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Saturday, November 24, 2012

फ़टाफ़ट चर्चा

दोस्तों फ़टाफ़ट चर्चा में आपका स्वागत है क्योंकि वक्त कम है और काम ज्यादा इसलिये बात कम और पढिये लिंक्स-


शर्म कीजिये !!

कौन करता है ?

 

बोलते चित्र (कुण्डलिया छंद )

ऐसा क्या :)

 

" ब्लॉग पर पोस्ट पब्लिश करने का मुहूर्त ........."

अच्छा ऐसा भी होता है

 

यहाँ जन गण भी भाग्यविधाता है

अगर कोई माने तो ………

 

" हिन्दी कथा -साहित्य में नारी-जीवन को चित्रित करती महिला रचनाकार ”

स्वागत है

 

क्या आपका ब्लॉग यहाँ शामिल हो चुका है ?

अभी देखते हैं जी

 

बुझा दो सांस जिंदगी कि बहुत धुआं हैं शामों में...

उदास हूँ कह नहीं सकती कि बहुत खुशमिज़ाज़ हूँ मैं……

 

इश्क

इश्क ही इश्क बस इश्क ही इश्क 

दूजा ना मुझे दिखा कुछ

 

रंगमंच

और उसके कलाकार हम सब 

 

"नमन शैतान करते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कब से करने लगे?

 

शनिवार की शाम

एक ख्याल ने दस्तक दी

 

केरियर, बॉस और विदेश के कारण विस्‍मृत पिता और परिवार

एक कसक के साथ जीना इतना आसाँ कहाँ 


"सबसे पहले आभार!" 
यह रूप भी खूब भाया!

सितारा हूं , अगर टूटा , …बनूंगा मैं महे-कामिल

 ऐसा ही बनना चाहिये 

 

आई ठंडःभोजन कम,हो प्यास बड़ी

अच्छा ऐसा क्या !!!


कांटे भी लगाने पड़ते हैं -

इक दूजे बिन हम अधूरे

 

मै ही तो हूँ

इसमें क्या शक है

 

कैसा लगता होगा पल पल मौत का इंतज़ार करना ?

ये तो होना ही था

 

रंग

कितने बदले?

 

मुझे फख्र है मैंने जन्म दिया बेटी को

 हर माँ हो होना ही चाहिये 

 

सर्द रात

कितने ख्वाब बुन गयी 

 

ब्लॉगर्स का संशय बना मुसीबत--मदद करें कृपया !

बहुत कठिन है डगर पनघट की

 

छोटी-छोटी बातें

बहुत परेशान करती हैं

 

सुख-दुख से परे

सिर्फ़ ज्ञानी ही जा सकता है

 

वह परिन्दा है

फिर उड्ना कैसे छोडेगा 

 

मृत्युदंड पर : कुछ गौर से कातिल का हुनर देख रहे हैं.

ये हुई ना बात 

 

लयबद्ध कविता लिखना हुआ आसान

अब और क्या चाहिये 

 

‘‘मेरा मतलब यह नहीं था’’

तो क्या था ? 

 



आज के लिये इतना ही ………अगली बार फिर मिलते हैं तब तक के लिये आज्ञा 


23 comments:

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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"रंग जिंदगी के" (चर्चा अंक-2818)

मित्रों! शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...