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Tuesday, November 27, 2012

मंगलवारीय चर्चा मंच (1076)चर्चा चाय का स्वाद लीजिये


आज की मंगलवारीय चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते आप सब का दिन मंगल मय हो 
मंच पे भावनाओं का पानी उबाला ब्लोग्बागानो की सूत्र पत्तियाँ  डाली  स्नेह की शक्कर मिलाई  और शब्दों का दूध मिलाया लो हो गई चर्चाचाय तैयार अखबार बाद में पढना ठण्ड बहुत है पहले चर्चा चाय का स्वाद लीजिये 
अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लोग्स

 

                         राजकोष से राजनीति !

                  रेखा श्रीवास्तव at मेरा सरोकार 




भूरी ,पीली - पीली ,कुछ सुनहरी 


किताबों की दुनिया-76

नीरज गोस्वामी at नीरज 


हक MANOJ KAYAL at Manoj Kayal 

टेंशन ...

उदय - uday at कडुवा सच ... 






यहाँ पर बहन राजेश कुमारी जी ने एक ऐसे ब्लॉगर की पोस्ट लगाई थी जो चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट लगाने पर आपत्ति कर चुका है! ब्लॉग व्यवस्थापक


ब्रजघाट , गढमुक्तेश्वर , हापुड

MANU PRAKASH TYAGI at yatra (यात्रा ) मुसाफिर हूं 


साध्वी प्रज्ञा जी की चिठ्ठी

कमल कुमार सिंह (नारद ) at नारद  


ख़ूबसूरत सी क़ज़ा याद करो!

चन्द्र भूषण मिश्रग़ाफ़िल at ग़ाफ़िल की अमानत  


हायकू

अल्पना वर्मा at Vyom ke Paar...व्योम के पार  


हरियाली

त्रिवेणी at त्रिवेणी  






अशोकनामा
घुटन - *घुटन* कितनी घुटन है रास्तों और मंज़िलों पर क्यों चलते हो फिर भी क्यों पहुँचते हो फिर भी तुम अपने क़दमों 

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"दोहा सप्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

इस लिंक को भी देखिए!

इस असार संसार मेंभाँति-भाँति के लोग।
कुछ अपनाते योग कोकुछ अपनाते भोग।१।

कदम-कदम पर घेरतींउलझन हमें अनेक।
किन्तु कभी मत छोड़नाअपना बुद्धिविवेक।२।
आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ अगले मंगल वार फिर मिलूंगी कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय 

21 comments:

  1. बढ़िया चर्चा!
    सभी लिंक पठनीय हैं!
    ध्यान रखें-
    यहाँ पर आपने एक ऐसे ब्लॉगर की पोस्ट लगाई थी जो चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट लगाने पर आपत्ति कर चुका है! ब्लॉग व्यवस्थापक

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  2. जी शास्त्री जी मैंने एक लिंक अनजाने में लगा दिया था जिसका मुझे बाद में पता चला उस व्यक्ति के अनुरोध पर हटा भी दिया था बात वहीँ ख़त्म हो जानी चाहिए थी कडवाहट को ख़त्म करना मेरा उसूल है इसे अन्यथा ना लिया जाए इस विषय में आगे कोई टिपण्णी भी नहीं चाहती |

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  3. आप की चर्चा हमेशा अनोखी होती है-
    बढ़िया चर्चा -

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  4. श्रद्धांजलि........(26 नवंबर विशेष)
    यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur)
    जो मेरा मन कहे
    सादर हे हुत-आत्मा, श्रद्धांजलि के फूल ।
    भारत अर्पित कर रहा, करिए इन्हें क़ुबूल ।
    करिए इन्हें क़ुबूल, भूल तुमको नहिं पायें ।
    किया निछावर जान, ढाल खुद ही बन जाएँ ।
    मरते मरते मार, दिए आतंकी चुनकर ।
    ऐसे पुलिस जवान, नमन करते हम सादर ।।

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  5. बस मूक हूँ .............पीड़ा का दिग्दर्शन करके
    वन्दना
    ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र


    दर्दनाक घटना घटी, मेरा पास पड़ोस ।
    दुष्टों की हरकत लटी, था *धैया में रोष ।
    था *धैया में रोष, कोसते हम दुष्कर्मी ।
    जेल प्रशासन ढीठ, दिखाया बेहद नरमी ।
    उठे मदद को हाथ, पीडिता की खातिर अब ।
    अपराधी को सजा, मिलेगी ना जाने कब ।।
    *धैया ग्राम हमारे कालेज के बगल में ही है जहाँ यह घटना हुई-

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  6. "टोपी मत उछालो" (कार्टूननिस्ट-मयंक खटीमा)
    टोपी क्या मिली?
    उछालने ही लगे!


    रहा भुनाता विश्व यह, बड़े बड़ों का नाम ।
    आदत इसकी यूँ पड़ी , चले सड़ों का नाम ।
    चले सड़ों का नाम, पिन्हाते रहते टोपी ।
    चलते गाँधी आज, हुई मकु नीति अलोपी ।
    अन्ना अपने बाप, हमारा अब भी नाता ।
    टोपी बेटा पहिर, नाम को चला भुनाता ।।

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  7. थानेदार बदलता है
    मनोज कुमार
    मनोज

    बरगद के नीचे कई, गई पीढ़िया बीत |
    आते जाते कारवाँ, वर्षा गर्मी शीत |
    वर्षा गर्मी शीत, रीत ना बदल सकी है |
    चूल्हा जाया होय, आत्मा वहीँ पकी है |
    मिला क़त्ल का केस, हुआ थाना फिर गदगद |
    जड़-गवाह चुपचाप, आज भी ताके बरगद ||

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  8. होना ही चाहिए -
    udaya veer singh
    उन्नयन (UNNAYANA) -
    आँखें पथराती गईं, नहीं सुबह नहिं शाम |
    हँसी -ख़ुशी के आ रहे, नहीं कहीं पैगाम |
    नहीं कहीं पैगाम, दाम नित्य मौत वसूले |
    मिटता गया वजूद, आज तो जीवन भूले |
    बुझती आशा ज्योति, दागती गर्म सलाखें |
    अब आयेगा कौन, करकती रविकर आँखें |

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  9. सुन्दर लिंक्स से सजी बढिया चर्चा

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  10. बहुत बढ़िया और पठनीय लिंक्स का संकलन । बहुत बढ़िया चर्चा ।

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  11. shaandaar-jaandaar charchaa ... jay ho ...

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  12. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ..आभार

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  13. लिंक-1
    शासक जमकर कर रहे, राजकोष से मौज।
    भरी हुई है देश में, मक्कारों की फौज।।

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  14. लिंक-2
    पतझड़ लाता है सदा, वासन्ती सन्देश।
    पीत रंग के बाद ही, मिलता नव परिवेश।।

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  15. ग़ाफिल जी की पोस्ट-
    मन के कोने में सजी, बाल्यकाल की याद।
    क्या बचपन मिल जायेगा, इस जीवन के बाद।।

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  16. बहुत ही सुंदर चर्चा सजायी है आपने । मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिये हार्दिक आभार

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  17. आदरणीया राजेश कुमारी बेहद सुन्दर लिंक्स संजोये हैं, मेरी रचना को स्थान दिया बहुत-2 शुक्रिया

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  18. धन्यवाद राजेश जी.....

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