मित्रों!
बसन्त के आगमन के साथ ही देश में शिवरात्रि की धूम मच गयी है, शिवमन्दिरों में हलचल बढ़ गयी है। जहाँ साफ-सफाई और रँगाईपुताई का काम अपने अन्तिम चरण में है।
हमारे देश के प्रधानमन्त्री का भी सन्देश यही है कि वतन में चारों ओर साफ-सुथरा परिवेश हो। चारों ओर हरियाली हो।
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आज प्रत्येक नगर में बड़े-बड़े जाम लगने लगे हैं। जिसका कारण जनसंख्या वृद्धि तो है ही, साथ ही हमारा भी इसमें योगदान कम नहीं है। हम लोग आये दिन पर्वों पर या विरोध जाहिर करने हेतु शक्ति प्रदर्शन करने के लिए जुलूस निकालते हैं, जिसके कारण जाम लगता है और जन-जीवन को बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। मेरा सुझाव यह है कि अपना विरोध प्रकट करने के लिए नगर का एक स्थान निश्चित कर लें। जिससे कि आम जनता को परेशानी न हो।
हमारे देश के प्रधानमन्त्री का भी सन्देश यही है कि वतन में चारों ओर साफ-सुथरा परिवेश हो। चारों ओर हरियाली हो।
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आज प्रत्येक नगर में बड़े-बड़े जाम लगने लगे हैं। जिसका कारण जनसंख्या वृद्धि तो है ही, साथ ही हमारा भी इसमें योगदान कम नहीं है। हम लोग आये दिन पर्वों पर या विरोध जाहिर करने हेतु शक्ति प्रदर्शन करने के लिए जुलूस निकालते हैं, जिसके कारण जाम लगता है और जन-जीवन को बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। मेरा सुझाव यह है कि अपना विरोध प्रकट करने के लिए नगर का एक स्थान निश्चित कर लें। जिससे कि आम जनता को परेशानी न हो।
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बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ अद्यतन लिंक।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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देखिए मेरी पसन्द के कुछ अद्यतन लिंक।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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जयन्ती प्रसाद शर्मा, मन के वातायन
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कठिन जीवन के बरक्स
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जीवन कभी किसी दौर में 'आसान' नहीं रहा है। न तब का दौर, जब सोशल मीडिया और इंटरनेट नहीं था, आसान था। न अब, जब सोशल मीडिया और इंटरनेट जीवन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं, आसान है। जीवन को आसान मान या समझ लेना, हमारी खामख्याली है। जीवन का ऐसा कोई मोड़ नहीं, जहां संघर्ष न हो...
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शब्दों की मुस्कुराहट :)
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ये 'लभ लेटर' जरूर पढ़ना
फिलहाल तुमको बहुत मिस कर रहा हूं। चिट्ठी भेजने का नहीं, तुमसे बतियाने का मूड था। लेकिन बतियाए कैसे? जबसे तुम्हारा मोबाइल छिनाया है, बात भी तो नहीं हुई। मने दोसर उपाय का है। वैसे दिल का हाल लिखकर बताने में जो मजा है। उतना फोन पर बतियाने में नहीं। कल कइसहु तुम्हारे पास हेमवा से चिट्ठी भेज देंगे....
फिलहाल तुमको बहुत मिस कर रहा हूं। चिट्ठी भेजने का नहीं, तुमसे बतियाने का मूड था। लेकिन बतियाए कैसे? जबसे तुम्हारा मोबाइल छिनाया है, बात भी तो नहीं हुई। मने दोसर उपाय का है। वैसे दिल का हाल लिखकर बताने में जो मजा है। उतना फोन पर बतियाने में नहीं। कल कइसहु तुम्हारे पास हेमवा से चिट्ठी भेज देंगे....
हिंदी के लास्ट परीक्षा के साथ हमारा आईएससी का एक्जाम बीत गया। अंगरेजी आ केमेस्ट्री तनि कमजोर गया है। मने चिंता की बात नहीं है। प्रैक्टिकल का नंबर बढ़ाने के लिए कॉलेज से मैनेज कर लिए हैं। मम्मी भी गांव के तीन पेड़ियां वाले जीन बाबा की भखौती भाखी है। हमारे लिए आछा नम्बर से पास करना, जीवन-मरण का सवाल है। पापा जी बोल दिए हैं कि रिजल्ट में फस्ट डिवीजन से कम लाया। तो मामा जी के संगे लुधियाना कम्बल फैक्ट्री में भेज देंगे, काम सीखे...
मेघवाणी Meghvani
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anita _sudhir, काव्य कूची
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Pratibha Katiyar, प्रतिभा की दुनिया ...
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इष्ट देव सांकृत्यायन, इयत्ता
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मेरे पास कुछ
कांच के टुकड़े हैं
पर उनमें
प्रतिबिंब नहीं दिखता
पर कभी
फीका महसूस हो
तो उन्हें धूप में
रंग देती हूं
आशा बिष्ट, शब्द अनवरत...!!!
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sangita puri, गत्यात्मक ज्योतिष -
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मत बनाओ
लकीरों के दायरे
जानते तो हो…
लीक पर चलना
हर किसी को
कब और कहाँ आता है...
Meena Bhardwaj, मंथन
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Kamini Sinha, मेरी नज़र से
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निगलो तो ज़हरइसलिये सजा लिया
बिल्कुल नीलकंठ की तरह
अपने कंठ में
अब ये नीली सी आभा
मेरे कंठ की
आत्ममुग्धा, मेरे मन का एक कोना
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चर्चा मंच पर प्रत्येक शनिवार को
विषय विशेष पर आधारित चर्चा
"शब्द-सृजन" के अन्तर्गत
श्रीमती अनीता सैनी द्वारा प्रस्तुत की जायेगी।
आगामी शब्द-सृजन-9 का विषय होगा -
विषय विशेष पर आधारित चर्चा
"शब्द-सृजन" के अन्तर्गत
श्रीमती अनीता सैनी द्वारा प्रस्तुत की जायेगी।
आगामी शब्द-सृजन-9 का विषय होगा -
'मेंहदी' / 'हिना'
इस विषय पर अपनी रचना का लिंक सोमवार से शुक्रवार
(शाम 5 बजे तक ) चर्चामंच की प्रस्तुति के
कॉमेंट बॉक्स में भी प्रकाशित कर सकते हैं।
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गुरुजी, आज भूमिका में आज आपने जाम की समस्या पर प्रकाश डाला है।
जवाब देंहटाएंसड़कों पर अनेक कारणों से जाम लग रहे हैं। एंबुलेंस और स्कूली वाहन इसमें फंस जा रहे हैं।
जैसे--
।
- छोटी-छोटी घटनाओं को लेकर भी आक्रोशित लोग सड़क जाम कर देते हैं ।
- मनुष्य की लोलुपता बढ़ी है , वह सड़क के एक हिस्से पर कब्जा कर अपनी दुकान सजा ले रहा है। पटरियाँ तो गायब हैं।
- सड़कों पर धरना - प्रदर्शन एवं जुलूस , यह जनशक्ति प्रदर्शन कर ऐसे लोग जनता को ही कष्ट देते हैं।
- विवाह- बरात में सड़कों पर महिलाओं का नृत्य , जिसे देखने तमाशाई जुट जाते हैं।
- बड़-बड़े मॉल और मैरिज हॉल सड़कों के किनारे बने तो हैं। लेकिन पार्किंग की सुविधा नहीं है । जिस कारण वाहन सड़कों की ओर बेतरतीब खड़े रहते हैं।
- वन वे ट्रेफिक का जब कभी उल्लंघन होता है तब भीषण जाम लग जाता है । प्रभावशाली लोग छोटे शहरों में ऐसा करते हैं , क्यों कि वाहनों के चालान होने का खतरा यहाँ नहीं होता।
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जल्दी निकलने के लिए वाहन एक दूसरे को ओवरटेक करते हैं और जाम लग जाता है।
बहरहाल, आज मंच पर आपने गद्य लेखन को भी भरपूर सम्मान दिया है।
इसी के साथ सभी को प्रणाम
चर्चामंच की यही तो विशेषता है , मुझ जैसे साधारण लेखकों के गद्य को भी यहाँ सम्मान मिल रहा है।
जवाब देंहटाएंबेहतरीन रचनाओं को संकलित करती इस अंक हेतु शुभकामनाएँ ।
जवाब देंहटाएंशुभ प्रभात
सुप्रभात
जवाब देंहटाएंउम्दा लिंक्ससे सजा आज का चर्चामंच |मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद सर |
खूबसूरत लिक्स......फूर्सत मिलते ही पढ़ना चाहूँगी....मेरी रचना को स्थान देने के लिये शुक्रिया
जवाब देंहटाएंसशक्त समसामयिक भूमिका के साथ विविधतापूर्ण लिंक्स से पुष्प गुच्छ सी सजी अत्यंत सुन्दर प्रस्तुति । मुझे इस प्रस्तुति में स्थान देने हेतु सादर आभार ।
जवाब देंहटाएंबहुत ही सार्थक लिंक्स, आभार.
जवाब देंहटाएंरामराम
बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंबेहतरीन चर्चा अंक सर ,लाज़बाब लिंकों से सजी सुंदर प्रस्तुति ,सभी रचनाकरों को हार्दिक शुभकामनाएं ,मेरी रचना को स्थान देने के लिए हृदयतल से आभार ,सादर नमस्कार आपको
जवाब देंहटाएंप्रणाम शास्त्री जी, आपने नीम की छांव के इस संकलन में जो प्रस्तावना लिखी वह मन को छू गई, कि प्रदूषण व जनसंख्या नियंत्रण पर हमें स्वयं ही सोचना होगा वरना जो भयावह स्थिति के लिए हम स्वयं को कभी माफ नहीं कर पायेंगे। आपका आभार कि महत्वपूर्ण ब्लॉग्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर आप उपलब्ध करवा रहे हैं। सादर प्रणाम
जवाब देंहटाएं. प्रणाम आदरणीय .....विचारणीय भूमिका आपने लिखी है जाम की समस्या बहुत ही व्याकुल कर देती है खासकर जब हमें कहीं जाना होता है या इंटरव्यू हो या फिर स्कूल हो ऑफिस हो इस तरह की कोई भी आवश्यक कारण होता परंतु अगर हम जाम में फंस जाए तो सब कुछ गलत हो जाता है गुस्सा तो आता है बेफिजूल में जाम लगाने वालों के ऊपर में.. धरना प्रदर्शन के लिए अलग जगह को चुनना चाहिए जहां आप भी आराम से धरना प्रदर्शन कर सके और राहगीरों को भी कोई परेशानी ना हो हमेशा की तरह ही बहुत ही सुंदर संकलन आपने तैयार किया है
जवाब देंहटाएंबेहतरीन संकलन
जवाब देंहटाएंरचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार
साथी रचनाकार को हार्दिक शुभकामनाएं
बहुत ही अच्छी पहल है आपकी। धन्यवाद।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण आदरणीय शास्त्री जी द्वारा। बेहतरीन रचनाओं का चयन। सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।
जवाब देंहटाएंआदरणीय शास्त्री जी,
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर आज की चर्चा मंच शादी मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार👏👏👏👏
प्रणाम
जवाब देंहटाएंमेरे शब्दों को स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
सादर
बहुत सुंदर प्रस्तुति. आदरणीय शास्त्री जी ने श्रमसाध्य प्रस्तुति में नये रचनाकारों को स्थान दिया है जो सराहनीय है. बेहतरीन रचनाओं का चयन करते हुए प्रेरक सामयिक भूमिका लिखी है.
जवाब देंहटाएंसभी रचनाकारों को बधाई.
Very nice post.
जवाब देंहटाएंSugar & Coco