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Wednesday, October 06, 2021

"पितृपक्ष में कीजिए, वन्दन-पूजा-जाप" (चर्चा अंक-4209)

मित्रों! 

बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

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दोहे "पितृपक्ष में कीजिए, वन्दन-पूजा-जाप" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

श्रद्धा में मत कीजिए
कोई वाद-विवाद।
श्रद्धा ही तो श्राद्ध कीहोती है बुनियाद।।
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सबके अपने ढंग हैंसबके अलग रिवाज।
श्राद्ध पक्ष में कीजिएविधि-विधान से काज।।

उच्चारण 

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फेसबुक - ह्वाटसप और इंस्टाग्राम के अचानक बंद होने पर... 

विशाल चर्चित (Vishaal Charchchit) 

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किताब परिचय: खूनी तख्त 

एक बुक जर्नल 

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खण्डित वीणा 

मन की वीणा - कुसुम कोठारी। 

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Watch: हवेली भगत सिंह- जंग-एआज़ादी का सबसे पवित्र तीर्थ 

देशनामा 

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क्या खोया क्या पाया 

इस वृहद संसार में
यूँ ही भटकती  रही अपनी 
चाह की तलाश में 
कभी सोचा न था यह मार्ग 
इतना दुर्गम होगा 
मरुभूमि में मृग मारीचिका की
होगा  तलाश जैसा

Akanksha -Asha Lata Saxena 

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डॉक्टर 

अस्पताल का डॉक्टर

हमेशा कहता था 

कि मैं उसके लिए 

बस एक मरीज़ हूँ,

न इससे ज़्यादा,

न  इससे कम.

कविताएँ 

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मैं उस वक़्त सबसे असहाय होती हूंँ! 

सबसे कमजोर व असहाय 
शख़्स खुद को महसूस करती हूंँ, 
जब रोते बच्चे के आंखों से 
आंसू नहीं ले पाती हूंँ! 

स्वतंत्र आवाज़ 

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वे पत्रोत्तर देने के लिए लापता का पता तलाश करते थे 

दादा जबसे नीमच निवासी हुए तब से ही उनसे सम्पर्क हो गया था। अब तो यह भी याद नहीं कि नीमच में उनसे पहली मुलाकात कब, कैसे, किसके साथ हुई थी। लेकिन जब तक वे नीमच में रहे तब तक सप्ताह में दो-तीन बार तो उनसे मिलना होता ही था। उनसे हुई प्रत्येक मुलाकात एक यादगार संस्मरण होती थी।

मेरी चिट्ठियाँ पोस्ट कर दीं?

पत्राचार दादा की पहचान था। मिलनेवाले प्रत्येक पत्र का जवाब देना उनका स्वभाव था। यदि कोई अपना पता नहीं लिखता तो दादा परेशान हो जाते। पत्र लिखनेवाला यदि आसपास के गाँव-कस्बे का होता तो अपने मिलनेवालों से उसका अता-पता जानने की कोशिश करते। वे कहते थे कि पत्र का जवाब देना जिम्मेदारी ही नहीं, धर्म है। पत्र भेजनेवाला, डाक के डब्बे में पत्र डालते ही जवाब की प्रतीक्षा करने लगता है। दादा ने कभी साफ-साफ तो नहीं कहा लेकिन अब मैं अन्दाज लगाता हूँ कि मिलनेवाले पत्र दादा को सक्रिय बने रहने में मदद करते थे।  

एकोऽहम् 

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नभ के रंग 

1
बढ़े तपिश
समाने लगे फिर
बिन्दु में सिंधु ।
2
आई जो आँधी
लो तिनका-तिनका
हुआ बसेरा ।

ज्योति-कलश 

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एक ग़ज़ल-फ़साना ग़ज़ल में था 

चित्र साभार गूगल

तन्हाइयों में क़ैद था आँसू भी जल में था

ग़म भी तमाम रंग में खिलते कमल में था


महफ़िल में सबके दिल को कोई शेर छू गया

शायर का इश्क,ग़म का फ़साना ग़ज़ल में था 

छान्दसिक अनुगायन 

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लमही के अमृत राय  विजय पण्डित 

Shabdankan शब्दांकन 

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चीन पर आर्थिक संकट का साया 

हाल में चीन की सबसे बड़ी रियलिटी फर्म एवरग्रैंड के दफ़्तरों के बाहर नाराज़ निवेशकों की भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। चीनी-व्यवस्था को देखते हुए यह एक नई किस्म की घटना है। जनता का विरोध? अर्थव्यवस्था के रूपांतरण के साथ चीनी समाज और राजनीति में बदलाव आ रहा है। वैश्विक-अर्थव्यवस्था से जुड़ जाने के कारण उसपर वैश्विक गतिविधियों का और चीनी गतिविधियों का वैश्विक-अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा है। और इसके साथ कुछ सैद्धांतिक प्रश्न खड़े होने लगे हैं, जो भविष्य में चीन की साम्यवादी-व्यवस्था के लिए चुनौती पेश करेंगे।जिज्ञासा 

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भारतीय मीडिया फ़ासीवादी प्रचारतंत्र ही है 

हमारी आवाज़ 

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मनुष्य प्रजाति: प्रश्न करने की प्रच्छन्न परंपरा 

कबीरा खडा़ बाज़ार में 

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घर नमक नहीं हो सकता 

मुझे याद है

आज भी

तुम्हारी आंखों में

उम्र के सूखेपन के बीच

कोई स्वप्न पल रहा है

कोई

श्वेत स्वप्न।  

पुरवाई 

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ग़ज़ल - हमने सिक्के उछाल रख्खे हैं 

हमने  सिक्के  उछाल  रख्खे हैं
वो सनम दिल निकाल रख्खे हैं।।

तेरी  बातो  पे था यकीं मुझको
गुमाँ क्या क्या जो पाल रख्खे हैं।। 

आवाज सुख़न ए अदब 

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आज के लिए बस इतना ही...!

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11 comments:

  1. आज के अंक में 'भारतीय मीडिया फ़ासीवादी प्रचारतंत्र ही है' शीर्षक आलेख सामयिक और पठनीय है।

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  2. सुप्रभात🙏🙏
    सराहनीय प्रस्तुति
    मेरी रचना को चर्चामंच में जगह देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद🙏🙏

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  3. पठनीय चर्चा.आभार आपका

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  4. बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय शास्त्री जी....।

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  5. मेरी रचना को यथोचित स्थान देने के लिये मयंक सर एवं मंच प्रबंधन का हृदय से आभार और मंच के सुचारु, सुव्यवस्थित तथा सफल संचालन हेतु हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ🙏🙏🙏💕💕💕⚘🌷🌼🌻🌺🥀🌱🌹

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  6. पठनीय चर्चा,हार्दिक आभार आपका सर।आप अपना आशीष बनाए रखे

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  7. सुन्दर संयोजन, हार्दिक बधाई आभार 🙏

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  8. रोचक लिंक्स से सुसज्जित चर्चा... मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार...

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  9. सभी टिप्पणी दाताओं का ह्रदय से आभारी हूं

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  10. सार्थक पठनीय चर्चा , परिश्रम से संकलित सुंदर लिंक सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए हृदय से आभार।
    सादर।

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  11. बहुत ही अच्छे और पठनीय लिनक्स |सादर प्रणाम सर |

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