Followers

Tuesday, October 19, 2021

"तुम पंखुरिया फैलाओ तो" (चर्चा अंक4222)

सादर अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक आदरणीय शास्त्री सर की रचना से )

 बिना किसी भूमिका के 

चलते हैं,आज की कुछ खास रचनाओं की ओर.....

********

गीत "तुम पंखुरिया फैलाओ तो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जलने को परवाना आतुरआशा के दीप जलाओ तो।
कब से बैठा प्यासा चातकगगरी से जल छलकाओ तो।।
--
मधुवन में महक समाई हैकलियों में यौवन सा छाया,
मस्ती में दीवाना होकरभँवरा उपवन में मँडराया,
*****

 भाओं का गुलदस्ता....

राजनीति अब चौसर बनी 
  नेता सारे बने खिलाड़ी
 चुनाव युद्ध का बिगुल बजा
 छल प्रपंच घोड़ाऔरसिपाही
 शकुनी दुर्योधन,बने खिलाड़ी
*****
लेकिन सच है पार शब्द के

कुदरत अपने गहन मौन में

निशदिन उसकी खबर दे रही,

सूक्ष्म इशारे करे विपिन भी 

गुपचुप वन की डगर कह रही ! 

***

विदा
जब कोई आपके जीवन में
बहुत सारे प्यार के साथ
दस्तक देता है
तो आप खिल जाते है
बसंत सा महकने लगता है जीवन
लेकिन जब विदा का वक्त आता है
तो क्यो विदा नहीं दे पाते ?
जब आगमन का स्वागत था 
तो विदा का क्यो नहीं ?
*****
भमर क्यों फूलों पर मंडराते

उनके मोह में बंध कर रह जाते

उन पुष्पों में ऐसे बंधते

कभी  बंधन मुक्त न हो पाते |

तुमसे तितलियाँ हैं बुद्धिमान बहुत

पुष्पों से मधु रस का आनंद लेतीं

और दूसरे के पास उड़ जातीं

होती स्वतंत्र  किसी बंधन  में न बंधती |

इतनी मोहक रंगबिरंगी तितलियाँ जब उड़तीं 

****

सुरभित उपहार  होगा थामनेवाला, बड़ी उम्मीद से तकती*****
लिव इन रिलेशनशिप

सात फेरे बोझ लगते

नीतियों के वस्त्र उतरें

जो नयी पीढ़ी करे अब

रीतियाँ सम्बन्ध कुतरें

इस क्षणिक अनुबंध को अब

देखती नित ही कचहरी।।

*****

दांस्ता-ए- जिन्दगी जब जिंदगी सपनों  से पहले 
पूरी होने वाली होती है, 
तब सपने नहीं, 
सिर्फ ख्वाहिशे 
पूरी करने की चाह रहे जाती है! 
जब जिंदगी पेड़ पर लगे 
उस सूखे पत्ते सी हो जाती है, 
जिसकी जिंदगी तो होती है 

*****

टिप्पणी (कहानी)
अरे भाई साहब, कोई ट्रेन छूट रही थी क्या जो कहानी को एकदम से पूरा कर दिया। क्या यार पता ही नहीं चला।"
हिंदी पाठकों द्वारा सबसे अधिक पढ़े जाने वाले वेबसाइट 'प्रतिलिपि' पर प्रकाशित मेरी कहानी "मुस्कान को घिरने दो" पर आई इस टिप्पणी को पढ़कर पहले मुझे बहुत गुस्सा आया। अभी तक किसी पाठक ने मेरी इस कहानी पर इस तरह की टिप्पणी नहीं दी थी।

*********
आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दें
आपका दिन मंगलमय हो 
कामिनी सिन्हा 




10 comments:

  1. आभार सहित धन्यवाद कामिनी जी आज के अंक में मेरी रचना को स्थान देने के लिए |उम्दा लिंक्स |

    ReplyDelete
  2. सुप्रभात☺🌹
    बहुत ही उम्दा प्रस्तुति मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद🙏

    ReplyDelete
  3. अच्छे लिंकों के साथ सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

    ReplyDelete
  4. शुभकामनाएँ, साहित्य की अविरल धारा को बहाता हुआ सुंदर अंक, आभार!

    ReplyDelete
  5. सुंदर पठनीय रचनाओं से सज्जित अंक,बहुत शुभकामनाएं कामिनी जी 💐💐

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन लिंक.....आभार सहित धन्यवाद आपका, मुझे यहां स्थान देने के लिये

    ReplyDelete
  7. बेहतरीन लिंक
    मेरी रचना को स्थान देने के लिये हार्दिक आभार

    ReplyDelete
  8. आ कामिनी जी, पठनीय रचनाओं के चयन से चर्चा काल सार्थक हुआ। आपका हार्दिक साधुवाद!--ब्रजेंद्रनाथ

    ReplyDelete
  9. आप सभी को तहेदिल से शुक्रिया एवं सादर नमस्कार

    ReplyDelete
  10. पठनीय रचनाओं से सज्जित अंक

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।