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Thursday, November 08, 2012

कहाँ छिपे कन्हाई ( चर्चा - 1057 )

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है 
चलते हैं चर्चा की ओर 
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रविकर की कुण्डलियाँ
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"लिंक-लिक्खाड़"
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आज के लिए बस इतना ही 
धन्यवाद

37 comments:

  1. आज की चर्चामें आदरणीय दिलबाग विर्क बहुत अच्छे लिंक पढ़ने के लिए प्रस्तुत किये हैं।
    आभार विर्क जी आपका!
    --
    चर्चाकार के रूप में पुनः जुड़ने पर श्रीमती वन्दना गुप्ता का चर्चा मंच परिवार हार्दिक स्वागत करता है।

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  2. लिव इन रिलेशन की हकीकत ...एवं परिणति ...डा श्याम गुप्त
    डा. श्याम गुप्त
    एक ब्लॉग सबका
    मानव पुरखों से रहा, कहीं आज अगुवाय |
    मन मेदा मजबूत मनु, लेता जहर पचाय |
    लेता जहर पचाय, खाय ले मार गालियाँ |
    कर कुकर्म मुसकाय, किया था क़त्ल हालिया |
    घर बलात घुस जाय, हुआ बलशाली दानव |
    अपसंस्कृति व्यवहार, आज मानव ना मानव ||

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  3. ले खा एक स्टेटमेंट अखबार में और दे के आ
    सुशील
    उल्लूक टाईम्स
    छाये उल्लू हर जगह, पा बन्दर का साथ |
    राग यहाँ फैला रहे, डाल हाथ में हाथ |
    डाल हाथ में हाथ, दिवाली आने वाली |
    आये काली रात, खाय जब उल्लू काली |
    तांत्रिक लेते खोज, अगर उल्लू छुप जाये |
    देखो बन्दर मित्र, कहीं ना तुम्हें छकाये ||

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    1. बंदर मिलते बहुत है,उल्लूक मिलते कम
      मगर आज की पोस्ट में,दीखे बड़ा है दम,,,,,

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  4. मुझे इश्क की बिमारी लगी
    "अनंत" अरुन शर्मा
    दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की )

    दिन दूभर और रात भारी लगी है ।
    2 2 2 2 1 2 1 22 1 22 (अरुण शर्मा )

    महबूबा की अजब तयारी लगी है ।
    जब से देखा उसे हमारी लगी है ।।

    करने आता तभी मुलाक़ात साला
    उसकी बोली मुझे कटारी लगी है ।।

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  5. तो ये है -
    Amrita Tanmay
    ताज़ी भाजी सी चमक, चढ़ा चटक सा रंग |
    पटल पोपले क्यूँ हुवे, करे पीलिमा दंग |
    करे पीलिमा दंग, सफेदी माँ-मूली की |
    नाले रही नहाय, ठण्ड से पा-लक छीकी |
    केमिकल लोचा देख, होय ना दादी राजी |
    कविता-लेख कुँवार, करे क्या हाय पिताजी ??

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  6. कई लिंक्स के साथ चर्चा |मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार |उम्दा चर्चा |
    आशा

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  7. सुप्रभात!
    बहुत बढ़िया लिंक्स...सार्थक चर्चा प्रस्तुति ...
    आभार!

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  8. bahut badhiya links mala men jaise moti ....

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  9. बहुत सुन्दर लिंक्स संजोये हैं ………मुझे चर्चामंच पर इतना मान सम्मान देने के लिये हार्दिक आभार शास्त्री जी :)

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  10. बहुत बढ़िया चर्चा । एक से बढ़कर एक पोस्ट को शामिल किया है आपने ।
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार ।
    चर्चा मंच से पुनः जुड़ने पर वंदना जी का हार्दिक स्वागत है ।

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  11. सुन्दर-2 लिंक्स से सुजज्जित चर्चामंच, मेरी रचना को स्थान दिया बहुत-2 शुक्रिया दिलबाग जी

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  12. बढ़िया सधी हुई चर्चा.... वंदना जी का स्वागत :)

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  13. बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स संयोजित किये हैं आपने
    चर्चा मंच से पुनः जुड़ने पर वंदना जी का हार्दिक स्वागत है !!

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  14. बहुत बढ़िया चर्चा बढ़िया सूत्र आपको बधाई दिलबाग जी

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  15. वंदना जी का हार्दिक स्वागत एवं बधाई

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  16. वंदना मेम को ढेर सारी शुभकामनाएं

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  17. मेरा मानना है कि कल दुनिया की सबसे बड़ी खबर एक मात्र यही थी कि अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव। मुझे लग रहा था कि आज की चर्चा में इससे जुड़े तमाम लेख के लिंक्स मिलेंगे। पर थोड़ा हैरानी हुई एक भी लेख इस विषय पर यहां नहीं है।

    सभी की अपनी अपनी पसंद और कमिटमेंट होते हैं, मेरा सिर्फ सुझाव है।

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  18. बहुत ही सुन्दर और रोचक चर्चा ।

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  19. बढ़िया चर्चा बढ़िया सूत्र,,,
    वंदना जी का हार्दिक स्वागत एवं बहुत२ बधाई

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  20. आभार चर्चा मंच का और दिलबाग जी का !
    सलीकेदार सुंदर चर्चा में उल्लूक को स्थान देने के लिये !

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  21. nice charcha please come http://www.kuldeepkikavita.blogspot.com

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  22. लिंक-1
    सुन्दर अभिव्यक्ति!
    मनमोहन के देश में, ले लो फिर अवतार।
    आरत भार का करों, कान्हा जी उद्धार।।

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  23. लिंक-2
    दिल के कोटर में छिपे, माणिक-मोती-रत्न।
    इन्हें खोजने के लिए, करना कुछ प्रयत्न।।

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  24. बहुत सुन्दर है दोस्त बहुत बढ़िया लिख रहे हो .


    बिखरी आबाद जिंदगी, इस तरह,
    अत्र फूलों की लुटी, क्यारी लगी

    इश्क पर जोर नहीं ,है ये वो आतिश ग़ालिब ,

    के लगाए न लगे और बुझाए न बने .

    मरीज इश्क का

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  25. लिंक-4
    अलग-अलग हैं पंथ सब, दाता सबका एक।
    जग के पालनहार के, हैं गुण-कर्म अनेक।।

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  26. लिंक-5
    दर्द सहो-आँसू पियो, भर जायेगा पेट।
    रो-धोकर के मत करो, अपना मटियामेट।।

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  27. यहाँ यही हुआ है अक्सर ,बस अड्डा पहले बन जाता है ऊबड़ खाबड़ जगह पर ,ढांचा बाद में खड़ा किया जाता है इसीलिए नगर नियोजन की

    होती है ऐसी की तैसी एक सड़क बना जाता है दूसरा अंग उसे

    खोद के चला जाता है सीवर बिछाने के लिए .अच्छा मुद्दा उठाया है .विदेशों में पार पथ /साइकिल पथ और हेलमेट सभी ज़रूरी हैं अलबत्ता

    लोग साइकिल चलाएं तो स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्ची भी कम

    हो .साइकिल मिले निश्शुल्क .


    ऑक्सीजन की खपत बढ़ाने वाला सर्वोत्तम व्यायाम है साइकिल चलाना .काश यह योजना सिरे चढ़े एक ढांचा परिपथ का जल्दी खड़ा हो

    साइकिल सवारों के लिए

    .साईकिल फिर लौट रहा है

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  28. बेहतरीन तंज बहु - रूपा भोगावती पर .

    इनक्रेडिबल और शाइनिंग इंडिया की कविता

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  29. बेहतरीन तंज बहु - रूपा भोगावती पर .

    अब दिनकर की वह कामिनी कहाँ -

    सत्य ही रहता नहीं यह ध्यान ,

    तुम कविता कुसुम या कामिनी हो .

    अब तो शरीर का हर आयाम देता है ,

    खबर ,

    चुनिन्दा कृत्रिम अंगों को घूरता है कैमरा बे -धड़क .

    इनक्रेडिबल और शाइनिंग इंडिया की कविता

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  30. व्यंग्य के रंग उलूक टाइम्स के संग ,

    बंदरों के jalve dekhe ulookon ke sang .

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    1. वो क्या पागल बनेगा, जिसका उल्लू नाम।
      डूब मरो मझधार में, क्या चुल्लू का काम।।

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  31. माता देखी पुत्र की, जब से प्रगति रिपोट ।
    मन में नित चिन्तन करे, सुनी गडकरी खोट
    सुनी गडकरी खोट, आई-क्यु बहुतै अच्छा ।
    दाउद ना बन जाय, करो हे ईश्वर रक्षा ।
    बनना इसे नरेंद्र, उसे बाबा समझाता ।
    संस्कार शुभ-श्रेष्ठ, सदा दे सदगुण माता ।

    भले लिंक लिख्खाड है भली आपकी बाण ,

    किन्तु टिप्पणियाँ आपकी सदा हमारी शान ,

    बचो !भाई अरुण निगम से


    टिप्पणियाँ

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  32. madhu singh
    8:16 pm
    Swagat Abhinandan.........aapka aana bahut hi accha laga,ab jayeeyega nahi

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  33. सुन्दर और रोचक चर्चा ।

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  34. मेरे ब्लॉग पर स्वागत है
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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