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Tuesday, October 26, 2021

"अदालत अन्तरात्मा की.."( चर्चा अंक4228)

 सादर अभिवादन

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है ।

(शीर्षक और भुमिका आदरणीया उर्मिला जी की रचना से)

अदालत अन्तरात्मा की......

कभी अन्तरात्मा की अदालत में जाया करिए,
स्वयम को पहचानने में भूल हो न जाए,
हदय को  भी  जरा  खंगाला करिए,
ह्रदय दर्पण है आपके व्यक्तित्व का... 
इसे भी संवारा  संवारा करिए।।
*****
आत्मसात करने योग्य सीख....
पहले खुद का अवलोकन करें फिर दुसरो का..
चलते हैं, आज की कुछ खास रचनाओं की ओर....
******

गीत 

"टूटी-फूटी रोमन-हिन्दी, 

हमें चिढ़ाया सा करती है"

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मुझसे बतियाने को कोई,
चेली बन जाया करती है!
उसकी बातें सुनकर मुझको,
हँसी बहुत आया करती है!

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चाँद और तुम...कहमुकरियाँ
आधा गोरा आधा काला 
रूप बदलता गड़बड़झाला
मुझे देख मुस्काता मंद
क्या सखि साजन ? ना सखि चंद ।।
*****
ख़्वाहिश
अगर कभी भी
आपके मन में एक ख्वाहिश उठती है
एक जगह टिक बैठने की
तो समझ लीजिये 
आप सुकून में है
किसी काम में आपका मन
इतना रम जाता है
किसी एक इंसान का सामिप्य 
****
वक्त
वक्त को साथी बनाना सीख लो।
साथ उसका तुम निभाना सीख लो।
वक्त के संग चलना तुमको है सदा-
कदम उससे तुम मिलाना सीख लो।
*******
ग़ज़ल

आपकी याद को जब ज़ुदा कर दिया।

रूह को जिस्म ने ज्यों फ़ना कर दिया।।


जिंदगी फिर अधूरी कहानी बनी

बेसबब ही दुखों को बड़ा कर दिया।।

*****

बस इतना सा #फसाना है।

चाहत यह उनकी बस इतना सा फसाना है। चाहतों का समंदर है , और डूबते ही जाना है । फूलों की खुशबू भी , अब करती नहीं दीवाना है । साँसों की उनकी खुशबू ही करे मौसम सुहाना है । .........

*******

दोस्तों, कभी कभी एहतियात बरतने के बावजूद चायपत्ती या फ़िर अन्य खाद्य पदार्थ सिंक की पाइप में जाकर फंस जाते है। पाइप में जमा हो रहे इन खाद्य पदार्थों की वजह से सिंक जाम होने की समस्या आती है। ऐसे में हमें समझ में नहीं आता कि बंद सिंक को कैसे खोले? (How to unclog kitchen sink) सिंक के पाइप से आनेवाली बदबू को कैसे रोके ***** आज का सफर यही तक, अब आज्ञा देंआप का दिन मंगलमय होकामिनी सिन्हा

8 comments:

  1. बेहतरीन संकलन
    मेरी रचना को स्थान देने के लिये हार्दिक आभार

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  2. कामिनी जी, नमस्कार !
    बहुत सुंदर सारगर्भित तथा पठनीय सूत्रों का अनूठा संकलन, आपके श्रम को मेरा हार्दिक नमन, मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार, शुभकामनाओं सहित जिज्ञासा सिंह..

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  3. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

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  4. बहुत सुन्दर और सार्थक चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

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  5. बहुत सुंदर सारगर्भित तथा पठनीय सूत्रों का अनूठा संकलन, आपके श्रम को मेरा हार्दिक नमन, मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार, शुभकामनाओं सहित जिज्ञासा सिंह.. Free me Download krein: Mahadev Photo | महादेव फोटो

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  6. आदरणीय सिन्हा मेम ।
    मेरी प्रविष्टि् के लिंक को चर्चा इस अंक "अदालत अन्तरात्मा की.."( चर्चा अंक4228) पर शामिल करने के लिए सादर धन्यवाद और आभार ।
    सभी संकलित रचनाएँ बहुत सुंदर और सारगर्भित है । सभी प्रतिभागियों को बहुत बधाइयाँ और शुभकामनायें ।
    सादर ।

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  7. आप सभी को हृदयतल से धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

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  8. बढ़िया प्रस्तुति

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