ में अपनी रचना पढवाने या गववाने की आज हर कोई चाह पाले हुए है.. तो पढ़िए अर्चना चावजी जी की मन की मेरे मन की पर..
अब अगर आपका मन अभी भी कुछ अन्य बेहतरीन ब्लॉग पढ़ने का है तो देखिये किस तरह से चिट्ठाचर्चा पर तरुण जी ने मोती टांक रखे हैं और मुझे इज़ाज़त दीजिए अगले शनिवार तक के लिए..
फिर आपकी सेवा में हाज़िर होऊंगा. तब तक के लिए अपना ख्याल रखियेगा.
नमस्कार
आपका-



46 comments:

  1. बढ़िया चर्चा ........लिंक्स पर जाना बाकी है ....नाराज़ ना होना कमेन्ट पहले दिए दे रहा हूँ ! आज की चर्चा कुछ गुस्से में लगाई लगती है !

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  2. दीपक जी,
    आज की चर्चा में बहुत ही बधाई लिंक दिए है आपने, इनमे से कई तो ऐसे है जिन्हें में आपके द्वारा चर्चा मंच पर पोस्ट करने से पूर्व ही पढ़ चूका हूँ ,
    आभार आपका की आपने मेरे ब्लॉग पर ओशो के द्वारा कहे गए शब्दों को चर्चा मंच में शामिल किया ........... धन्यवाद

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  3. आपकी चर्चा आद्योपांत पढ़ गयी..... सभी ब्लोग्स के बारे में इतना सुन्दर और धाराप्रवाह लिखा है आपने कि मन बहता चला गया....
    सभी रचनाकारों से परिचय की श्रृंखला शुरू हो जाये अनायास ही ....ऐसी सुन्दर चर्चा हेतु आपको हृदय से बधाई!
    अभी सुबह जो कविता लिखी उसकी दो पंक्तियाँ कुछ यूँ हैं.....
    "सुनने वाले का मन-प्राण बाँध सके जो...
    ऐसी विचारों की प्रगल्भता औ' भावनाएं सघन चाहिए !"
    आपकी यह चर्चा ... ऐसी ही सघनता से परिपूर्ण है ! मुझे भी स्थान दिया... इसके लिए धन्यवाद !
    मिसाल बने...मशाल बने
    हर हृदय में बस जाये वो ख़याल बने!
    दीपक की महिमा अनंत है...
    रौशन हो जाये घर-मंदिर,जगमगाती वह थाल बने!!
    best wishes!

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  4. चर्चा बहुत अच्छी है ...ज्यादातर ब्लोग्स पर जाना होता है ..कुछ शायद नए हों ...अच्छा किया यहाँ लिंक्स दिए जिससे उन ब्लोग्स तक पहुंचना आसान होगा ....

    पर यह कहना कि जान पहचान वालों के ब्लोग्स के लिंक आप नहीं दे रहे ..यानि कि बाकी सब चर्चा मंच के सदस्य अपने जान पहचान वालों के ब्लोग्स या पोस्ट के लिंक लेते हैं ? हर चर्चाकार बहुत मेहनत से पोस्ट को उठा कर अपनी चर्चा में शामिल कर्ता है ..और इसी लिए कर्ता है कि यहाँ चेचा मंच पर आने वाले उनके ब्लॉग तक पहुंचें ...हर बार हम लिखते हैं कि चर्चा की सार्थकता आपके हाथों में है ....पर मैं तुमसे ही पूछती हूँ कि तुम मेरे लगाये गए कितने लिंक्स पर बाद में गए हो ? जिनको जान पहचान वाला कह रहे हो वहाँ तो तुम भी हो ही आते हो ...मैंने बहुत से नए लोगों का यहाँ परिचय कराया है ...अनुपमा कि यात्रा ...सबसे पहले मैंने लिया था यहाँ उसको चर्चा मंच पर ..क्या तुम गए थे ...इस तरह कि बात करना उचित नहीं है ..
    आपकी बात से ऐसा लगा कि आपने हम सबको कटघरे में खड़ा कर दिया है ...

    इसी लिए मैं इतना सब कुछ लिख गयी ...
    मैंने अपनी बात कही है ...क्यों कि मुझे बुरा लगा है ...पूरे सप्ताह मैं लिंक्स खोजने में मेहनत करती हूँ ...और आपने एक लाइन में लिख कर धो दिया ...यदि ऐसा ही है तो मुझे चर्चा करने के लिए क्षमा करें ....

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  5. i am new to this world of blogs.... but with time i learnt few facts and experienced this lovely place called discussion board... i have been reading almost all the discussions and felt the pain and effort that persons concerned would have taken to compile things together... It was sangeeta ji who guided me with her suggestions and was benign enough to give place to a novice one as me in her discussions...
    vandana ji,anamika ji,mayank ji,vats ji,manoj ji,sangeeta ji...... sabki apni anuthi shaili hai...
    har charchakaar ki mehnat jhalakti hai ...unki charchaon mein!
    i am an avid reader and glad to be in the company of stalwarts...
    thankfull to charchamanch for making me familiar to so many writers!!!
    with regards to all!!!

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  6. Bahut,bahut shukriya Deepakji...yahan se hamesha badehee achhe links mil jate hain.Aapka andaze bayan bhi aisa hota hai,ki,padhete hee chale jate hain!

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  7. वाकई में चर्चा में नवीनता है!
    --
    इससे हम पुरातन चर्चाकारों को भी प्रेरणा मिली है!
    --
    बहुत-बहुत आभार!

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  8. ये चर्चा सही में अलग रही दीपक जी, बहुत से लिंक्स पे तो जाना अक्सर होता ही है, बहुत नए लिंक्स भी मिले आज..सबको बुकमार्क कर के रख लिया मैंने..अब वहां जाना होता रहेगा..

    मेरे ब्लॉग को चर्चा में शामिल करने के लिए बहुत आभार..

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  9. चर्चा के शुरू में की गई हड़काई के बावजूद नहीं माना. चर्चा पढ़ ही ली.

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  10. दीपक मशाल जी ,

    आपने मेरी टिप्पणी पर वो पंक्तियाँ हटा दिन जिस पर मैंने टिप्पणी दी थी ...और मेल में आपने माफ़ी भी मांग लो ...लेकिन जब बात मंच पर आगई है तो बात यहीं समाप्त भी होनी चाहिए थी ...अब लोंग जब आपकी चर्चा देखने आयेंगे तो क्या उनके दिमाग में यह नहीं आएगा कि ...संगीता स्वरुप को गुस्सा क्यों आता है ???????

    मैं कभी किसी विवाद में नाटो पड़ती हूँ और न ही पड़ना चाहती हूँ ..जो काम यदि किसी के द्वारा सौंपा जाता है उसको अपनी क्षमता से ज्यादा ही अच्छे से पूरा करने कि कोशिश करती हूँ ...आपने लिखा कि आपका मतलब यह नहीं था ...और शायद बाकी लोंग भी गलत मतलब निकाल लें इस लिए आप उन पंक्तियों को हटा रहे हैं ...
    पंक्तियाँ हटा देने से आपकी सोच नहीं बदल जायेगी ..खैर ..एक बात कहना चाहूंगी कि कुछ भी लिखते समय यह ध्यान करलें कि आपकी बात के कितने मतलब निकलते हैं ...

    आपने जो पंक्तियाँ हटाई हैं मैं उनको दूसरी टिप्पणी में दे रही हूँ ...जिससे सब मुझे भी समझ सकें ..क्यों कि हर इंसान के कृत्य ही उसके व्यक्तित्त्व को बताते हैं ...

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  11. सबसे पहले अपने पाठकों को आपकी तरफ से हिदायत ...
    ये चर्चा सिर्फ तभी पढ़ें, या इस पर सिर्फ तभी टिप्पणी करें जब आपको सच में इसमें कुछ नया दिखे यानि इसमें मिलने वाले वो ब्लॉग जिनपर आप कभी गए नहीं.. उनपर आप जाएँ. यदि सिर्फ चर्चा देखने भर को देखनी है तो इन चर्चाओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता.'

    क्या यह तरीका उचित है ...आपका काम है चर्चा करना ..अच्छे लिंक्स देना ..नए ब्लोग्स तक के पते देना ..पर पाठक क्या पढते हैं और क्या नहीं उस पर हम केवल उनसे अनुग्रह कर सकते हैं आग्रह नहीं . और आपने स्वयं ही कितने लिंक्स जा कर पढ़े हैं यह सोचियेगा ..फिर से ......

    आपने जान पहचान वालों कि बात की... मेरे पास नए ब्लोगर्स के ऐसे मेल भी आते हैं कि आपने मेरी रचना को चुना और चर्चा मंच पर लिया ...बताइए मुझे कब और कैसे आना है ..मैं हैदराबाद में रहता हूँ ...कैसे पहुंचना होगा यह भी बताएँ ....

    हम अपना काम चुप-चाप करते हैं और आप दूसरों के किये काम को कम समझ कर स्वयं ही ढोल बजा कर करते हैं ...
    मैं यह जानती हूँ कि आपको चाहने वाले बहुत हैं ...मेरी इस बात से लोंग मुझसे नाराज़ हो जायेंगे ..पर मेरी इमानदारी पर कोई शक करे यह मुझे बर्दाश्त नहीं है
    अभी और है ...

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  12. आपकी वो पंक्तियाँ जो आपने हटा दी हैं ...


    जैसा कि मेरी चाह रहती है कि आपतक अपने या अपनी जान-पहिचान भर के चिट्ठे ना पहुंचा के वो चिट्ठे पहुंचाऊं जो अच्छा लिखते हैं मगर उनपर या तो आपकी नज़र कम पड़ती है या फिर पढ़ती ही नहीं.

    यह यहाँ इस लिए प्रेषित कीहैं क्यों कि ..यह पंक्ति हम सब चिट्ठा करों को कटघरे में खड़ा कर रही है ...



    आपका मेल के द्वारा प्राप्त माफीनामा ..
    आदरणीया दी
    सादर चरणस्पर्श..
    मेरा इशारा वैसे चिट्ठाचर्चा की तरफ था लेकिन आपने जो अनुमान लगाया संभव है और लोग भी वही लगायें इसलिए आपसे क्षमा प्रार्थना करते हुए मैं वो वाक्य हटा देता हूँ..
    आपको जो तकलीफ हुई उसके लिए संभव हो तो इस अनुज को माफ़ कर दीजियेगा..

    सादर

    आपका-
    दीपक

    चलिए मैंने आपको माफ किया ...अब इसके बाद मैं इस विषय को यहीं खत्म करती हूँ ...आभार

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  13. वर्तनी की आज काफी गलतियाँ हो गयी हैं ....उसके लिए क्षमा चाहती हूँ ..जब मन भरा हो तो दिखाई भी नहीं देता ...

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  14. बहुत ही बढ़िया चर्चा की.दीपक.....कई सारे,अच्छे लिंक्स मिले..शुक्रिया

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  15. अच्छी जान पहिचान (पहचान) चर्चा .

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  16. बहुत बढ़िया चर्चा दीपक भाई.
    संगीता जी से सहमत.
    व्यर्थ विवाद ठीक नहीं है.
    उर्जा का ही ह्रास होता है.

    Happy blogging.

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  17. आज की शनि की चर्चा में तो शनि सिर चढ़कर बोल रहा है!
    --
    दो चर्चाकार जब टिप्पणी पर प्रतिटिप्पणी करने लगें तो चर्चा मंच पर चर्चाओं का क्या औचित्य है?
    --
    जो बात यहाँ पर टिप्पणियों में हो रही है वही सब बात तो मेल में भी हो सकती थी!
    --
    सबकी चर्चा का अपना-अपना अलग-अलग ढंग होता है और अलग-अलग दिन होता है!
    --
    चर्चाकार को इतनी तो सावधानी रखनी ही चाहिए कि उसके साथी चर्चाकारों को कोई ठेस न पहुँचे!
    --
    मैं इस प्रकार के व्यवहार के लिए बेहद शरमिन्दा हूँ और किसी को भी खेद व्यक्त करने के लिए नही कहता हूँ!
    --
    स्वयं ही पाठकों से क्षमा माँगते हुए बहुत भारी मन से चर्चा मंच को बन्द करने का निर्णय ले रहा हूँ!
    --

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  18. दीपक,
    बहुत अच्छी चर्चा की है तुमने...
    यह भी सही है कि तुम्हारी चर्चाओं में ऐसे ब्लोग्स शामिल होते हैं जो बहुत सार्थक हैं लेकिन अनेक कारणों से हम उनतक नहीं पहुँच पाते,
    १. ब्लॉग जगत आगाध सागर है, समयाभाव के कारण कई मोती हमसे छूट जाते हैं...उनको ढूंढ पाना भी हर किसी के वश में नहीं है...
    २. चिट्ठाजगत तक उनका न पहुंचना ..क्योंकि इन अमूल्य ब्लोगों को टिप्पणियाँ कम होती हैं...और चिट्ठाजगत की ४० सीढियां टिप्पणियां ही तय करती हैं..
    ३. चर्चाओं में उनकी चर्चा का नहीं आना या कम आना ...
    अधिकतर लोग चिट्टाजगत, इन्द्ली और चर्चाओं जैसे टूल्स के द्वारा ही इन ब्लोग्स तक पहुँचते हैं...
    तुम्हारा यह प्रयास निसंदेह सराहनीय है....
    @ संगीता जी...पूरा विश्वास है कि दीपक की मंशा आपको या चर्चा मंच के किसी भी चर्चाकार को आहात करने की नहीं थी...सभी जानते हैं कि आप बहुत मेहनत से चर्चा करती हैं...ज़रा सोचिये आपलोग एक ही मंच पर चर्चा करते हैं...वो आपके लिए ऐसी बात कैसे लिख सकता है....? आप इस प्रकरण से दुखी न हों...अनुज है दीपक, अनजाने में ही उससे भूल हुई होगी....शायद वो कहना कुछ और चाहता हो और अर्थ कुछ और निकल गया हो...आशा ही नहीं विश्वास है आप दीपक को क्षमा कर चुकी होंगी....
    @ शास्त्री जी ...आपका यह त्वरित निर्णय ठीक नहीं होगा, आपके मंच पर अनेक अच्छे लोगों का योगदान है..चर्चा मंच एक सफल चर्चा मंच है...इतनी छोटी सी बात के लिए आप ऐसा निर्णय न लें...आपकी टीम बहुत सक्षम है ..हमलोग बहुत खुश होते हैं ..इस मंच की ऊर्जा देख कर...सच पूछिए तो चर्चा को एक नया आयाम आपके ही मंच पर मिला है...मेरा व्यक्तिगत निवेदन है आप ऐसा मत कीजिये....समय दीजिये, सब ठीक हो जाएगा...
    आभार..
    'अदा'

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  19. मुझे तो लगता है ये चर्चा मन्च न हो कर झगडे की जड हैं इसी मंच पर किसी ने मेरे लिये अपशब्द कहे थे तब से मै इस मन्च पर नही आती। मैने वैसे मैने दीपक की पोस्ट पढी है मुझे नही लगा कि उसने चर्चाकारों के लिये कुछ कहा है फिर भी संगीता जी से कहूँगी कि वो अभी बच्चे हैं आप परिपक्व है। आपको इस बात को इस तरह नही लेना चाहिये। मै यहाँ दीपक की वकालत नहीं कर रही--- बस अपनी बात रख रही हूंम। मुझे नही लगता यहाँ उन पोस्ट्स का भी जिक्र होता है जो टिप्पणी करने नही आते। अगर है तो धन्यवाद। बडे काम करने वालों को छोटी छोटी बातें नजर अंदाज़ करनी पडती हैं।

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  20. सामाजिक सरोकारों के इतने लिंक एक साथ उपलब्ध कराने के लिए आभार.......

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  21. धन्यवाद दीपक जी, ऐसे लिनक्स से रूबरू करवाने के लिए जो सामाजिक जागरूकता का सन्देश दे रहे है.....

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  22. आदरणीय शास्त्री जी,
    आपकी बातों को पढा। आप थोड़े आहत थोड़े चिंतित लग रहे हैं।
    पर आप हम चर्चाकारों में श्रेष्ठ हैं। इतना त्वरित निर्णय की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। हम सब इस मंच से जुड़े हैं। इसके प्रति जिम्मेवार भी। इसको नई बुलंदियां देना चाहते हैं। अदा जी की बात पर गौर कीजिए।
    संगीता जी किसी बात से आहत हुईं और उनकी प्रतिक्रिया उसका ही नतीज़ा प्रतीत होता है। उन्होंने न सिर्फ़ प्रतिक्रिया दी बल्कि यह भी तो कहा
    "चलिए मैंने आपको माफ किया ...अब इसके बाद मैं इस विषय को यहीं खत्म करती हूँ ...आभार"
    तो उन्होंने अपनी तरफ़ से तो बात खतम कर ही दी है।
    इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि आप इस मंच के मुखिया होने के नाते अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें और इसको (मंच को) और गति प्रदान करने हेतु अपने अनुभव से उचित मार्गदर्शन भी दें, देते रहें।

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  23. दीपक जी आप बहुत अच्छी चर्चा लगाते हैं इस में कोई संदेह नहीं. इस बार भी आपने चर्चा अच्छी लगायी है.
    लेकिन अफ़सोस है की आप दूसरे सदस्यों की मेहनत को हल्का मान कर खुद के काम को श्रेष्ट बताए ये अच्छी बात नहीं.
    माना की आपके कहने का तात्पर्य कुछ और हो लेकिन जिस से और सदस्यों को ठेस पहुंचे तो वहाँ तात्पर्य गलत साबित हो
    जाता है...इसलिए आप से अनुरोध है की आप लिखने से पहले अपने शब्दों पर विचार करें और दूसरों की भावनाओं को समझे.
    और शुक्रिया की आपने माफ़ी मांग कर बात को खत्म करने की कोशिश की..

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  24. @ NIRMALA KAPAILA JI
    मुझे तो लगता है ये चर्चा मन्च न हो कर झगडे की जड हैं इसी मंच पर किसी ने मेरे लिये अपशब्द कहे थे तब से मै इस मन्च पर नही आती। मैने वैसे मैने दीपक की पोस्ट पढी है मुझे नही लगा कि उसने चर्चाकारों के लिये कुछ कहा है फिर भी संगीता जी से कहूँगी कि वो अभी बच्चे हैं आप परिपक्व है। आपको इस बात को इस तरह नही लेना चाहिये। मै यहाँ दीपक की वकालत नहीं कर रही--- बस अपनी बात रख रही हूंम। मुझे नही लगता यहाँ उन पोस्ट्स का भी जिक्र होता है जो टिप्पणी करने नही आते। अगर है तो धन्यवाद। बडे काम करने वालों को छोटी छोटी बातें नजर अंदाज़ करनी पडती हैं।
    --
    आपकी टिप्पणी सर माथे पर!
    बहुत आदर करता हूँ मैं आपका!
    लेकिन यह भी लिखना चाहूँगा कि आप "चर्चा मंच" पर व्यर्थ का दोषारोपण कर रही हैं!
    --
    आपका कोई भी विवाद कभी भी चर्चा मंच पर नही हुआ था!
    --
    मुझे भली-भाँति याद है कि आपका विवाद "चर्चा हिन्दी चिट्ठों की" ब्लॉग पर हुआ था!
    --
    मैं आपकी दिक्कत समझ गया हूँ कि आप भूल बहुत जल्दी जाती हैं! इसीलिए कभी-कभी मेरी उच्चारण पर छपी नई रचना को भी कह देती हैं कि यह आपने पहले भी उच्चारण पर पढ़ी है!
    --
    इस समय मेरे चर्चा मंच परिवार में छोटी सा विवाद होने पर आपने भी बहती गंगा में हाथ धोने का अच्छा अवसर देखकर अपने मन की बात कह ही दी!

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  25. भ्राता मनोज कुमार जी!
    चर्चा मंच के प्रति आपका, अदा जी का, संगीता स्वरूप जी का और अनामिका जी का जुड़ाव देखकर अभिभूत हूँ!
    --
    मैं एक विनम्र निवेदन तो अपने सभी सहयोगी चर्चाकारों से कर ही सकता हूँ कि "आप सभी अपनी चर्चा में कोई भी इस प्रकार का शब्द न लिखें, जिससे कि हमारे परिवार के किसी भी सदस्य को ठेस पहुँचे।"
    --
    यह बात केवल आप पर ही नहीं मैं स्वयं अपने पर भी लागू करता हूँ!
    --
    मैंने यह "चर्चा मंच" रूपी पौधा लगाया था आप इसको पल्लवित कर रहे हैं! मेरे लिए तो यही सबसे अधिक प्रसन्नता की बात है!
    --
    प्रकरण यहीं समाप्त हो गया!
    इसके लिए आप सभी मेरी श्रद्धा के पात्र है!
    --
    कल आदरणीय मनोज कुमार जी की चर्चा आपको बाँचने के लिए मिलेगी!

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  26. कई ब्लाग्स के बारे में अच्छी जानकारी ..सराहनीय पोस्ट

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  27. शास्त्री जी ने इस मंच को चालू रखने का स्वागत योग्य निर्णय लिया, साधुवाद.

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  28. कई ब्लाग्स के बारे में अच्छी जानकारी ..सराहनीय पोस्ट

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  29. शास्त्री जी मंच कोई भी रहा हो मगर वो झगडा आपकी चर्चा मे हुया था आपको सब कुछ पता है। आपका मेल भी मिला था मुझे। उसके बावजूद भी हमेशा आपके ब्लाग पर जाती हूँ। क्योंकि मै आपकी और आपकी प्रतिभा की बहुत इज़्ज़त करती हूँ। अगर इसमे कोई शक है तो मुझे बता दें। अगर मुझे कभी लगा कि ये रचना पहले आपके ब्लाग पर पढी है तो इसमे क्या बडी बात है कई रचनायें कुछ ऐसा आभास दे जाती हैं। आपने अब तक बताया क्यों नही? हाँ मुझे याद नही रहता कुछ भी मगर आपका ब्लाग खूब याद रहता है। और उस मंच पर मिली गालियाँ अब तक नहीं भूली तब आपने क्यों उस शख्स की भर्त्सना नहीं की?
    धन्यवाद

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  30. deepak ji bahut accha laga ek hi link apr kai link
    padhan assan rehte he

    badhai

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  31. लगता है तरक्की हो रही है। इस तरह के विवाद ऊंचाईयों को इंगित करते हैं। चर्चा मंच अब काफ़ी ऊंचाईयों को छूने लगा है। और पृकृति के नियम का अपवाद नही है। अन्य चर्चाएं भी इन्हीं ऊंचाईयों से गर्त को प्राप्त हुई हैं।

    हे परमपिता परमेश्वर, आपसे अनन्य विनम्र अनुरोध है कि इस मंच को थोडे समय और उम्र बख्सना क्योंकि आजकल बलागवाणी भी बंद हो चुका है और इसके अलावा सिर्फ़ ब्लाग4वार्ता ही जिंदा बचा है बाकी सब चर्चाएं तो दफ़न हो चुकी है। ऐसे यही एक सहारा है।

    हे चर्चा देवो/देवियो...आप सबसे यह समुद्रिय प्राणी ढ्पोरसंख अनुरोध करता है कि मेरी प्रार्थना पर गौर किया जाये। मैं अनेक समय से अपने खोल में बैठा आनंदित था पर आज यह सब देखकर मुझे अपने खोल से बाहर आना पडा।

    अगर किसी को यह टिप्पणी अशोभनीय लगे तो हटा दी जाये मुझे बुरा नही लगेगा, क्योंकि आजकल अपने अनुकुल टिप्पणि को स्थान नही मिलता।

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  32. चर्चा में नवीनता है

    इसे भी पढ़कर कुछ कहे :-
    (आपने भी कभी तो जीवन में बनाये होंगे नियम ??)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_19.html

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  33. चर्चा में नवीनता है

    इसे भी पढ़कर कुछ कहे :-
    (आपने भी कभी तो जीवन में बनाये होंगे नियम ??)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_19.html

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  34. dipakji,
    charchamanch par mera blog laane ke liye bahut bahut dhnyvad

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  35. चर्चा अच्छी लगी. रात गयी बात गयी. आज नया सबेरा है आओ हम सब मिलकर उसका अभिवादन करें.
    आभार

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  36. Deepakji,

    Aapki duniya kitni badi hai!! main to iske tip par baitha hoon. Sach to ye hai ki samay bhi nahi mil pata.

    Bahut -2 dhanyavad mere blog se dusroon ko rubroo karane ke liye

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  37. अब सोच रहे हैं कि टिप्पणी पहले दें या लिंक पर पहले जाएं:)

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  38. हमें तो दीपक द्वारा की गई चर्चा अच्छी ही लगी। नये लिंक्स देखने को मिले।
    आभार दीपक का भी और चर्चा मंच का भी।

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  39. दीपक जी,
    आपका चर्चा लगाने का तरीका सबसे जुदा है और मै इतनी देर से आयी उसके लिये माफ़ी चाहती हूँ क्योंकि मै बिज़ी चल रही थी।

    यहाँ इतना बडा विवाद खडा हो गया जानकर दुख हुआ ……………यही कामना करूँगी कि आगे इस प्रकार का कोई विवाद न हो…………कभी कभी छोटी छोटी बातों से गलतफ़हमी बढ जाती है और उग्र रूप धारण कर लेती है और हम चर्चाकारों को तो कम से कम इस तरफ़ जरूर ध्यान देना चाहिये तभी हम चर्चा सही और सार्थक तरीके से कर पायेंगे।

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  40. दीपक जी ......वैसे तो यह चर्चा मंच के चर्चाकारो का निजी मामला है .....पर एक पाठक की हसियत से और किसी दुसरे ब्लॉग पर एक चर्चा कार की हसियत से भी कुछ कहने का बहुत मन कर रहा है .........अगर मेरी कोई बात बुरी लग जाए तो ४ रोटी ज्यादा खा लीजियेगा ;-)........कल से आई फ्लू से ग्रसित हूँ सो पहले नहीं आ पाया !

    'ये चर्चा सिर्फ तभी पढ़ें, या इस पर सिर्फ तभी टिप्पणी करें जब आपको सच में इसमें कुछ नया दिखे यानि इसमें मिलने वाले वो ब्लॉग जिनपर आप कभी गए नहीं.. उनपर आप जाएँ. यदि सिर्फ चर्चा देखने भर को देखनी है तो इन चर्चाओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता.'

    आप अपने पाठक को कैसे निर्देशित कर सकते है कि वह आपको कैसे और क्यों पढ़े ?
    टिप्पणी करना या ना करना पाठक का अधिकार है सो इस मामले में भी आपका कहना नहीं बनता !
    नयापन निर्धारित करने का क्या मापदंड है ? जो आपके लिए नयापन है हो सकता है मेरे लिए पुराना हो !
    फिर जब यहाँ इतना विवाद खड़ा हो ही गया था कि शास्त्री जी ने इस मंच को बंद करने के बारे में भी लिख दिया तो क्या एक बार यहाँ आ कर अपनी बात कहना आपने जरूरी नहीं समझा !?!?
    आपके साथ के २ चर्चाकारो ने इस मंच पर चर्चा करने से भी मना कर दिया था और शायद दोनों आपसे काफी बड़े है कम से कम उम्र में तो है ही !
    दीपक जी कभी कभी हम यह सोच कर चुप रहते है कि बात खत्म हो गयी अब इस पर क्या कहना पर सच कुछ और ही होता है !!!
    इस मंच के एक पुराने पाठक की हैसियत से आपसे विनती है अपनी बात साफ़ करें .....खुले में !

    लगे हाथो एक शिकायत और .........कर ही देता हूँ .......बहुत बार मैंने आपकी पोस्ट अपनी ब्लॉग वार्ताओ में ली है और आप सूचित भी किया है पर आप नहीं आये वहाँ ....आते तो आप टिप्पणी तो जरूर ही करते पर ......आप की टिप्पणी तो मिली नहीं ......फिर मेरी चर्चाओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता............क्यों है ना ???

    शास्त्री जी, एक विनती है आपसे ......हलाकि आपसे मेरी बात हो चुकी है.......फिर भी .... इस चर्चा मंच रुपी परिवार के मुखिया आप है .........सभी सदस्यों का मान सम्मान बना रहे .....यह तो आपको ही देखना होगा हमेशा की तरह !! अगर परिवार में एकता ना रही तो परिवार टूटेगा .......बढेगा नहीं !!

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  41. आपकी कृपापूर्ण सूचना पर 'चर्चा मचं' देखा भी और पढा भी। प्रयास निस्‍सन्‍देह प्रशंसनीय है। साधुवाद।

    जिस विवाद के बारे में इतनी बातें हुई हैं वह 'चिन्‍दी का थान बन जाना' कहावत को चरितार्थ करता है। 'मुण्‍डे-मुण्‍डे मतिर्भिन्‍ना' के चलते ऐसे विवाद सहज और स्‍वाभाविक हैं। यह न तो पहला विवाद है और न ही अन्तिम। किन्‍तु क्षमा याचना और खेद प्रकाशन के बाद विवाद समाप्‍त मान लिया जाना चाहिए। उम्‍मीद है कि सब कुछ पूर्ववत सामान्‍य और सहज हो गया होगा। शास्‍त्रीजी ने निरस्‍तीकरण का अपना विचार निरस्‍त कर सामयिक विवेकशीलता बरती है। साधुवाद।

    मुझे विस्‍तारित करने तथा मेरा सम्‍मान बढाने के लिए कोटिश: धन्‍यवाद।

    तकनीक की जानकारी के मामले में सचमुच में 'शून्‍य' हँ। कुछ मित्रों ने बताया कि मेरे ब्‍लॉग की फीड नहीं मिल रही है। ऐसे मे आपने मेरा ब्‍लॉग कैसे प्राप्‍त कर लिया।

    फीड के बारे में मुझे क्‍या करना चाहिए, बताईएगा।

    यही कृपा भाव बनाए रखिएगा।

    कृपाकांक्षी,

    विष्‍णु

    ReplyDelete
  42. आपकी कृपापूर्ण सूचना पर 'चर्चा मचं' देखा भी और पढा भी। प्रयास निस्‍सन्‍देह प्रशंसनीय है। साधुवाद।

    जिस विवाद के बारे में इतनी बातें हुई हैं वह 'चिन्‍दी का थान बन जाना' कहावत को चरितार्थ करता है। 'मुण्‍डे-मुण्‍डे मतिर्भिन्‍ना' के चलते ऐसे विवाद सहज और स्‍वाभाविक हैं। यह न तो पहला विवाद है और न ही अन्तिम। किन्‍तु क्षमा याचना और खेद प्रकाशन के बाद विवाद समाप्‍त मान लिया जाना चाहिए। उम्‍मीद है कि सब कुछ पूर्ववत सामान्‍य और सहज हो गया होगा। शास्‍त्रीजी ने निरस्‍तीकरण का अपना विचार निरस्‍त कर सामयिक विवेकशीलता बरती है। साधुवाद।

    मुझे विस्‍तारित करने तथा मेरा सम्‍मान बढाने के लिए कोटिश: धन्‍यवाद।

    तकनीक की जानकारी के मामले में सचमुच में 'शून्‍य' हँ। कुछ मित्रों ने बताया कि मेरे ब्‍लॉग की फीड नहीं मिल रही है। ऐसे मे आपने मेरा ब्‍लॉग कैसे प्राप्‍त कर लिया।

    फीड के बारे में मुझे क्‍या करना चाहिए, बताईएगा।

    यही कृपा भाव बनाए रखिएगा।

    कृपाकांक्षी,

    विष्‍णु

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  43. मेरा नेट खराब था दो दिन ..लगता है बहुत कुछ हो गया यहाँ .दीपक ने शायद अनजाने ही वो कह दिया जो बाकी चर्चाकारों को आहत करना स्वाभाविक था .
    मेरे ख़याल से चर्चा पोस्ट की की जानी चाहिए न कि ये देख कर कि उसे लिखने वाला कौन है ..जान पहचान वाला ,या नया या पुराना .नए लोगों को चर्चा में शुमार करना जरुरी है वो अच्छी बात है परन्तु कोई भी इंसान जब कुछ पढता है और कुछ उसे प्रभावित करता है तो वो उसकी चर्चा करना चाहता है और सिर्फ इस वजह से कि वो उसे लिखने वाले जो जनता है इसलिए उसे चर्चा में शामिल न करे ये कहाँ का इन्साफ है .यहाँ भी कुछ अच्छे और पहचान के नाम दिखे जो दिखने ही चाहिए नए लोगों को भी तो पता लगे कि बाकि लोग क्या लिख रहे हैं .
    सभी चर्चाकार कितनी मेहनत से चर्चा करते हैं यह बात सब जानते हैं .और जो मेहनत करता है उसे तुम्हारी बात बुरी लगनी संभव थी .इसीलिए शायद संगीता दी को बात ज्यादा अखर गयी .इस मंच में उनके योगदान से इनकार नहीं किया जा सकता..

    अच्छा हुआ माफी मांग ली गई है और दे दी गई है .@दीपक तुम बहुत प्रतिभाशाली हो अच्छी चर्चा की है तुमने पर हमेशा याद रखना कि फलों से लड़ा हुआ पेड़ हमेशा झुका होता है.दूसरों को कम आंकना कभी अपने गुणों को नहीं बढा सकता..एक अच्छी चर्चा के लिए तुम्हें बधाई

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