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Friday, October 01, 2021

'रेत के रिश्ते' (चर्चा अंक-4205)

सादर अभिवादन। 

शनिवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

2 अक्टूबर 1869 को जन्मे मोहनदास करमचंद गाँधी जी भारत में 'बापू' के नाम से जाने जाते हैं।

15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 अक्टूबर को 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' घोषित किया था। अहिंसा, सत्याग्रह, अनशन, सत्य, सद्भाव जैसे लोकतान्त्रिक मूल्य बापू ने जीवनभर विकसित किए और अंत में 30 जनवरी 1948 को हिंसा के शिकार हुए।अपने जीवन में ही स्वतंत्रता प्राप्ति के लक्ष्य को पाकर उन्हें भारत विभाजन की भयावह त्रासदी का गवाह बनना पड़ा।आज भारत में गांधीवाद और गाँधी दर्शन के प्रति आम भारतियों का दृष्टिकोण उदासीनता से भरा है वहीं दुनिया के 190 से अधिक देश गांधीवाद पर शोध कर रहे है। भारत की राजनीति गाँधी जी को लेकर अनेक अंतरविरोधों से भरी हुई है।

गाँधी जयंती पर बापू और लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर शास्त्री जी को सादर नमन।

 बापू के विचार भारतीय मनीषा का ख़ूबसूरत गहना हैं।

-अनीता सैनी 'दीप्ति'

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-

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दोहे "माता जी का श्राद्ध" 
कुर्सी पर रोप दिया है
उन्होंने मुझे मेरी जमीन से उखाड़ कर
कुंकुम की हथेली
छाप दी है उन्होंने
मेरे दिल के दाहिने किवाड़ पर।
अभ्यस्त भी हूँ
व्यस्त भी हूँ
और मस्त भी हूँ
कुहरे में डूबी पगडंडी ,
सूखे पत्तों पर चलने से चरमराहट ।

अलसाए से कदमों से चहलकदमी ,
जगजीत सिंह की ग़ज़लों की गुनगुनाहट ।
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वक़्त के दरिया में तिनके सा बहा जाता हूँ,
कोई मौजे नही उठती कोई बरसात नही होती,
बेरंग बेनूर बड़ी बेशर्म सी दौड़ धूप में मसरुख होगया हूँ,
किसी के जाने से ज़िन्दगी अब उस तरह दुस्वार नही होती,
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माना कि जमाने में मुश्किलों है बहुत ,
कुछ सुलझती है कुछ जाती है उलझ ,
हर समस्या से मिलती नहीं  निजात है  ,
समझौता कर रहना पड़ता साथ है ,
औखली में सर अपना क्यों पड़वाते  हो ।........
तु दर्द बांट रहा है ऐसे                    
जैसे मोतीयों से सनी थाल फिरा रहा है कोई 
सब कुछ वैसा ही है कुछ बदला तो नहीं,
सोचता हूँ कहीं तु भी दो मुखों वाला तो नहीं।
  चंदा-सूरज
  मुट्ठी में बाँध लिए 
 सागर सारे
 पर्वत नाप लिए 
 अँधियारों पे
 विजय पा गए  हो
 उजालों में क्यूँ
 यूँ भरमा गए हो ?
मेरी स्मृति का आकाश अब रिक्त है
लिखनी होगी नयी इबारत फिर से
नव तरु नव पल्लव नव शिशु सम
मैं भी जी जाऊँ फिर से
--

अब गाड़ी पटरी पर आयी

जीवन फिर से चल निकला है,

काम के साथ और भी कुछ है

हर मुश्किल का हल निकला है !

--

 उबले आलू को छील कर कद्दूकस कर लीजिए। 
• परात में गेहूं का आटा लीजिए। इसमें कद्दुकस किया हुआ आलू, नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और कटा हुआ हरा धनिया डाल दीजिए। अजवायन को हाथ से मसल कर डालिए। ऐसा करने से अजवायन का स्वाद बढ जाता है। आटे में 1 टी स्पून तेल का मोयन डालिए। हमने इसमें उबले आलू का इस्तेमाल किया है। इसलिए मोयन बहुत कम डालना पड़ता है। 
• सभी सामग्री को अच्छे से मिला लीजिए। सामग्री को मिलाने के बाद आप देखेंगे कि आलू की वजह से आटे का लड्डू के मिश्रण जैसा (चित्र 1) बंध रहा है। मतलब ये कि आटे को भिगोने के लिए हमें बहुत ही कम पानी की आवश्यकता होगी। बिल्कुल थोड़ा-थोड़ा पानी डाल कर सख्त (चित्र 2) आटा गुंथ लीजिए। 
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आज का सफ़र यहीं तक 
फिर मिलेंगे 
गामी अंक में 

9 comments:

  1. मेरी पोस्‍ट के शीर्षक को आज के मंच का शीर्षक बनाकर सम्‍मान देने के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।
    'माताजी का श्राध्‍द' के दोहे मन को छू गए।

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  2. सुप्रभात,
    दिन आ आरंभ कविताओँ से भरी सुंदर चर्चा से,इससे अच्छा कुछ नही हो सकता।
    बापू को शत शत नमन।
    आभार

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  3. आदणीय नमस्कार !
    मेरी रचना अपने मंच साझा करने के लिए आपका सह सम्मान धन्यवाद !
    कृप्या इसे भी देखें और अपनी अमुल्य प्रतिक्रिया देने का कष्ट करें - हवस कि तरक्की । हाँ औरत हूँ मैं । उम्मीदों कि नदी।
    क्योंकि आपकी प्रतिक्रिया मेरी लिए ऊर्जा तुल्य हैं।
    धन्यवाद !

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  4. आदरणीय अनीता मेम नमस्ते ,
    मेरी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा
    'रेत के रिश्ते' (चर्चा अंक-४२०५) पर शामिल करने के लिए सादर धन्यवाद ।

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  5. सभी प्रविष्ठियां बेहतरीन और सुन्दर है , सभी आदरणीय को बधाइयां एवं शुभकामनाएं ।

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  6. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति
    सभी पाठकों को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं
    मेरी पोस्ट का लिंक लगाने के लिए आपका आभार आदरणीया

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  7. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा अंक में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद,अनिता।

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  8. बहुत उत्कृष्ट तथा पठनीय सूत्रों से सजी चर्चा प्रस्तुति, बहुत शुभकामनाएं अनीता जी ।

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  9. बहुत बहुत सुंदर प्रस्तुति, शीर्षक बहुत आकर्षक, दोनों सितारों के जन्मदिन पर सुंदर, सार्थक भुमिका।
    शानदार लिंक संकलित कर के पढ़वाने के लिए हृदय से आभार।
    चर्चा बहुत आकर्षक रही,सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए हृदय से आभार।
    सादर सस्नेह।

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