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Friday, October 29, 2021

'चाँद और इश्क़'(चर्चा अंक4231)

 सादर अभिवादन। 

आज की प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

 शीर्षक व काव्यांश आ. मनोज कयाल जी की रचना 'चाँद और इश्क़' से -

जोरों से दिल हमारा भी खिलखिला उठा तब l
पकड़ा गया चाँद जब चोरी चोरी निहारते हुए ll

रुखसार से अपने बेपर्दा होते हुए देखा है हमने l
चाँद को चुपके चुपके अकेले में मुस्कराते हुए ll

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-
--
वो घर स्वर्ग समान है, जिसमें माँ का वास।
अब मेरा माँ के बिना, मन है बहुत उदास।।

बचपन मेरा खो गया, हुआ वृद्ध मैं आज।
सोच-समझकर अब मुझे, करने हैं सब काज।
माँ नमस्तुते
कमलासना, वरदायिनी 
वीणा मधुर कर धारिणी 
भयहारिणी, भवतारिणी, 
माँ नमस्तुते, माँ नमस्तुते
दीवाने हुए हम भी उस चौदहवीं के चाँद के l
ज़माना आतुर जिसके एक दीदार के लिए ll

फलक तलक गूँज रही इसकी ही गूँज हैं l
अर्ध चाँद का अक्स इश्क़ का ही नूर हैं ll
वह  मंदिर की घंटी की गूँज से
तेरी उपस्थिति जान लेती है 
तुझे पहचान लेती है |
मंद हवा का झोका  जब आता 
उसमें बसती सुगंध में   
वह अपनी हाजरी दर्ज कराती 
मन को वहीं खींच ले जाती |
इसी से शहर के बड़े ढूंढे कॉलेज,
करा दाखिला और ये कमरा दिलाया ।
लगी झाँकने जब मैं उनकी वो खिड़की,
तो लड़की की माँ ने मुझे ये बताया ।।

पढ़ेगी, लिखेगी ये अफसर बनेगी,
हमारे भी दिन यूँ बहुर जाएँगे जी ।
हटेगी गरीबी, छोड़ गाँव अपना,
शहर में ही आकर के बस जाएँगे ही ।।
और तुम
मैने नहीं पढ़ा है टैगोर को 
और ज़्यादा से ज़्यादा 
मैं इतना जानता हूँ 
कि जॉर्ज हैरिसन ने सीखा था 
रवि शंकर से सितार बजाना
किसी भी कार्यक्रम में समय के पहले पहुँचने की आदत होने से ज्यों ही देर होने लगती है हड़बड़ाहट हो जाती है। जब ओला की गाड़ी ने रफ्तार पकड़ी तब ध्यान आया कि खुदरा पैसा बैग में नहीं है। केवल पाँच सौ वाले रुपये हैं..।
"क्या आपके पास पाँच सौ का खुल्ला पैसा है?" चालक से मैंने पूछा।
"नहीं मैडम जी। आज सुबह से जितनी सवारी बैठी सबने पाँच सौ का ही नोट दिया और खुल्ला खत्म हो गया।" चालक ने कहा।
अक्सर होता है कि हम लोगो को मतलब अपने प्रिय लोगो को बांधकर रखना चाहते है .....हर वक्त उनका सामिप्य चाहते है क्योकि हम उनसे प्यार करते है। क्या यह सच में प्यार है ? 
        हम उनकी हर बात मानते है। उनको खुश रखने की कोशिश करते है। उनकी गलत बातों को नजरअंदाज कर जाते है बिल्कुल उसी तरह जैसे एक माँ को अपने बच्चें की गलतियां कभी दिखती ही नहीं है । क्या यह है अनकंडीशनल लव ?
        आप किसी के आँसू नहीं देख सकते क्योकि आप उनसे प्यार करते है । आप उनके लिये हर वो काम करते है जो उनकी आँखों को नम होने से बचाये रखे । आप दुनियां के हर बदरंग से उन्हे बचाकर रखते है। उनकी हर तमन्ना आपकी अपनी इच्छा बन जाती है। 
प्रेम की क्या यही परिभाषा है ? 
--
यह पेय स्वादिष्ट होने के साथ-साथ बहुत पाचक रहता है। वैसे तो कांजी वडा कभी भी बनाया जाता है लेकिन त्यौहारों पर खासकर दिवाली पर ये जरूर बनाया जाता है। इसके पिछे एक बहुत बड़ा कारण है। दिवाली में कई मिठाइयां और तला आदि खाकर पेट ख़राब हो जाता है तो ऐसे में कांजी वड़ा खाने से हाजमा दुरुस्त हो जाता है। तो आइए बनाते है पाचक और स्वादिष्ट कांजी वडा...
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6 comments:

  1. असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार आपका
    श्रमसाध्य प्रस्तुति हेतु साधुवाद

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  2. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, अनिता।

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  3. बहुत अच्‍छी चर्चा प्रस्‍तुति

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  4. सुंदर एवं पठनीय लिंको से सजी लाजवाब रचनाएँ । मेरी रचना को चर्चा में शामिल करने हेतु हृदयतल से धन्यवाद अनीता जी,
    सभी रचनाकारों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं, नमन और वंदन ।

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  5. बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार अनीता सैनी जी।

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  6. सुप्रभात
    धन्यवाद अनीता जी मेरी रचना को शामिल करने के लिए |

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