Followers

Wednesday, September 07, 2016

हो गए हैं सब सिकन्दर इन दिनों ...चर्चा मंच ; 2458


मैं मुक्त हूँ !!!.. 

सीमा सदा सिंघल 

yashoda Agrawal 
--

गणेश वन्दना  

"गणेशोत्सव पर विशेष"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

poet kavi 

तेरे घर का आईना .... 

udaya veer singh 

श्रीपुर की महारानी वासटा की शिलालेखीय आज्ञा 

ब्लॉ.ललित शर्मा 

पहले वाली मोहब्‍बत.... 

रश्मि शर्मा 

अराल(अरल) सागर सूख गया - 

प्रतिभा सक्सेना 

देवा ओ देवा गणपति देवा 

Surendra Singh bhamboo 

मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती नीमच की घटना 

haresh Kumar 

अर्जुन को नहीं छाँट कर आये 

इस बार गुरु द्रोणाचार्य 

सुनो तो जरा सा फर्जी  

‘उलूक’ की एक और फर्जी बात 

सुशील कुमार जोशी 

बचपन व युवावस्था में भूख बढ़ाने का फार्मूला- 

GYanesh Kumar 

कब देगा तू मेरा साथ, 

Prem Farukhabadi 

हो गए हैं सब सिकन्दर इन दिनों ... 

Digamber Naswa 

नयी पहल पाँचवा कवि सम्मलेन 

विनोद कुमार पांडेय 

गुरू शिष्य 

Asha Saxena 

रविकर के दोहे 

रविकर 
जो बापू के चित्र के, पीछे रही लुकाय।
वही छिपकली रात में, मन भर जीव चबाय ।।

बेवकूफ बुजदिल सही, सही हमेशा पीर।

किन्तु रहा रिश्ता निभा, दिल का बड़ा अमीर।। 
--

10 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. सुन्दर चर्चा।
    आपका आभार आदरणीय रविकर जी।

    ReplyDelete
  3. बहुत बढ़िया बुधवारीय अंक रविकर जी । आभार 'उलूक' का सूत्र 'अर्जुन को नहीं छाँट कर आये इस बार गुरु द्रोणाचार्य' को स्थान देने के लिये ।

    ReplyDelete
  4. विविधता से पूर्ण चर्चा में मुझे भी सम्मिलित करने के लिये आभार ,आ. शास्त्री जी !

    ReplyDelete
  5. विविधता से पूर्ण चर्चा में मुझे भी सम्मिलित करने के लिये आभार ,आ. शास्त्री जी !

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति ...

    ReplyDelete
  7. बहुत बढ़ि‍या चर्चा..मेरी रचना शामि‍ल करने के लि‍ए आभार..धन्‍यवाद

    ReplyDelete
  8. प्रभावी चर्चा आज की ....
    आभार मुझे शामिल करने का आज की चर्चा में ...

    ReplyDelete
  9. आज लिखने को मन किया इस लिए लिख रहा हूँ..बहुत दिनों से ब्लॉग लेखन से हमलोग जुड़े है और अब हम खुद इस्पे कम आते है, अपने शिकायत लिख रखी है. सही है, पर इसका एक कारन ब्लॉग का असहज होना है...ज्यादातर लोग मोबाइल से उपयोग करते है पर मोबाइल पे ब्लॉग का खुलना आज भी सहज नहीं है..इसी लिए यह अप्रासंगिक होता जा रहा है..

    खैर मैं क्षमाप्रार्थी हूँ...अब नियमित रहूँगा..

    ReplyDelete
  10. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

विदेशी आक्रमणकारी बड़े निष्ठुर बड़े बर्बर; चर्चामंच 2816

जिन्हें थी जिंदगी प्यारी, बदल पुरखे जिए रविकर-   रविकर     "कुछ कहना है"   (1) विदेशी आक्रमणकारी बड़े निष्ठुर बड़े बर्...