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Friday, February 21, 2020

"मन का मैल मिटाओ" (चर्चा अंक -3618)

स्नेहिल अभिवादन
आज भारतवर्ष में महाशिवरात्रि की धूम मची है। हर छोटे-बड़े मंदिरों में भोले बाबा का जलाभिषेक हो रहा है। आप सभी को भी इस अलौकिक पर्व की हार्दिक बधाई। महाशिवरात्रि महादेव और माता पार्वती के विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है। बच्चे - बूढ़े सभी बड़े श्रद्धा भाव से व्रत रखते हैं,पूजन करते हैं किंतु यह महापर्व मात्र विवाहोत्सव नहीं है। यह पर्व है अपने अनंतरमन से समस्त विकार रुपी मैल को साफ़ करने का। अपनी आध्यात्मिक चेतना को जगाने का। काम, क्रोध, लोभ, ईष्या, मोह आदि पर विजय प्राप्त करने का।
परंतु साथ ही साथ एक और बात कहना चाहूंगी आस्था विश्वास का अपना एक महत्व है, पर कल के दिन हजारों लीटर दूध शिव जी के ऊपर चढ़ाया जाएगा उन्हें नहलाया जायेगा.. पर वह दूध कहीं न कहीं नाले में ही प्रवाहित हो जायेगा। एक तरह से कहा जाए तो वह दूध पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा.. कल के दिन कई ज़रूरतमंद लोग मंदिर के बाहर खड़े मिल जाएंगे।  बच्चे, बूढ़े, असहाय, लाचार क्यों न..? भगवान शिव के ऊपर थोड़ा-सा श्रद्धा के नाम पर दूध डालकर  बाक़ी बचा दूध इन ज़रूरतमंद लोगों को दे दिया जाये तो इससे बड़ा पुण्य और कुछ नहीं होगा..।
मन में धंसा मैल तब तक नहीं धुलेगा जब तक कि हम अपने अंदर की इंसानीयत को जगा न लें....
आइए चलते हैं आज की चर्चाओं के बीच......
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लुप्त हो गयी है खुद्दारी,
जन-गण-मन में है मक्कारी,
गद्दी पर बैठी गद्दारी,
देशभक्ति को जीवित कर दो,
खुदगर्ज़ी पर रोक लगाओ।
निद्रा-तन्द्रा दूर भगाओ।।
🍁🍂
विनाश-तंज़ प्रभुत्त्व का सुप्त-बोध लिये, 
सीमाहीन विस्तार की चाह सीये, 
सहज सभ्य शिष्ट जीवन नष्ट करने, 
ढहाने सभ्यता की कटी-छँटी बाड़ सरीखी
🍂🍁
हुई ओझल, कहीं तस्वीर कोई,
रंग ख्यालों में लिए, बनाऊं ताबीर कोई,
अजनबी, कोई रंग भरूँ!
🍂🍁

कदर तुझको नहीं मेरी,
तेरी खातिर सहा कितना,
मिली रुस्वाइयाँ फिर भी,
प्रीत - माला पिरोया हूँ ।
🍂🍁
वेदना

अश्रु बूँदों से सिंचित 
 श्वेत से थे कुछ -कुछ 
  रंगहीन .....
🍁🍂
 बसंत तेरे आगमन पर
कुहासे की कैद से अब
मुक्त रवि हर्षित हुआ
रश्मियों से जब मिला
तो मुस्कराई ये धरा भी
🍂🍁
गिर जाने पर हाथ बढ़ाकर उठा देना 
ऐसे शख़्स का मिल जाना
इस धरती की सबसे अद्भुत घटना है
कि ईश्वर को पता है ये दुनिया कैसे चलती है।
🍂
जाति धर्म निज स्वार्थ दे,गद्दारी का घाव ।
देश भक्ति ही धर्म हो ,रखे एकता भाव।
जन जन की वाणी बनो,अमर देश का नाम,
राजनीति को अब मिले ,एक नया आयाम।
भारत के निर्माण में ,बहे एकता  धार ।
रंग ...
🍂🍁
इतनी ही इंसानियत तुम्हरे दिल में हिलोरे मार रही है 
तो उस कलमुँहे को अपना दामाद क्यों नहीं बना लेते!"
"और आगी में डाल दो अपने सारे धर्म-शास्त्र और वेद-पुराणों की सीख!"  
🍂🍁
वेदना के पल
भूखे  पेट की  वेदना  चुभती शूल सम ह्रदय में 
सूखे स्तनों झिंझोडता बच्चा,पीर उठती ह्रदय में 
मजबूरियां मां की बताएं.कैसे ह्रदय हीन जगत को 
भूख की आग में जलती न जाने कितने बस्तियां__
वेदनाओं के इस मौन, निर्मम, शहर में........
.🍁🍂
जाने ये कौन चितेरा है ...इंद्रधनुष पर कविता..
ये कौन   तूलिका  है ऐसी - 
जो  ज़रा नजर नहीं आई है ? 
पर  पल भर में ही देखो   -
अम्बर  को सतरंगी कर  लाई है ?  
 धरा    को  कर हरित वसना 
🍂🍁
  "होती भी तो कौन सा मेरे कहने से झट बेच देते" 
प्रेम में परीक्षा लेते रहना हर लड़की का अधिकार है। 
🍂🍁
👉(एक कोना)
चलते चलते  एक छोटी सी घटना से आप सब का परिचय करवा रही हूँ,
जब पूरे देश में हिंदू - मुस्लिम झगड़े अपनी सीमाएं पार कर रहे हैं वहीं चंद अपवाद भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं।  यहाँ जो मैंने तस्वीर लगाई है। वह केरल के रहने वाले मुस्लिम दंपति की है जिनका नाम अब्दुल्ला है और साथ में है उनकी धर्मपत्नी जिनका नाम खदीजा है...केरल के कासरगोड के रहने वाले इस मुस्लिम दंपति ने एक हिंदू लड़की को वर्षो पहले गोद लिया था,
जब उसने अपने माता-पिता को खो दिया था।
वह उस समय दस साल की थी। अब  वह बाईस वर्ष की है,
उसके दत्तक माता-पिता ने सभी हिंदू  रीति-रिवाजों के साथ उसकी शादी एक हिंदू लड़के से  बड़ी धूमधाम से कर दी। 
आए दिन हिंदू-मुस्लिम  के नाम पर देश के टुकड़े-टुकड़े किये जाने के षड्यंत्र हो रहे हैं। धर्म - जाति से लैस घृणित विचारधारा देश की कौमी एकता को बहुत बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे समय में इस तरह की घटनाएं जब होती है तो दिल को कहीं सुकून मिलता है।  काश! फिर से हमारा देश पहले जैसा हो जाए।
🙏🍁🍂...
आज का सफर बस यहीं तक

  अगली शुक्रवार फिर मिलते हैं 
सधन्यवाद - अनीता लागुरी 'अनु '
🙏🍁🍂...

29 comments:

  1. महादेव की पूजा कृषि कार्य में एकाग्र भाव से लगना भी है । शिव के पास जितने साधन हैं, वे कृषि से संबंधित हैं । शीश पर जल कृषि की सिंचाई, वाहन नन्दी तथा त्रिशूल खेत जोतने वाले बैल एवं हल, गले में सर्प फसलों की रक्षा के लिए प्रयोग में आने वाली कीटनाशक दवा, शीश पर चन्द्रमा ऊर्जा के रूप में प्रयोग होने वाले उर्वरक के सूचक हैं । इन पदार्थों की समुचित उपलब्धता से खाद्यान्न के रूप में शक्ति मानी जाने वाली पार्वती ( अन्नपूर्णा ) से सम्बन्ध का आशय है ।
    अतः वासन्तिक मौसम में शिवरात्रि पर महादेव की आराधना के निहितार्थ पर दृष्टि डालने से स्पष्ट होता है कि भगवान शिव कृषिसंस्कृति के पोषक हैं । जीवन के आधार हैं , इसलिए सभी को प्रिय हैं।

    सुंदर संदेश देने वाली भूमिका के साथ रचनाओं का संकलन भी अनु जी आपने क्या खूब किया है। आप सभी को शिवरात्रि पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ।

    हम भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप को कुछ इस प्रकार भी समझ सकते हैं। उनका दायाँ भाग कर्म पथ और बाया भाग भाव पक्ष है, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की तरह।

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    1. आपकी विस्तारपूर्वक दी गई टिप्पणियां मुझे बेहद अच्छी लगती है... लेखन में अगर कुछ कमियां रह जाती है तो आप अपनी बातों से सरलता से उन कमियों या यह कहूँँ जहां मैंने ध्यान नहीं दिया आप ध्यान दिला देते हैं..
      भगवान शिव जी के बारे में मुझे जानकारी थी लेकिन आज आपकी प्रतिक्रिया में और भी बहुत सारी चीजें मुझे जानने को मिली हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर यह पंक्तियां बहुत अच्छी लगी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद शशि जी

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    2. महादेव की बहुत ही सुंदर व्याख्या की हैं आपने ,महादेव का सच्चा रूप और गुण तो यही हैं ,सभी गुणी जनों को महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई

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  2. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।

    अनीता लागुरी अनु जी।
    --
    आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  3. खूबसूरत चर्चा -प्रस्तुति प्रिय अनु । महाशिवरात्रि पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँँ । मेरी रचना को मंच पर स्थान देने हेतु हृदयतल से आभार ।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद शुभा जी आपको प्रस्तुति अच्छी लगी इसकी मुझे बेहद खुशी है..।

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    2. आदरणीया अनु जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मेरी लघुकथा "गटरेश्वर" को स्थान देने हेतु जो कि एक लघुकथा पुरस्कार हेतु नामित की गई है। सादर 'एकलव्य'  

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    3. . जी बहुत-बहुत धन्यवाद ... जी बधाई हो आपको..।

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    4. हार्दिक बधाई और ढेरों शुभकामनाएँ आदरणीय सर।
      सादर प्रणाम।

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  4. जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

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  5. प्रिय अनु ,बहुत ही सुंदर भूमिका के साथ साथ बेहतरीन समापन भी। दो बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्यों की ओर ध्यान दिलाया हैं आपने। आस्था तो हम रखते हैं मगर कोरी आस्था, जो आज के परिवेश में आडंबर सा लगता हैं ,और प्रेम का तो आकाल ही पड़ गया हैं चाहें वो ईश्वर के लिए हो या इंसानों के लिए। महादेव की पूजा अर्चना करें मगर दिल में सिर्फ प्रेम ,आस्था और विश्वास रख के ,ये आडंबर आज के समय में बर्बादी ही कही जाएगी।
    और दूसरी जो घटना आपने सुनाई हैं वो तो दिल को छू गई ,बस इसे मानवता कहते हैं। यकीनन आज भी धरा पर किसी ना किसी रूप में मानवता जिन्दा हैं तभी तो धरती माँ टिकी हैं। ढेरों शुभकामनाएं आपको इस सुंदर प्रस्तुति के लिए ,सभी रचनाएँ भी लाजबाब हैं ,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं नमन

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    1. .. जी बहुत-बहुत धन्यवाद कामिनी जी.. जी पूरी तरह से सहमत हूँ, आपकी बात से आस्था तो हम रखते हैं लेकिन कोरी आस्था.. मानवता से प्रेम करना ही वास्तव में सबसे बड़ी पूजा है ।जिसका फल हमें इसी जीवन में जरूर मिलता है... मैं दिल से आपको धन्यवाद करना चाहूंगी आपकी टिप्पणी ने मुझे बेहद सुकून पहुंचाया.. कुछ उदाहरण अगर हम समाज के सामने रखते हैं तो यकीनन चाहते हैं कि लोग अपने विचार वहाँँ जरूर प्रस्तुत करें परंतु जब अपेक्षित फल नहीं मिलता है तो थोड़ी निराशा जरूर होती है.. आप आई... अपने विचार रखें यह मेरे लिए वाकई में बहुत ही खुशी की बात है।
      यूँँ ही साथ बनाए रखिएगा धन्यवाद

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  6. बहुत सुंदर चर्चा, महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. .. जी आपको भी धन्यवाद और महाशिवरात्रि की आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएं

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  7. बहुत सुन्दर सार्थक चर्चा, शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं! मेरी रचना को साझा करने के लिए हार्दिक धन्य वाद

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    1. . बहुत-बहुत धन्यवाद उर्मिला जी आप आई मुझे बहुत अच्छा लगा यूँँ ही साथ बनाए रखिएगा धन्यवाद

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  8. महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ.
    बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण प्रिय अनु. आपने विचारणीय भूमिका में चिंतनीय सवाल खड़ा किया है.
    बेहतरीन रचनाएँ चुनी हैं आपने पढ़वाने के लिये. कड़ी मेहनत से तैयार प्रस्तुति. सभी रचनाकारों को बधाई.
    मेरी रचना शामिल करने के लिये आभार.

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    1. सर्वप्रथम तो आपको भी महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं और विवाह वर्षगांठ की भी बहुत ढेर सारी शुभकामनाएं.... कास ये मुझे कल पता रहता तो आपकी विवाह वर्षगांठ है तो जरूर इस मंच के द्वारा हम लोग कुछ न कुछ प्रयास करते पर अभी शाम को पता चली तो कुछ नहीं कर पा रही हूँ.... एक बार और आप दोनों को विवाह वर्षगांठ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं💐🎂💐🎂💐 आप दोनों की जोड़ी हमेशा सलामत रहे और आपको आज का संकलन पसंद आया इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद...!

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  9. बहुत सुंदर प्रस्तुति। भूमिका में उल्लेखित विचार वर्तमान संदर्भों में विचारणीय हैं। एक ज़माने में भारत में दुग्ध उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता था तो श्रद्धावश देवों का अभिषेक करना सहज था और आज की तरह दुनिया किसी ग्लोबल गांव की तरह नहीं थी जहाँ सूचनाएँ और ज्ञान आसानी से उपलब्ध नहीं थे।

    सरस एवं पठनीय रचनाओं का सुंदर समागम। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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    1. .. जी रविंद्र जी बिल्कुल सही कहा आपने .. विश्वास आस्था को बरकरार रखना चाहिए लेकिन जहां खाद्य पदार्थों की बात आती है तो हो सके तो उन्हें जरूरतमंद लोगों के बीच बाँट देना चाहिए आपकी प्रतिक्रिया बहुत ही अच्छी लगी बहुत बहुत धन्यवाद आपका..!

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    2. 'एक कोना' एक अभिनव प्रयोग है चर्चामंच पर। एक रोचक ध्यानाकर्षण घटना जिसका सामाजिक महत्त्व सराहनीय है। इसमें वर्णित घटना हमारी अंतरात्मा को जाग्रत करने वाली है। इसका क्रम जारी रहे। प्रशंसनीय प्रयास।

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    3. जी रवि जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका आपने मेरे इस कदम को सराहा.. चर्चामंच में हम रोज ही अपनी प्रस्तुतियां लगाते हैं थोड़ा सा अपने आसपास घट कुछ ज्वलंत घटनाओं को भी अगर हम चर्चा में शामिल कर लेंगे तो कुछ चर्चा उनकी भी हो जाएगी... धन्यवाद आपका।

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  10. बहुत सुंदर , प्रिय अनु | महाशिवरात्री की महिमा के साथ तुमने जिस शालीनता और विनम्रता से , आस्था के नाम पर दूध की बरबादी का जिक्र किया है , उसके बारे में हमें देर- सवेर सोचना ही होगा | यूँ आस्थाएं तर्कों पर भारी पड़ती है , पर इसका जवाब ' एक कोना ' में छुपा है | आत्मा सो परमात्मा | अर्थात हमें परहित सरस धर्म नहीं भाई -- वाले वाक्य पर अमल की जरूरत है और यदि हम वैसे भी भोलेबाबा की मूर्ति को दूध ना चढ़ाकर उसे किसी जरूरतमंद को दे दें क्या वे हमसे रुष्ट हो जायेंगे ? कदापि नहीं | ईश्वर ने अपनी संतानों पर सदा अनुग्रह किया है | और अपनी संतानों की दूसरी संतति के लिए ये दया , करुणा का भाव देख कर ईश्वर की दृष्टि में हमारे लिए जरुर प्यार रहेगा | आज चढ़ावे के नाम पर जो अन्न और दूध की बर्बादी हो रही है , उसे रोकना होगा ताकि जो लोग भूखे पेट सोते हैं , ये अन्न , दूध उनका भी पेट भर सके | आज की सभी रचनाएँ बहुत प्यारी और पठनीय हैं | मेरी पुरानी रचना को मंच की प्रस्तुति का हिस्सा बनाने के लिए कोटि आभार | तुम्हें बहुत शुभकामनाएं इस प्यारी सी प्रस्तुती के लिए

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  11. . बहुत-बहुत धन्यवाद रेणु दी,
    ना जाने क्यों आपके आगमन की हमेशा प्रतीक्षा रहती है (मतलब मैं अपनी पोस्ट की बात कर रही हूँँ)आपकी विस्तार पूर्वक की गई टिप्पणियाँ मेरे किए गए कार्य के सामने बहुत बड़ी हो जाती है जब आप इतने प्यार से अपने विचार रखती हैं..💐 एक लेखक की साधना सफल हो जाती है जब वह प्रशंसा के दो बोल सुनता है.. दोबारा से उसके लिखने की इच्छा तेज हो जाती है जब वह अपने पाठक मित्रों को अपनी रचना द्वारा प्रभावित कर लेता है ऐसा ही कुछ महसूस किया था मैंने जब आपने मेरी बाबा वाली कविता पर आकर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया रखी थी जो मुझे आज भी याद है .. रेणु दी चर्चामंच हमारे साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र है परंतु यहां हम अपने विचारों का आदान-प्रदान भी बखूबी करते हैं... बहुत अच्छा लगता है जब भी आप से बातें होती है यूं ही साथ बनाए रखिएगा बहुत-बहुत धन्यवाद आपका..!

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  12. आदरणीय दीदी जी सादर प्रणाम 🙏
    बहुत सुंदर प्रस्तुति है और सभी रचनाएँ भी बहुत सुंदर। सार्थक भूमिका संग ' एक कोना ' के ज़रिये आपने मंच को एक नया मोड़ दिया है।

    आज जब धर्म मजहब के नाम पर लोगों के मन में घृणा का विषैला बीजारोपण किया जा रहा है तब एसी घटनाए आशा का दीप जलाकर अमावस से लड़ने का प्रयास करती है। मजहबी बैर आज समाज के लिए एक लाइलाज बीमारी के समान फैलती जा रही है। ऐसे में ये घटनाएँ मानवता को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।

    आस्था और धर्म के नाम पर भी आज हम निरंतर भटक रहे हैं और अंधविश्वास के मारे अपना विवेक खोते जा रहे। 'तेरा तुझको अर्पण ' बहुत सुंदर भाव है किंतु इसकी आड़ में जब हम अन्न,दूध आदि को चढ़ावे के नाम पर बर्बाद कर देते हैं और वही मंदिर की चौखट पर कोई बालक भूख से छटपटा कर मृत्यु को प्राप्त हो जाए तब किसे उस चढ़ावे का फल प्राप्त होगा और कौन से भगवान प्रसन्न होंगे। सही अर्थों में सच्ची पूजा मनुष्यता की रक्षा और सेवा ही है। परोपकार ही परम धर्म है। सब जीवों को आदर और प्रेम देना ही ईश्वर की आराधना है और प्रकृति की रक्षा ही ईश्वर को आभार व्यक्त करना।

    महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व की आप सभी को खूब बधाई। देर से आने के लिए क्षमा करिएगा। ॐ नमः शिवाय 🙏

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  13. "मन का मैल मिटाओ" शीर्षक पर आधारित भूमिका और समापन दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण हैं सच में आस्था के नाम पर दूध की बरबादी से उचित होता वह दूध जरूरत मन्दों को दिया जाता और इसी तरह हिन्दू मुस्लिम और जातिवाद को बढावा देने वाले एक नजर ऐसे लोगों को भी देखें जो इन्सानियत को महत्व देते हैं और हाँ अपने देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है मजहब और जातिवाद सिर्फ़ सियासी खेल हैं और उनका बोलबाला बढ़ाना खरीदी हुई मीडिया का काम....अपने भारत की सही सच्ची एक कोना के जरिए के जरिए आपने दिखाने की शानदार कोशिश की है और साथ में हम भारतीयों के लिए संदेश शीर्षक में पर्याप्त है मल का मैल मिटाओ आस्था के नाम पर भी और मजहब केनाम पर भी

    सभी रचनाएंं एक से बढकर एक हैं सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं मेरी रचना को भी यहाँ स्थान देने के लिए तहेदिल से धन्यवाद आपका...
    कल सारी रचनाओं का रसास्वादन करते करते यहाँ
    प्रतिक्रिया लिखने का समय न निकाल पायी इसके लिए क्षमा...।

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  14. समय को उकेरते शब्द चित्रों से सजी इस महफ़िल का हर नगीना इंसानियत की राहें रोशन कर रहा है उन सभी को ढ़ेरो शुभकामनाएं । मुझे इस रोशनीसे रूबरू कराने के लिए चर्चामंच आपको बेहद शुक्रिया।

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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