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Sunday, October 17, 2021

"रावण मरता क्यों नहीं"(चर्चा अंक 4220)

सादर अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक आदरणीया सुजाता जी की रचना से)

सच,रावण  कभी नहीं मरता 

हम हर साल उसको मारने का ढोंग भर करते हैं 

खैर,चलते हैं,आज की कुछ खास रचनाओं की ओर......

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 गीत "गोमुख से सागर तक जाती"

 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आड़े-तिरछे और नुकीले

पाषाणों को तराशती है। 

पर्वत से मैदानों तक जो

अपना पथ खुद तलाशती है। 

गोमुख से सागर तक जाती। 

वो पावन गंगा कहलाती 

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रावण मरता क्यों नहीं

हर साल विजयदशमी की अवसर पर बुराई के प्रतीक स्वरूप रावण को हम तीर चलाकर मारते हैं। अग्नि प्रज्वलित कर उसे धूं-धूं कर जलते हुए देखते हैं और मन में संतुष्ट होते हैं कि रावण का दहन हो गया।रावण मर गया। किन्तु आगामी साल के विजयदशमी को पुनः रावण को मारना पड़ता है।फिर हम सोचते हैं कि प्रत्येक वर्ष मारे जाने पर भी रावण मरता क्यों नहीं ? 


 ****** 

मत उतरो

मत उतरो ।

सोचो समझो तनिक स्वयं को,
और अभी थोड़ा ठहरो ।।

चढ़े अगर अंबर पे हो,
तो नापो उसकी आज भुजाएँ ।
चाँद, सितारे नभमंडल औ,
सप्तऋषि की गूढ़ कथाएं ।।

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दो बैल और एक इंजेक्शन
बबलू पिछले 10 दिन से अस्पताल में है। उसका नवजात बच्चा वेंटिलेटर पर ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा है। राहत की बात यह है कि उसके पास आयुष्मान कार्ड है जिससे इलाज का खर्च वहन हो जा रहा है लेकिन कब डॉक्टर ने उसे 32 हजार का इंजेक्शन बाहर से खरीदने को कहा तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गयी। 
"लेकिन डॉक्टर साहब मेरे पास तो आयुष्मान कार्ड है और सरकार तो कहती है कि 5 लाख रुपये तक का मुफ़्त इलाज होता है?" बबलू रुंआसा होकर बोला।
"तो क्या हुआ? आयुष्मान कार्ड से यहाँ एक लिमिट में ही इलाज होता है। महंगा दवा और सुई बाहर से ही खरीदना होगा।"  

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लघुकथा- समयमम्मी, आप समझती क्यों नहीं? हम दोनों जॉब करते है...प्रमिला घर और ऑफिस दोनों संभालती है...ऐसे में हमारे पास खुद के लिए समय नहीं है...तो हम आपसे बिना वजह बात करने का समय कैसे निकालेंगे?'' पंकज ने कहा। ****** ग़ज़ल 
गमों को उठा कर चला कारवां है।
बनी जिंदगी फिर धुआं ही धुआं है।।

जहां में मुसाफ़िर रहे चार दिन के
दिया क्यों बशर ने सदा इम्तिहां है।।

शिकायत करें दर्द क्या हाकिमों से
अदालत लगा कौन सुनता यहां है।

***** 

तुम्हारी नर्म-गर्म हथेलियों के बीच खिला पुष्प

और भी खिल जाता है, जब

विटामिन ई से भरपूर चेहरे वाली तुम्हारी स्मित

इसे अपलक निहारती है

तुम्हारा कहीं भी खिलखिलाकर हँसना

***** 

भाई देवदार! 

****** 
मैंने पूछा कौन है 
उसने कहा मैं हूँ बीता हुआ लम्हा 
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आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दें  
आपका दिन मंगलमय हो 
कामिनी सिन्हा 

14 comments:

  1. इस अंक की लघु कथा 'समय' तो अब घर-घर की कहानी बनगई है। हमारे बच्‍चों के पास जब खुद के लिए ही समय नहीं बच रहा तो वे बूढों के लिए समय कैसे निकालें। 'रावण मरता क्‍यों नहीं' का जवाब यही है कि रावण कभी मरेगा भी नहीं। हम सब अपने-अपने भाीतर के रावण को सुरक्षित रखते हैं और पडौसी से कहते हैं कि वह अपने भीतर के रावण को मारे। ऐसे में, रावण मरे तो कैसे मरे। नहीं मर सकता। कभी नहीं मर सकता।

    मेरी ब्‍लॉग पोस्‍ट को अंक में शमिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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    1. बिल्कुल सही कहा आपने सर, खुद से ज्यादा दूसरों को सुधारने में हम रुचि रखते हैं,सादर नमस्कार

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति आ.सखी कामिनी जी।

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  3. बेहतरीन
    मेरी रचना को स्थान देने के लिये हार्दिक आभार

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  4. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति
    रावण क्यों नहीं मरता? लेख सच में बहुत ही उम्दा और सराहनीय है!इस पर हर किसी को विचार करने की जरूरत है

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    1. तुम ने सही कहा मनीषा, ये विचार विचारणीय है, आज आत्म मंथन करने की बेहद जरूरत है।

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  5. सुंदर प्रस्तुति

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  6. कामिनी जी, विविध रंगों से सजा आज का संकलन पठनीय तथा सराहनीय है, इन सब के बीच मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका असंख्य आभार और अभिनंदन।

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  7. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

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  8. सभी ल‍िंक एक से बढ़कर एक द‍िए हैं काम‍िनी जी, वाह। इस प्रयास की ज‍ितनी प्रशंसा की जाए कम है।

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  9. बहुत बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

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  10. उत्साहवर्धन हेतु आप सभी को हृदयतल से धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

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  11. बहुत बेहतरीन संकलन ।देरी से आने के लिए क्षमा चाहूँगी ।मेरी रचना को स्थान देने पर तहेदिल से शुक्रिया ।

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